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दिल्ली दंगा मामला: शरजील इमाम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, बेल पर सवाल

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,नई दिल्ली, 6 सितंबर (एजेंसी रिपोर्ट)
दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश से जुड़े यूएपीए मामले में आरोपी शरजील इमाम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।

शरजील इमाम की बेल याचिका खारिज होने के बाद से ही विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अदालत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इमाम तीन साल से ज़्यादा समय से जेल में हैं और ट्रायल अभी भी अधूरा है, ऐसे में न्याय में देरी उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

बिहार चुनाव लड़ने की खबर

इसी बीच खबर यह भी आ रही है कि शरजील इमाम अपने गृह ज़िले बिहार के जहानाबाद से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इस सूचना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों में यह चर्चा तेज़ है कि यदि इमाम चुनावी मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव जातीय और साम्प्रदायिक समीकरणों को सीधे प्रभावित करेगा।

हाईकोर्ट ने क्यों ठुकराई बेल?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को शरजील इमाम सहित नौ आरोपियों—उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अतर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा—की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी थीं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया इमाम और उमर खालिद की भूमिका बेहद गंभीर प्रतीत होती है। अदालत के अनुसार, उन्होंने ऐसे भाषण दिए जो सांप्रदायिक आधार पर भीड़ को भड़काने वाले थे और जिनसे व्यापक स्तर पर मुसलमानों की लामबंदी हुई।

पुलिस का दावा: “सोची-समझी साज़िश”

दिल्ली पुलिस ने अदालत में तर्क दिया था कि फरवरी 2020 के दंगे कोई आकस्मिक घटना नहीं थे, बल्कि एक “सोची-समझी और सुनियोजित साज़िश” का हिस्सा थे। पुलिस ने कहा कि इसका उद्देश्य सांप्रदायिक हिंसा फैलाना और सरकार को अस्थिर करना था। पुलिस ने इमाम को मुख्य साज़िशकर्ता करार देते हुए उन पर यूएपीए जैसी कड़ी धाराएँ लगाई थीं।

दंगों की पृष्ठभूमि

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीएए और एनआरसी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में 53 लोग मारे गए थे, जबकि 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए। इस दंगे ने न सिर्फ़ राजधानी बल्कि पूरे देश की राजनीति को झकझोर दिया था।

अब सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद

शरजील इमाम अब सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका तर्क है कि तीन साल से अधिक जेल में रहने के बावजूद मुक़दमा न आगे बढ़ रहा है और न ही उन्हें बेल दी जा रही है। उनका कहना है कि बेल उनका संवैधानिक अधिकार है और बिना दोष सिद्ध हुए उन्हें अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।

अब देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस बहुचर्चित मामले में क्या रुख अपनाता है।