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हैदराबाद की बेटी अस्मा मरियम का कमाल, शिकागो-हार्वर्ड-व्हार्टन कॉन्फ्रेंस में पेश करेंगी शोध पत्र

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, हैदराबाद

हैदराबाद की 23 वर्षीय अस्मा मरियम ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने शहर ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। उनकी इस सफलता पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बधाई दी और लिखा –
“हैदराबाद की अस्मा मरियम को बहुत-बहुत बधाई। उन्हें शिकागो-हार्वर्ड-व्हार्टन इन्सॉल्वेंसी एंड रीस्ट्रक्चरिंग कॉन्फ्रेंस में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए चुना गया है। मात्र 23 वर्ष की आयु में अस्मा की उपलब्धियाँ उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और प्रभावशाली कानूनी शोध के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं।”

अस्मा मरियम वर्तमान में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) से एलएलएम कर रही हैं। इससे पहले वह सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, हैदराबाद से स्नातक रही हैं, जहाँ उन्होंने अकादमिक और शोध गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान दिया।

अस्मा साइबर लॉ अध्ययन विशेषज्ञता केंद्र (CSCLS) के सलाहकार बोर्ड की सदस्य और अध्यक्ष रह चुकी हैं। 2022-23 में वह सिम्बायोसिस लॉ स्कूल की शैक्षणिक एवं शोध समिति की वरिष्ठ सदस्य भी रही हैं।

उनकी शोध-यात्रा में कई उल्लेखनीय पड़ाव रहे हैं। उन्होंने सिम्बायोसिस में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी में “भारत में महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराध” विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। इसके अलावा, 2022 में आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकारों में उभरते रुझानों पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने “सॉफ्टवेयर के लिए आईपी संरक्षण – भारतीय प्रावधानों और व्यवहार के बीच संघर्ष” विषय पर शोधपत्र पढ़ा और सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतकर्ता का पुरस्कार भी जीता।

अस्मा का मानना है कि आने वाले वर्षों में तकनीकी और कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती होगी। उनका कहना है –
“तेज़ी से बढ़ती तकनीकी प्रगति, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और बायोटेक्नोलॉजी नवाचारों ने पारंपरिक लेखन, आविष्कार और डेटा सुरक्षा की अवधारणाओं को गहराई से प्रभावित किया है। मौजूदा कानूनी ढाँचा मुख्यतः मानव रचनाकारों पर आधारित है, जबकि एआई की बढ़ती भूमिका इन सिद्धांतों की पुनः समीक्षा की मांग करती है। इन चुनौतियों का समाधान केवल सक्रिय विधायी विकास, विशिष्ट कानूनी तंत्र और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही संभव है।”

हैदराबाद की इस युवा प्रतिभा ने अपनी मेहनत और दृष्टिकोण से यह साबित किया है कि सही दिशा और समर्पण के साथ भारतीय छात्र अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। अस्मा मरियम की यह उपलब्धि न केवल हैदराबाद बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है।