वोटर लिस्ट से 11 करोड़ नाम गायब योगेंद्र यादव के बड़े खुलासे से सनसनी
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मुस्लिम नाउ विशेष
भारत में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत नागरिकों का मताधिकार है। लेकिन इन दिनों देश की मतदाता सूची में चल रही एक बड़ी प्रक्रिया ने पूरे देश में तहलका मचा दिया है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और योगेंद्र यादव के एक हालिया लेख ने इस पूरे मामले को देश के सामने ला खड़ा किया है। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित उनके लेख में दावा किया गया है कि देश भर में करीब 11.5 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
इस खुलासे के बाद देश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस प्रक्रिया में केवल आम नागरिक ही शिकार नहीं बन रहे हैं। भारत रत्न से सम्मानित देश के शीर्ष वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव और देश की पहली पीढ़ी की जानी मानी महिला फोटो पत्रकार सर्वेश का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब कर दिया गया है।
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त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु
- राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव के अनुसार एसआईआर अभियान के तहत देश भर में 11.5 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
- तेलंगाना के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन के अनुसार 2024 लोकसभा चुनाव में 94 करोड़ मतदाता थे जो एसआईआर के बाद घटकर 80.7 करोड़ रह गए हैं।
- भारत रत्न वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव को वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट में प्रोफेसर शब्द में स्पेलिंग की मामूली गलती के कारण नोटिस दिया गया है।
- 80 के दशक से दिल्ली में फोटो पत्रकारिता कर रही वरिष्ठ पत्रकार सर्वेश का नाम भी दिल्ली की मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
- पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे और रवीश कुमार ने इस प्रक्रिया की प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
- विपक्षी दलों और विश्लेषकों ने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में पूरे एसआईआर ऑपरेशन के स्वतंत्र सार्वजनिक ऑडिट की मांग की है।
योगेंद्र यादव का लेख और 11.5 करोड़ वोटों के नुकसान का गणित
वरिष्ठ विचार मंच के नेता योगेंद्र यादव ने अपने लेख में आंकड़ों के साथ एसआईआर अभियान की वास्तविक तस्वीर पेश की है। योगेंद्र यादव ने बताया कि जब उनकी टीम ने सबसे पहले यह अनुमान जताया था कि देश भर में 10 करोड़ से अधिक नाम काटे जा सकते हैं, तब लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन अब जब देश के लगभग सभी राज्यों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जनता के सामने आ चुकी है तो स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।
अंतिम आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 11.5 करोड़ को पार कर गई है। योगेंद्र यादव का मानना है कि एसआईआर केवल आंकड़ों की गलती या कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं है। यह भारत के चुनावी लोकतंत्र के ढांचे को बदलने की एक सोची समझी कोशिश दिखाई देती है।
हर नए चरण के साथ नाम काटे जाने का अनुपात बढ़ता ही जा रहा है। यदि इतनी बड़ी संख्या में वास्तविक नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा, तो किसी भी चुनाव के नतीजों की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा।
We calculated that a nationwide SIR could lead to a deletion of up to 10 crore names. No one believed us. Now that draft lists are available for all states, the final figure is likely to exceed 11.5 crore. With each phase, SIR has worsened and the proportion of deletions have… pic.twitter.com/nitZyQYrCw
— Yogendra Yadav (@_YogendraYadav) September 9, 2026
मोहम्मद अज़हरुद्दीन का आरोप और सुप्रीम कोर्ट से ऑडिट की मांग
पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और तेलंगाना सरकार में मंत्री मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा किया है। अज़हरुद्दीन ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सुधारना नहीं बल्कि मतदाताओं को बाहर निकालना बन गया है।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के समय भारत में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या 94 करोड़ थी। एसआईआर के बाद आई नई ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर केवल 80.7 करोड़ रह गई है।
अज़हरुद्दीन ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग देश को यह बताना चाहता है कि भारत के 13.3 करोड़ मतदाता अवैध थे। उन्होंने मांग की है कि इस तरह से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की सीधी देखरेख में एक स्वतंत्र ऑडिट कराया जाना चाहिए।
SIR seems to be more about 'removing voters' than revising the electoral roll.
— Mohammed Azharuddin (@azharflicks) September 9, 2026
Before SIR: 94 crore electors were registered for the 2024 Lok Sabha election.
After SIR (draft): The number of electors has come down to 80.7 crore.
