गुल प्लाज़ा अग्निकांड ने कराची की बदहाल फायर सेफ्टी व्यवस्था किया बेनकाब, 25 मिलियन की आबादी पर 28 फायर स्टेशन
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो | कराची
पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में हुए गुल प्लाज़ा अग्निकांड ने न केवल 28 लोगों की जान ले ली, बल्कि शहर की फायर सेफ्टी और आपातकालीन ढांचे की भयावह कमी को भी पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। यह हादसा ऐसे शहर में हुआ है, जिसकी अनुमानित आबादी करीब ढाई करोड़ (25 मिलियन) है, लेकिन वहां आग से निपटने के लिए मौजूद संसाधन अंतरराष्ट्रीय मानकों से बेहद नीचे हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कराची के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद यह स्वीकार किया है कि महानगर अंतरराष्ट्रीय अग्नि-सुरक्षा मानकों से बहुत पीछे चल रहा है। इस स्वीकारोक्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कराची जैसे घनी आबादी वाले शहर बड़े हादसों से निपटने के लिए तैयार हैं?
अंतरराष्ट्रीय मानकों से कोसों दूर कराची
कराची के फायर चीफ ऑफिसर मुहम्मद हुमायूं खान ने खुलासा किया कि मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत हर 1 लाख आबादी पर कम से कम एक फायर स्टेशन होना चाहिए। इस आधार पर कराची में लगभग 2,500 फायर स्टेशनों की आवश्यकता है।
लेकिन हकीकत यह है कि पूरे कराची में इस वक्त सिर्फ 28 फायर स्टेशन, 45 फायर टेंडर और महज 6 स्नॉर्कल (ऊंची इमारतों में आग बुझाने वाली मशीनें) मौजूद हैं। खुद फायर चीफ ने इन संसाधनों को “बेहद अपर्याप्त” बताया है।
दूसरे शहरों से तुलना ने बढ़ाई चिंता
ARY न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, जब कराची की तुलना दूसरे बड़े शहरों से की गई तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आई।
- ढाका में 112 फायर स्टेशन हैं
- नई दिल्ली में 61
- जबकि तेहरान, जिसकी आबादी कराची से कम है, वहां 452 फायर स्टेशन कार्यरत हैं
इस तुलना ने कराची की आपातकालीन तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुल प्लाज़ा: 36 घंटे की आग, 28 मौतें, 81 लापता
यह बहस उस वक्त और तेज हो गई जब एम.ए. जिन्ना रोड स्थित गुल प्लाज़ा शॉपिंग मॉल में 17 जनवरी 2026 की देर रात भीषण आग लग गई। आग पर काबू पाने में फायर ब्रिगेड को करीब 36 घंटे लग गए।
इस भयावह हादसे में कम से कम 28 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक फायर फाइटर भी शामिल है। इसके अलावा 81 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आग के दौरान इमारत के दो हिस्से ढह गए, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए। बताया जा रहा है कि गुल प्लाज़ा में लगभग 1,200 दुकानें थीं।
ढहती इमारत और बढ़ता खतरा
आग के बाद अब प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता इमारत की संरचनात्मक स्थिरता को लेकर है। अधिकारी फिलहाल क्षतिग्रस्त ढांचे पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि इमारत को पूरी तरह गिराया जाएगा या फिर पुनर्निर्माण किया जाएगा।
सिंध बिल्डिंग कंट्रोल अथॉरिटी (SBCA) के अधिकारियों ने बताया कि इमारत के बेसमेंट में इस समय अत्यधिक गर्म पानी भरा हुआ है, जिससे अंदरूनी स्तंभों (कॉलम) की तुरंत जांच संभव नहीं है।
SBCA ने साफ किया कि जब तक तकनीकी समिति, फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों की विस्तृत रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इमारत को असुरक्षित घोषित करने या पुनर्निर्माण का कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
पास की इमारत को भी नुकसान
इस हादसे में एक और खतरनाक मोड़ तब आया जब गुल प्लाज़ा की बाहरी दीवार गिर गई, जिससे इमारत पास के रांपा प्लाज़ा की ओर झुक गई। इस कारण रांपा प्लाज़ा के दो आंतरिक कॉलम भी क्षतिग्रस्त हो गए।
SBCA के निदेशक रेहान ने बताया कि दोनों इमारतों के बीच जैक (हाइड्रोलिक सपोर्ट) लगाए जाएंगे ताकि ढांचे को स्थिर किया जा सके। स्थिरीकरण का काम पूरा होने के बाद ही कराची म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) की टीमों को अंदर प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, जिससे सर्च ऑपरेशन दोबारा शुरू हो सके।
अभी भी असुरक्षित हालात
अधिकारियों का कहना है कि इमारत के भीतर तापमान अब भी बेहद अधिक है, जिससे तुरंत अंदर जाना खतरनाक बना हुआ है। हालात को काबू में लाने के लिए लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि तापमान कम हो सके।
तकनीकी मूल्यांकन और परिचालन मंजूरी के आधार पर, गुल प्लाज़ा के क्षतिग्रस्त हिस्सों को अगले दो से तीन दिनों में गिराया भी जा सकता है।
एक हादसा, कई सवाल
गुल प्लाज़ा अग्निकांड ने कराची में फायर सेफ्टी, बिल्डिंग रेगुलेशन, आपातकालीन संसाधनों और प्रशासनिक लापरवाही पर गहरी चोट की है। सवाल यह नहीं है कि यह हादसा कैसे हुआ, बल्कि यह है कि क्या भविष्य में ऐसे हादसों से निपटने के लिए कराची तैयार है?
जब एक ढाई करोड़ की आबादी वाला शहर सिर्फ 28 फायर स्टेशनों के भरोसे चल रहा हो, तो यह त्रासदी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—जिसे अगर अब भी नजरअंदाज किया गया, तो अगला हादसा और भी भयावह हो सकता है।

