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5,000 साल की समुद्री विरासत जीवंत हुई: मस्कट पहुँचा INSV कौंडिन्य

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,मस्कट (ओमान)

ओमान में भारतीय प्रवासी समुदाय ने भारतीय दूतावास के संरक्षण में मस्कट में एक भव्य और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन कर INSV कौंडिन्य – भारत के सिले हुए प्राचीन जहाज़ की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा की सफलता का उत्सव मनाया। यह जहाज़ 29 दिसंबर 2025 को गुजरात के पोरबंदर से रवाना हुआ था और 14 जनवरी 2026 को मस्कट पहुँचा, जहाँ इसका ज़ोरदार स्वागत किया गया।

इस अवसर पर जहाज़ के चालक दल के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारतीय दूतावास, मस्कट में उप मिशन प्रमुख तविशी बेहल पांडे ने एएनआई से बातचीत में इस क्षण को भारतीय समुदाय के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक बताया।
उन्होंने कहा,
“कल जब मैंने INSV कौंडिन्य को पहली बार सजीव रूप में देखा, तो सचमुच रोंगटे खड़े हो गए। यह जहाज़ केवल एक संरचना नहीं है, बल्कि यह भारत के 5,000 वर्षों के समुद्री इतिहास का प्रतीक है।”

उन्होंने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि कार्यक्रम में भारतीय समुदाय की भारी उपस्थिति यह दर्शाती है कि यह उत्साह केवल औपचारिक या राजनयिक दायरे तक सीमित नहीं था, बल्कि आम लोगों के दिलों से जुड़ा हुआ था।

तविशी पांडे ने बताया कि जहाज़ के चालक दल से हुई बातचीत के माध्यम से समुदाय के सदस्यों को इस लंबी और चुनौतीपूर्ण समुद्री यात्रा के अनुभवों को समझने का अवसर मिला—कैसे कठिन परिस्थितियों का सामना किया गया और किस प्रकार टीमवर्क और संकल्प से उन्हें पार किया गया।
उन्होंने विशेष रूप से कार्यक्रम में उपस्थित भारतीय स्कूलों के विद्यार्थियों की भागीदारी को अत्यंत प्रेरक बताया।
“मेरे लिए सबसे भावुक क्षण वह था, जब मैंने बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों को देखा, जो इन वास्तविक जीवन के नायकों से मिल रहे थे, उनके हस्ताक्षर ले रहे थे और उन्हें अपने आदर्श के रूप में देख रहे थे। यह दृश्य वास्तव में दिल को छू लेने वाला था,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दूतावास भविष्य में छात्रों और चालक दल के बीच अधिक संरचित और नियमित संवाद आयोजित करने की योजना बना रहा है, ताकि युवा पीढ़ी को भारत की समुद्री विरासत से निरंतर प्रेरणा मिलती रहे।

इस परियोजना के कूटनीतिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए पांडे ने कहा कि यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करने की दूरदृष्टि से गहराई से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा,
“यह प्रधानमंत्री जी के लिए एक विशेष परियोजना रही है। दिसंबर में जब वे मस्कट आए थे, तब उन्होंने ‘मैत्री’ शब्द का उल्लेख किया था, जिसमें ‘M’ का अर्थ था Maritime Heritage यानी समुद्री विरासत।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत और ओमान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि वे भूगोल, विश्वास और सदियों पुराने जन-जन के संपर्कों पर आधारित हैं। INSV कौंडिन्य का मस्कट पहुँचना इन ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक मज़बूत करता है। यह आगमन भारत-ओमान के बीच 70 वर्षों के राजनयिक संबंधों के उत्सव के समापन के साथ भी जुड़ा हुआ है, जिसने इसे और भी विशेष बना दिया।

भारतीय दूतावास द्वारा समुद्री विरासत को जन-जन तक पहुँचाने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए पांडे ने बताया कि विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर छात्रों के लिए कविताएँ, कहानियाँ और निबंध लेखन जैसी प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनका विषय INSV कौंडिन्य था। इसका उद्देश्य छात्रों में जिज्ञासा, शोध और इतिहास के प्रति रुचि विकसित करना था।
उन्होंने यह भी कहा कि बंदरगाह संबंधी नियमों के अधीन रहते हुए, छात्रों और समुदाय के सदस्यों के लिए जहाज़ के निर्देशित भ्रमण की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

स्वागत समारोह को सांस्कृतिक रंगों से भरने के लिए गुजरात से आए 10 सदस्यीय लोकनृत्य दल ने मनमोहक प्रस्तुति दी। प्रसिद्ध लोक कलाकार श्री राजेंद्रकुमार डी. रावल के नेतृत्व में इस दल ने केरबानो वेश (भावाई), हूडो (भरवाड़ जनजातीय नृत्य), मिश्र रास, तलवार रास और गरबा जैसे पारंपरिक गुजराती नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। इन जीवंत नृत्यों ने दर्शकों को गुजरात की समृद्ध लोकसंस्कृति की एक रंगीन झलक दिखाई।

INSV कौंडिन्य एक सावधानीपूर्वक पुनर्निर्मित प्राचीन सिला हुआ जहाज़ है, जो भारत की आरंभिक समुद्री परंपराओं से प्रेरित है। इस ऐतिहासिक अंतरमहासागरीय यात्रा को भारतीय नौसेना के 18 सदस्यों के दल ने सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अभियान में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजय सान्याल भी शामिल थे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक यात्रा को और अधिक महत्व प्रदान किया।

यह यात्रा न केवल भारत की लगभग 5,000 वर्ष पुरानी नौवहन परंपरा को श्रद्धांजलि है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्राचीन काल में भारत किस प्रकार हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापार, संस्कृति और सभ्यताओं के आदान-प्रदान का एक प्रमुख केंद्र रहा है। INSV कौंडिन्य का यह सफर अतीत और वर्तमान के बीच एक सशक्त सेतु बनकर उभरा है, जिसने दुनिया को भारत की समुद्री आत्मा से एक बार फिर परिचित कराया है।