Is the EC trying to tell us that 13.3 crore… pic.twitter.com/Dmly2kioqs
वर्ष 2002 को आधार बनाने का खेल और मुस्लिम राजनीति पर प्रभाव
इस पूरे विवाद का एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक पहलू भी है। हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के एक कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल यादव ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों और संघ के भाषणों के आधार पर बड़ा खुलासा किया था। श्यामलाल यादव के विश्लेषण के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दीर्घकालिक रणनीति का एक मुख्य लक्ष्य मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक आकांक्षाओं और उनके वोट बैंक के प्रभाव को समाप्त करना रहा है।
वर्ष 1965 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने आंध्र प्रदेश के एक संघ शिविर में कहा था कि मुसलमानों की समस्या का हल उनकी राजनीतिक पराजय में निहित है। जब उनकी राजनीतिक आकांक्षाएं समाप्त हो जाएंगी, तभी उन्हें मुख्यधारा में मिलाया जा सकेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट को आधार बनाकर जिस तरह से नाम छांटे जा रहे हैं, उससे एक खास समुदाय और गरीब तबके के लोगों का नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो रहा है। जब किसी वर्ग का नाम ही मतदाता सूची में नहीं रहेगा, तो उसकी राजनीतिक ताकत और चुनाव लड़ने की क्षमता अपने आप खत्म हो जाएगी।
भारत रत्न सीएनआर राव को नोटिस और पत्रकार सर्वेश का नाम गायब
एसआईआर अभियान की प्रशासनिक लापरवाही का सबसे चौंकाने वाला उदाहरण तब सामने आया जब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम भी इसमें उलझ गया।
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोशल मीडिया पर इस बात का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर सीएनआर राव को नाम में असमानता का नोटिस दिया गया है। कारण यह बताया गया कि वर्ष 2002 की पुरानी मतदाता सूची में उनके नाम के आगे लिखे प्रोफेसर शब्द में एक अतिरिक्त अक्षर एफ जुड़ गया था। राजदीप सरदेसाई ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि क्या ऐसी प्रक्रियाओं में सामान्य समझ और विवेक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
INTERESTING: SIR row: now Bharat Ratna and one of India’s leading scientists, Prof CNR Rao served notice for name mismatch! Apparently additional ‘F’ in his ‘Prof’ in the 2002 electoral roll! Prof Rao office says it is yet to receive notice. Can common sense be used occasionally…
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) September 9, 2026
इसी तरह दिल्ली की जानी मानी महिला फोटो पत्रकार सर्वेश का नाम भी एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से काट दिया गया है।
वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे ने इस पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि सर्वेश ने 1980 के दशक में तमाम संघर्षों से उबरकर दिल्ली में फोटो पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा था। वे देश की एक बेहतरीन फोटोग्राफर के रूप में उभरी हैं। उनका नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में न होना अक्षम्य और अकल्पनीय है।
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि सर्वेश को कौन नहीं जानता है। उन्होंने अपने लंबे करियर में अनगिनत चुनाव कवर किए हैं। वे दिल्ली में ही पैदा हुईं और यहीं पली बढ़ी हैं। उनका नाम भी एसआईआर से कट गया है। चुनाव आयोग की इस कार्यप्रणाली से आम लोग बेहद परेशान हो रहे हैं।
सर्वेश को मैं तब से जानती हूँ जब एक कठोर निजी संघर्ष से उबर कर उन्होंने ८० के दशक में दिल्ली की फ़ोटो पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और एक बेहतरीन फोटोग्राफर बन कर उभरीं। उनका नाम दिल्ली की SIR में दर्ज न होना अक्षम्य और अकल्पनीय है। https://t.co/jsST6CECpD
— Mrinal Pande (@MrinalPande1) September 9, 2026
चुनावी लोकतंत्र के वजूद पर सवाल और आगे का रास्ता
भारत का संविधान हर बालिग नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार देता है। लेकिन जिस तरह से एसआईआर के नाम पर करोड़ों लोगों के नाम बिना किसी जमीनी सत्यापन के काटे जा रहे हैं, उससे नागरिकों में अविश्वास बढ़ रहा है।
यदि किसी व्यक्ति के नाम में वर्ष 2002 के किसी दस्तावेज में लिपिकीय गलती थी, तो उसकी सजा 2026 में उस नागरिक का नाम काटकर नहीं दी जा सकती। लोकतंत्र में नागरिक का नाम काटना उसकी नागरिक पहचान पर हमला करने जैसा है।
देश भर के सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और राजनीतिक दलों ने मांग की है कि चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया में तुरंत सुधार करना चाहिए। जब तक हर काटे गए नाम की पारदर्शी तरीके से जांच नहीं हो जाती, तब तक अंतिम मतदाता सूची जारी नहीं की जानी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. एसआईआर (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों हो रहा है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को अपडेट करने का अभियान है। इस पर विवाद इसलिए हो रहा है क्योंकि इसके तहत देश भर में 11 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम बिना उचित जांच के काट दिए गए हैं।
2. योगेंद्र यादव ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर क्या बड़ा दावा किया है?
योगेंद्र यादव ने इंडियन एक्सप्रेस के अपने लेख में दावा किया है कि एसआईआर के कारण देश भर में 11.5 करोड़ से अधिक जायज मतदाताओं के नाम लिस्ट से गायब हो गए हैं जो चुनावी लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है।
3. पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने वोटर लिस्ट के बारे में क्या आंकड़े दिए?
अज़हरुद्दीन के अनुसार 2024 लोकसभा चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 94 करोड़ थी जो एसआईआर के नई ड्राफ्ट लिस्ट में घटकर 80.7 करोड़ रह गई है। यानी 13.3 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं।
4. भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम वोटर लिस्ट विवाद में क्यों आया?
वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट में उनके नाम के आगे लगे प्रोफेसर शब्द की स्पेलिंग में लिपिकीय गलती थी जिसके आधार पर उन्हें नाम के बेमेल होने का नोटिस जारी किया गया है।
5. फोटो पत्रकार सर्वेश का नाम कटने पर पत्रकारों ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
मृणाल पांडे, रवीश कुमार और राजदीप सरदेसाई जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि दिल्ली में जन्मी और चार दशकों से पत्रकारिता कर रही सर्वेश का नाम कटना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
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