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बिहार चुनाव 2025: मुस्लिम वर्ग की रणनीति और जमात-ए-इस्लामी हिंद का महत्वपूर्ण संदेश

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,नई दिल्ली

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रण अब निर्णायक मोड़ पर है। मंगलवार को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से ही यह स्पष्ट होने लगेगा कि हमेशा कट्टरवादी शक्तियों को सबक सिखाने वाले इस महत्वपूर्ण सूबे की राजनीतिक दिशा क्या होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में मुस्लिम वर्ग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य यह संकेत दे रहा है कि बिहार का मुस्लिम समाज इस बार एनडीए को सत्ता में आने से रोकने के पक्ष में पूरी तरह एकजुट है। पिछले बारह वर्षों के अनुभव और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा मुसलमानों की लगातार अनदेखी को देखते हुए, मुस्लिम मतदाता इस बार किसी भी प्रकार की गलती दोहराने के मूड में नहीं हैं। वे एकमुश्त होकर धर्मनिरपेक्ष दलों के उम्मीदवारों को अपना वोट देने की रणनीति पर काम करते दिख रहे हैं।

पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटों के अलग-अलग दलों में बंट जाने के कारण ही एनडीए को बिहार में सत्ता में लौटने का अवसर मिला था। इस बार, यह वर्ग उस गलती को दोहराना नहीं चाहता।

जमात-ए-इस्लामी हिंद का स्पष्ट संकेत

मुस्लिम वोटों के इस संभावित बिखराव को रोकने की दिशा में जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) ने भी एक महत्वपूर्ण पहल की है। जमात नहीं चाहती कि मतदान के दौरान मुसलमानों के वोटों में बिखराव आए, जिससे धर्मनिरपेक्ष वोटों का विभाजन हो।

इसी संदर्भ में, जमात-ए-इस्लामी हिंद मुख्यालय में एक मासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष, प्रोफेसर सलीम इंजीनियर, ने बिहार विधानसभा चुनाव और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की।

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने बिहार के लोगों से आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी बुद्धिमता और जिम्मेदारी साबित करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मतदान न केवल एक अधिकार है, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। यह लोकतंत्र को मजबूत करने और एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना का एक साधन है।

उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों का चयन करते समय भावनात्मक, विभाजनकारी या सांप्रदायिक अपीलों के आधार पर नहीं, बल्कि निम्नलिखित महत्वपूर्ण मानकों पर विचार करें:

  • उनकी दृष्टि और प्रदर्शन
  • ईमानदारी और विश्वसनीयता
  • सार्वजनिक मुद्दों जैसे गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय पर उनका रुख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) के सचिव, नदीम खान, ने CAA विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की लगातार कैद पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की, जो देश में नागरिक स्वतंत्रता के हनन की ओर इशारा करता है।

कुल मिलाकर, बिहार का मुस्लिम मतदाता इस बार एक स्पष्ट और एकजुट एजेंडे के साथ मतदान करने को तैयार है, जिसका मुख्य लक्ष्य धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करना और वोटों के बिखराव को रोकना है। दूसरे चरण का मतदान बिहार की भावी राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।