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डिप्रेशन सर्वाइवर से मेंटल हेल्थ वॉरियर तक: सहर हाशमी की रिकॉर्ड-ब्रेकिंग राइड

मुस्लिम नाउ विशेष रिपोर्ट

मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करने और समाज में इस विषय से जुड़े कलंक को तोड़ने के लिए 29 वर्षीय सहर हाशमी ने जो अभियान शुरू किया, उसने देशभर में नई मिसाल कायम कर दी है। दिल्ली से कश्मीर तक उनकी 2779 किलोमीटर लंबी बाइक राइड न सिर्फ़ एक साहसी कदम थी, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को नई दिशा देने वाला अभियान भी बन गया।

सहर हाशमी खुद बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (BPD) और नैदानिक अवसाद जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों से जूझ चुकी हैं। अपने जीवन के इस संघर्ष से प्रेरित होकर उन्होंने ठान लिया कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैले भय, गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक को खत्म करना होगा। ‘ब्रेकिंग स्टिग्मा: वन माइल एट अ टाइम’ नामक इस बाइक राइड कैंपेन को उन्होंने 20 अप्रैल से 8 मई 2025 तक सफलतापूर्वक पूरा किया।


मानसिक स्वास्थ्य पर 30 से अधिक वर्कशॉप

यात्रा के दौरान, सहर और उनकी टीम ने दिल्ली, अनंतनाग, श्रीनगर और कुपवाड़ा सहित 21 शहरों में 30 से अधिक वर्कशॉप आयोजित कीं। इन वर्कशॉप्स में 3,500 से अधिक लोगों को सीधे मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद, आत्महत्या रोकथाम और थेरेपी के महत्व पर जागरूक किया गया। उनका अभियान इतना प्रभावी रहा कि इसे इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में “मेंटल हेल्थ पर सबसे अधिक सेमिनार आयोजित करने वाली राइड” के रूप में दर्ज किया गया।

सहर हाशमी कहती हैं,

“मैंने अपने जीवन के 10 साल मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए बिताए। मुझे पता है कि इस दर्द का सामना करना कितना मुश्किल होता है। आज मेरा मकसद है कि किसी और छात्र या युवा को इस तकलीफ़ से अकेले न जूझना पड़े।”


टीम और साथियों का योगदान

इस अभियान में सहर के साथ प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता देव देसाई भी थे, जिन्हें जमीनी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम करने का 15 साल का अनुभव है। टीम में कश्मीर के बराजुद्दीन, फ़िल्ममेकर सुमन्यु शुक्ला और एफ-सिंगर नाजनीन शेख भी शामिल थे।

देव देसाई ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा,

“कोविड के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुली बातचीत शुरू हुई थी। हमने 90 से अधिक काउंसलर्स और साइकोलॉजिस्ट की टीम बनाई थी, जो आज 140 विशेषज्ञों तक पहुंच चुकी है। अब हम ऑनलाइन काउंसलिंग के साथ ही ग्राउंड लेवल पर जागरूकता फैला रहे हैं।”


कठिन रास्ते और खतरनाक हालात

सहर की यात्रा बिल्कुल आसान नहीं थी। 20 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बादल फटने से लैंडस्लाइड हुई, जिससे हाईवे कई दिनों तक बंद रहा। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला भी हुआ, जिसने सफर को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद सहर और उनकी टीम का हौसला कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने हर मुश्किल को पार किया और सफलतापूर्वक 20 दिनों में यह यात्रा पूरी की।


क्यों है यह अभियान खास?

भारत में 11 करोड़ से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और हर साल करीब एक लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। WHO के अनुसार, भारत में 70-92% लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उपचार नहीं लेते। सहर का यह अभियान इस खामोशी को तोड़ने का प्रयास है।


छात्रों के लिए संदेश

सहर का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना ही पहला कदम है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि डिप्रेशन, एंग्जायटी या बीपीडी कमजोरी नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है, जिसका सही समय पर इलाज और थेरेपी से समाधान संभव है।


फैशन स्टाइलिस्ट से मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट तक का सफर

सहर हाशमी एक सफल फैशन स्टाइलिस्ट और मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। लगभग एक दशक तक अवसाद और बीपीडी से जूझने के बाद उन्होंने अपने अनुभवों को सोशल मीडिया और वर्कशॉप्स के जरिए साझा करना शुरू किया। ‘thementalhealthdiarybyseher’ नामक उनका सोशल मीडिया पेज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


भविष्य की योजनाएँ

इस अभियान की सफलता के बाद सहर हाशमी अब भारत के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जागरूकता राइड्स और कैंप्स करने की योजना बना रही हैं। उनका उद्देश्य है कि प्रत्येक जिला मुख्यालय में एक सस्ती या मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली विकसित हो।


निष्कर्ष

सहर हाशमी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि व्यक्तिगत संघर्ष भी समाज में बड़े बदलाव का कारण बन सकते हैं। उन्होंने न केवल अपने जीवन को बदला, बल्कि हजारों युवाओं के जीवन को रोशनी दी।