इज़राइली नौसेना ने सहायता फ्लीटिला को रोका; ग्रेटा थनबर्ग सहित कई कार्यकर्ता गिरफ्तार
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, लंदन
स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग सहित सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं की भागीदारी वाली ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला को इज़रायली नौसेना ने मध्य-समुद्र क्षेत्र में ही रोका है। इज़राइल की पर विदेश मंत्रालय और अधिकारियों ने बताया है कि कई जहाजों को अवरुद्ध कर अशदोद बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया है, जबकि ग्रेटा समेत तमाम लोगों को सुरक्षित बताया गया है।
ग्रेटा के एक रिकॉर्डेड बयान में कहा गया है कि अगर आप यह वीडियो देख रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि उन्हें इज़रायली सेना ने बिना उनकी सहमति के अगवा कर लिया है। उनके अनुसार उनका मिशन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत मानवीय और शांतिपूर्ण था और स्वीडिश सरकार तुरंत उनकी और अन्य कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करती है।
इज़राइल का कहना है कि दिलाया गया दावा कि सभी नौकाओं पर सवार लोग “सुरक्षित और स्वस्थ” हैं और उन्हें यूरोप भेजने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। उन्होंने इस अभियान को एक उत्तेजक कार्रवाई करार दिया है, जिसमें नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास किया गया।
फ्लीटिला के आयोजकों का दावा है कि इज़राइली बलों ने नौकाओं की संचार प्रणालियों और लाइव ट्रैकिंग को बाधित किया और कई जहाजों को जब्त किया गया। उन्होंने बताया कि लगभग 13 जहाज पहले ही रोके गए, और बाकी अभी भी गुजरने की कोशिश कर रहे हैं।
एक जहाज़, माइकेनो, जो पहले से फ्लीटिला में शामिल था, को गाज़ा के जलक्षेत्र में प्रवेश करने की सूचना मिली है। हालांकि, इज़रायल ने कहा कि यह संभवतः ट्रैकर त्रुटि या गलतिपूर्ण स्थानांकन का परिणाम हो सकता है, और दावा किया है कि वह वास्तव में गाज़ा के पास नहीं आया था।
फ्लीटिला में लगभग 45 जहाज और करीब 500 प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें संसद के सदस्य, अधिवक्ता और अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।
मीडिया में जारी वीडियो में ग्रेटा को एक सैनिकों से घिरे हुए दिखाया गया है, साथ ही यह दृश्य भी सामने आया कि जल प्रहार (water cannons) का उपयोग कुछ जहाजों पर किया गया।
इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है—एक ओर यह दावे हैं कि इज़राइल ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में हस्तक्षेप किया, वहीं दूसरी ओर इज़राइल इस कार्रवाई को अपनी प्रजातांत्रिक रक्षा और नाकाबंदी की रक्षा बताता है।
इस घटना का राजनीतिक और कानूनी मतलब व्यापक है। यदि वास्तव में ग्रेटा थनबर्ग को बिना इजाज़त के रोका गया हो, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और समुद्री कानूनों के दायरे में विवादित हो सकता है। जबकि इज़राइल कहता है उसने कानून और सुरक्षा मानकों के अनुसार कार्रवाई की है।
समाप्त करते हुए, यह कथा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन एक तथ्य लगभग पक्का है — ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला की मंशा और उसके परिणाम दोनों ही विश्व स्तर पर ध्यान आकर्षित कर चुके हैं।

