Culture

शिफा आफ़ताब अंसारी: इंडियन आइडल से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक सुरों की सफल यात्रा

‘मुस्लिम नाउ ब्यूरो’मुंबई/नई दिल्ली


भारतीय संगीत जगत में एक ऐसा नाम जो हर सुर में इबादत बुनता है, हर मंच पर अपनी मौजूदगी से रूह को छूता है—वो हैं शिफा आफ़ताब अंसारी। जिनकी गायकी में रविंद्र जैन जी की परंपरा की मिठास भी है, और आधुनिक मंचों की ऊर्जा भी। वे न सिर्फ़ एक सुरों की साधिका हैं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत भी हैं, जो मंच से लेकर स्क्रीन तक, और प्रतियोगिता से लेकर परोपकार तक, हर जगह अपनी आवाज़ से अलौकिकता रचती हैं।

संगीत का वो पहला सुर

शिफा आफ़ताब अंसारी ने संगीत की गहराइयों को उस गुरु से सीखा, जिन्होंने खुद इस देश को अनगिनत अमर धुनें दीं—पद्मश्री श्री रविंद्र जैन जी। उन्हीं के निर्देशन में शिफा ने रामायण और द्वारकाधीश जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों के लिए मुख्य स्वर दिए। यह एक साधारण गायिका के लिए नहीं, बल्कि समर्पण और तपस्या से सुरों को साधने वाली साधिका के लिए ही संभव था।

रियलिटी शोज़ से राष्ट्रीय पहचान

शिफा की प्रतिभा को सबसे पहले भारत ने पहचाना साल 2004 में, जब उन्होंने दूरदर्शन के शो “गाता रहे मेरा दिल” में जीत दर्ज की। फिर आया साल 2007—जब वे इंडियन आइडल सीजन 3 में टॉप 13 में पहुंचीं और अंताक्षरी – द ग्रेट चैलेंज में टॉप 3 में अपनी जगह बनाई। इसके बाद 2008 में क्रेज़ी किया रे (SAB Sony) की विनर बनकर उन्होंने देशभर में अपनी पहचान मज़बूत की।

बॉलीवुड और एलबम्स में स्वर यात्रा

शिफा ने बॉलीवुड में कई फ़िल्मों के लिए पार्श्वगायन किया है और कई म्यूज़िक एलबम्स में मुख्य गायिका के तौर पर हिस्सा लिया है। “सियाराम” जैसे लोकप्रिय एलबम में उन्होंने उदित नारायण के साथ मुख्य गायन किया, जो उनकी वर्सेटिलिटी को दर्शाता है। इसके अलावा वे पंजाबी म्यूज़िक वीडियो “ला लाई मुंदरी” में भी लीड रोल में नजर आईं, जिसे सुरों से सजाया था तारन्नुम मलिक ने।

मंचों की शोभा, अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति

शिफा ने देश-विदेश में सैकड़ों स्टेज शो में भाग लिया है, जिनमें राधा के श्याम (RJ Events) जैसी भव्य संगीतमय प्रस्तुतियां शामिल हैं। उन्होंने येसुदास, उदित नारायण, सुरेश वाडेकर, अमित कुमार, मनहर उदास जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा किया है—जो उनकी कला की परिपक्वता और स्वीकार्यता का प्रमाण है।

परोपकार के सुर

हाल ही में 8 जून को शिफा ने हरिओम चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक पुण्यकार्य में जामनगर के श्रोताओं के सामने प्रस्तुति दी। साथ में थे गायक आनंद विनोद जी और रीना गज्जर जी, और संगीत निर्देशन था राज राणा जी का। इसी तरह 25 जून को इंदौर के रवींद्र नाट्यगृह में “ए भाई ज़रा देख के चलो” कार्यक्रम में शिफा ने शानदार प्रस्तुति दी, जिसे उनके पति और संगीतकार अभिजीत गौर ने निर्देशित किया।

नारी सशक्तिकरण की मिसाल

“पर्दे की महारानियां”—एक ऐसा संगीतमय मंच, जिसमें केवल महिला कलाकारों की भागीदारी थी, शिफा इसमें भी प्रमुख गायिका के रूप में शामिल थीं। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने नारी सशक्तिकरण और संगीत की सौम्यता को एक साथ मंच पर जीवंत कर दिखाया।

आज की भूमिका: जज और प्रेरणा

आज शिफा “टाइम्स फ्रेश फेस” जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की निर्णायक मंडली का हिस्सा हैं। वे युवा प्रतिभाओं को न केवल मंच देती हैं, बल्कि उन्हें सुरों की भाषा सिखाकर आत्मविश्वास से भर देती हैं।


निष्कर्ष

शिफा आफ़ताब अंसारी महज़ एक गायिका नहीं हैं—वे एक ऐसी शख्सियत हैं जो भारतीय संगीत परंपरा को आधुनिकता से जोड़ती हैं। उनकी आवाज़ में अध्यात्म है, शैली है और समर्पण भी। चाहे वो इंडियन आइडल का मंच हो या किसी छोटे शहर का सांस्कृतिक उत्सव—शिफा हर जगह सुरों का उजास फैलाती हैं।

वे आज भी रियाज़ को अपना धर्म मानती हैं और हर प्रस्तुति को इबादत की तरह निभाती हैं। शायद इसी वजह से, श्रोताओं को उनकी हर प्रस्तुति में ‘रूह’ की झलक मिलती है।


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