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यूएई के राष्ट्रपति 19 जनवरी को भारत दौरे पर, पीएम मोदी के निमंत्रण पर आएंगे

भारत-संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक और अहम कूटनीतिक कदम उठाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 19 जनवरी को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत होते रिश्तों को और अधिक गहराई देने का अवसर प्रदान करेगी।

यूएई के राष्ट्रपति के रूप में यह शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा होगी। इसके अलावा, बीते एक दशक में यह उनका भारत का पाँचवाँ दौरा है, जो भारत-यूएई संबंधों में निरंतरता, आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच चुका है।

यह दौरा हाल के वर्षों में हुए उच्चस्तरीय आदान-प्रदान की मजबूत कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। सितंबर 2024 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और अप्रैल 2025 में यूएई के उप प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री तथा दुबई के क्राउन प्रिंस हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति दी थी। अब राष्ट्रपति की यह यात्रा उस सकारात्मक गति को और आगे बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

भारत और यूएई के बीच संबंध पारंपरिक मित्रता से आगे बढ़कर अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं। दोनों देशों के रिश्ते राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई आयामों में फैले हुए हैं। भारत और यूएई एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक और निवेश साझेदारों में शामिल हैं।

इन रिश्तों को मजबूती देने में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की अहम भूमिका रही है, जिसने व्यापार को नई दिशा दी है। इसके साथ ही लोकल करेंसी सेटलमेंट (LCS) प्रणाली और द्विपक्षीय निवेश संधि ने आर्थिक सहयोग को और सहज व मजबूत बनाया है। ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग है, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौते शामिल हैं। यूएई भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।

आगामी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच व्यापक बातचीत होने की संभावना है। दोनों नेता भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करेंगे और भविष्य की दिशा तय करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा, जिन पर भारत और यूएई के विचारों में काफी हद तक समानता देखने को मिलती है।

भारत और यूएई ने वर्ष 1972 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। उसी वर्ष यूएई ने भारत में अपना दूतावास खोला, जबकि भारत ने 1973 में अबू धाबी में अपना दूतावास स्थापित किया। पिछले पांच दशकों में यह रिश्ता निरंतर मजबूत हुआ है और आज यह विश्वास, सहयोग और साझा हितों पर आधारित एक परिपक्व साझेदारी बन चुका है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग देखने को मिलता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत और यूएई एक-दूसरे के साथ समन्वय करते रहे हैं। इसके अलावा दोनों देश ब्रिक्स, I2U2 (भारत-इज़राइल-यूएई-अमेरिका) और यूएफआई (यूएई-फ्रांस-भारत) त्रिपक्षीय जैसे कई बहुपक्षीय मंचों का हिस्सा हैं। भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान यूएई को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया जाना भी दोनों देशों के बढ़ते वैश्विक सहयोग का प्रमाण है।

कुल मिलाकर, यूएई राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती देगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और वैश्विक सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दोनों देशों के नेतृत्व के बीच होने वाली यह मुलाकात भविष्य के सहयोग की नई राहें खोलने की उम्मीद जगाती है।