वक़्फ़ संशोधन विधेयक: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सांसदों से किया विरोध करने का आह्वान
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली,नई दिल्ली
देशभर में वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा और उनके संरक्षण को लेकर उठे विवादों के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक़्फ़ संशोधन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इसे संविधान विरोधी करार दिया है। बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों और संसद सदस्यों से अपील की है कि वे इस विधेयक के खिलाफ एकजुट होकर विरोध दर्ज कराएं और किसी भी स्थिति में इसके समर्थन में मतदान न करें।
विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय की चिंताएँ
AIMPLB के अनुसार, यह विधेयक भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों का हनन करता है और अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन है। बोर्ड का कहना है कि यह विधेयक वक़्फ़ कानून को कमजोर करने और वक़्फ़ संपत्तियों को हड़पने की साजिश का हिस्सा है।
मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट के बावजूद देश में मस्जिदों पर अवैध दावे और विवाद खड़े किए जा रहे हैं। अगर यह संशोधन पारित हो जाता है, तो वक़्फ़ संपत्तियों पर सरकारी और गैर-सरकारी दावों की बाढ़ आ जाएगी और डीएम व कलेक्टर को वक़्फ़ संपत्तियों के स्वामित्व पर निर्णय लेने का अधिकार मिल जाएगा। इससे वक़्फ़ बोर्ड की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी और वक़्फ़ ट्रिब्यूनल की शक्तियों में भारी कमी आएगी।
वक़्फ़ संशोधन विधेयक को सपोर्ट न करें – ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष की संसद सदस्यों से अपील
— All India Muslim Personal Law Board (@AIMPLB_Official) April 1, 2025
नई दिल्ली, 01 अप्रैल 2025
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सभी सेक्युलर राजनीतिक दलों, जिनमें बीजेपी की सहयोगी पार्टियाँ और सांसद भी शामिल हैं, से अपील की है कि वे… pic.twitter.com/RiQxR1tZnO
वक़्फ़ संशोधन विधेयक के विवादास्पद बिंदु
- वक़्फ़ बाई यूज़र (Waqf by-user) की समाप्ति: यह संशोधन ऐसी संपत्तियों के वक़्फ़ दर्जे को समाप्त कर देगा, जिनका दशकों से धार्मिक उद्देश्यों के लिए उपयोग हो रहा था।
- लिमिटेशन एक्ट से छूट की समाप्ति: वर्तमान में वक़्फ़ संपत्तियाँ कानूनी सीमा (Limitations Act) से मुक्त हैं, लेकिन संशोधन के बाद कोई भी व्यक्ति 12 वर्षों तक किसी वक़्फ़ संपत्ति का अवैध कब्ज़ा बनाए रखने के बाद उसका मालिकाना हक़ मांग सकता है।
- वक़्फ़ बोर्ड और सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति: इस बदलाव से वक़्फ़ संपत्तियों की निगरानी और प्रशासन में गैर-मुस्लिम हस्तक्षेप बढ़ेगा।
- वक़्फ़ ट्रिब्यूनल की शक्तियों में कटौती: पहले वक़्फ़ से जुड़े मामलों का निर्णय वक़्फ़ ट्रिब्यूनल करता था, लेकिन अब यह अधिकार जिला प्रशासन (DM या कलेक्टर) को दिया जा सकता है। इससे सरकारी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाएगी।
- सरकारी संस्थाओं को वक़्फ़ संपत्तियों पर अधिकार देने का प्रयास: संशोधन के तहत, राज्य सरकार, नगर निगम और अर्ध-स्वायत्त संस्थाएँ वक़्फ़ संपत्तियों पर दावा कर सकेंगी।
AIMPLB की अपील: सामूहिक विरोध जरूरी
AIMPLB के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि इस विधेयक का पारित होना केवल मुस्लिम वक़्फ़ संपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे देश की धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा,
“हमारा देश हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और एक-दूसरे के धर्म, रीति-रिवाजों और त्योहारों के सम्मान के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन दुर्भाग्यवश, इस समय देश की बागडोर उन तत्वों के हाथ में है जो इस सांप्रदायिक सौहार्द्र को नष्ट करके देश में अराजकता और अशांति फैलाना चाहते हैं।”
उन्होंने संसद सदस्यों से अपील की कि वे इस विधेयक का खुले तौर पर विरोध करें और मतदान के दौरान इसके खिलाफ़ खड़े होकर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करें।
काबिल ए गौर
वक़्फ़ संपत्तियों पर नियंत्रण के प्रयास को लेकर उठे विवाद के बीच मुस्लिम समुदाय में असंतोष बढ़ता जा रहा है। AIMPLB और अन्य मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह विधेयक केवल मुस्लिम वक़्फ़ संपत्तियों को निशाना बनाता है, जबकि अन्य धार्मिक संपत्तियों को इसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में, विधेयक का विरोध न केवल मुस्लिम समुदाय बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे की रक्षा के लिए भी आवश्यक हो जाता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस मुद्दे पर बहस के दौरान कौन-कौन से दल इस विधेयक का समर्थन करते हैं और कौन इसके विरोध में खड़े होते हैं।