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पंजाब बाढ़ त्रासदी: धर्म की दीवारें टूटीं, मानवता ने बढ़ाया हाथ, मुसलमानों की निस्वार्थ सेवा ने जीता दिल

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने न केवल हजारों गांवों को जलमग्न कर दिया, बल्कि समाज के सामने एक नई तस्वीर भी पेश की है – एक ऐसी तस्वीर, जिसमें मजहब की बेड़ियां टूट गईं और इंसानियत की मिसाल कायम हुई। जिस वक्त सत्ता के गलियारे और कुछ स्वयंभू समाज सेवा के संगठन चुप्पी साधे हुए थे, मुस्लिम समुदाय ने दिल खोलकर पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद का बीड़ा उठाया। मस्जिदों से लेकर गांव-गांव तक, राहत सामग्री इकट्ठा करने और पहुंचाने का जो सिलसिला शुरू हुआ है, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।

मस्जिदों से गूंजी इंसानियत की अपील

पंजाब, अंबाला और मेवात की मस्जिदों में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए किए जा रहे ऐलान के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में लाखों रुपये, क्विंटल अनाज और अन्य आवश्यक सामान इकट्ठा करते और वाहनों में भरकर पंजाब भेजते हुए दिखाया गया है। मुस्लिम समुदाय ने इस आपदा को सामूहिक जिम्मेदारी मानकर काम किया है। सबसे खास बात यह है कि मदद के लिए सिर्फ नगद की नहीं, बल्कि सीधे सामग्री की अपील की गई है ताकि जरूरतमंदों तक सीधे मदद पहुंच सके। भोपाल के मशहूर नेता आरिफ मसूद ने भी अपने ट्वीट में यही अपील की है।

शाही इमाम पंजाब की मिसाल

पंजाब के शाही इमाम ने इस मानवीय अभियान में खुद मोर्चा संभाला है। वे पानी में उतरकर लोगों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने लोगों से अपील की है कि इतनी मदद करें कि बाढ़ पीड़ितों का जीवन अगले दो-तीन महीनों तक पटरी पर आ जाए। उनका कहना है कि पानी उतरने के बाद खेतों को दोबारा उपजाऊ बनाने और जीवन को सामान्य करने में बहुत मेहनत लगेगी। उनकी यह पहल लोगों को प्रेरित कर रही है और समुदाय को एकजुट कर रही है।

मेवात की महिलाओं और बच्चों का योगदान

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो बताते हैं कि पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए मेवात, अंबाला और पंजाब के मुसलमान सबसे आगे हैं। मेवाती महिलाओं ने अपने जेवर तक दान कर दिए हैं, और छोटी-छोटी बच्चियां अपनी पॉकेट मनी से पैसे भेज रही हैं। इन निस्वार्थ कामों की तस्वीरें समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रही हैं। अश्विनी सोनी और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये कहानियां बच्चों को बताई जानी चाहिए, क्योंकि यह इंसानियत का सबसे बड़ा सबक है।

राजनीतिक दलों और संघ की चुप्पी

जहां एक तरफ मुस्लिम समुदाय ने बढ़-चढ़कर मदद की है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख राजनीतिक दलों और एक बड़े स्वयंसेवक संगठन की कथित चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि जो संगठन हर आपदा में सबसे आगे रहने का दावा करता है, वह प्रयागराज के महाकुंभ की भगदड़ की तरह पंजाब में भी नदारद है। एक वीडियो में गृह मंत्री के पंजाब पहुंचने पर कुछ बाढ़ पीड़ितों को पकड़कर उनके पास लाने की बात कही गई, जिससे लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी भी दिखी।

कुछ वीडियो में आलोचनाओं से बचने के लिए संगठन के कार्यकर्ताओं को रसद बांटते दिखाया गया, लेकिन वह भी सिखों के बीच बांटते नहीं दिखे। इन घटनाओं ने यह धारणा मजबूत की है कि लोग अब केवल दिखावे पर विश्वास नहीं करते, बल्कि वास्तविक मदद पर भरोसा करते हैं।

सोशल मीडिया पर गूंजती प्रशंसा

इस निस्वार्थ सेवा के लिए मुस्लिम समुदाय की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोग कह रहे हैं कि जब भी देश को जरूरत पड़ी है, मुसलमान अगली कतार में खड़े मिले हैं। रितेश देशमुख (पैरोडी) ने ट्वीट किया, “तुम कितना भी अब्दुल को पाकिस्तानी, आतंकवादी, देशद्रोही कह लो, लेकिन मुसीबत में काम अब्दुल ही आएगा। बाकी भाजपाई और RSS वाले आपदा में भी अवसर खोजेंगे।” इसी तरह, एर. रफीक खान ने लिखा, “ये वही अब्दुल है जिसे अंधभक्त और हिजड़े गोदी मीडिया आतंकवादी कहती है, लेकिन ये सत्य है जब-जब देश को जरूरत पड़ी है तब-तब देश का मुसलमान मदद के लिये अगली सफ मे खड़ा मिला है!”

पंजाब में आई बाढ़ ने धर्म के आधार पर बंटे समाज को एक बार फिर से जोड़ने का काम किया है। मुस्लिम समुदाय की निस्वार्थ सेवा ने यह साबित कर दिया है कि मानवता का कोई धर्म नहीं होता, और सच्ची सेवा वही है जो बिना किसी दिखावे या राजनीतिक लाभ के की जाती है। यह घटना भविष्य में भी एक मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी।