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OIC मीडिया ऑब्ज़र्वेटरी की रिपोर्ट : एक सप्ताह में 112 फ़िलिस्तीनी मारे गए और घायल, ग़ाज़ा से वेस्ट बैंक तक बढ़ी इज़रायली हिंसा

इज़रायली कब्ज़ा बलों की ओर से फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में जारी हिंसा ने एक बार फिर मानवता को झकझोर दिया है। 20 से 26 जनवरी 2026 के बीच महज़ एक सप्ताह में कम से कम 112 फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हुए, जबकि ग़ाज़ा पट्टी और वेस्ट बैंक में इज़रायली सैन्य कार्रवाइयाँ और सेटलर हिंसा लगातार तेज़ होती गईं। यह जानकारी इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ इज़रायली अपराधों पर मीडिया ऑब्ज़र्वेटरी की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है।

संघर्षविराम की खुली अवहेलना, ग़ाज़ा पर लगातार गोलाबारी

रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायली बलों ने संघर्षविराम समझौते की परवाह किए बिना ग़ाज़ा पट्टी के कई इलाक़ों में अंधाधुंध गोलाबारी जारी रखी। इस दौरान दीर अल-बलाह के पूर्वी इलाक़े, अल-बुरेज शरणार्थी शिविर, अल-तुफ़्फ़ाह इलाक़ा, अल-मवासी, ख़ान यूनिस, बैत लाहिया और ग़ाज़ा सिटी को निशाना बनाया गया। इन हमलों में चार मासूम बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है।

इसके अलावा, मिस्र मीडिया सेंटर के साथ काम कर रहे तीन पत्रकारों की भी मौत हुई, जिससे ग़ाज़ा पर युद्ध शुरू होने के बाद अब तक इज़रायली हमलों में मारे गए पत्रकारों की कुल संख्या 260 तक पहुँच गई है। पत्रकार संगठनों ने इसे प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला बताया है।

इज़रायली बलों ने ग़ाज़ा के पूर्वी इलाक़ों में इमारतों को ध्वस्त करने की कार्रवाइयाँ भी जारी रखीं। हालात इतने बदतर हैं कि कड़ाके की ठंड और बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते दो नवजात शिशुओं की मौत भी दर्ज की गई।

OIC के आंकड़े: हत्याएं, घायल और तबाही

OIC मीडिया ऑब्ज़र्वेटरी के मुताबिक, इस एक सप्ताह में कुल 111 फ़िलिस्तीनी मारे गए और 85 घायल हुए। इनमें से

  • ग़ाज़ा पट्टी में इज़रायली बलों की सीधी गोलीबारी से 21 लोगों की मौत और 58 घायल,
  • 88 फ़िलिस्तीनियों की मौत की पुष्टि और एक शव की बरामदगी,
  • वेस्ट बैंक में एक फ़िलिस्तीनी की हत्या और 32 लोगों के घायल होने की घटनाएँ दर्ज की गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच फ़िलिस्तीनी शहीदों की कुल संख्या 72,744 तक पहुँच चुकी है, जबकि 1,80,821 लोग घायल हुए हैं। यह आंकड़े संघर्ष की भयावहता और लंबे समय से जारी मानवीय संकट की गवाही देते हैं।

वेस्ट बैंक में 330 छापे, 237 गिरफ्तारियाँ

वेस्ट बैंक में इज़रायली कब्ज़ा बलों की कार्रवाइयाँ और भी व्यापक रहीं। महज़ एक सप्ताह में 330 बार सैन्य छापे मारे गए। इस दौरान कब्ज़ा बलों ने कब्ज़े वाले यरुशलम के शेख़ जर्राह इलाक़े में UNRWA (संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी) की इमारतों को ध्वस्त कर दिया।

इसके अलावा,

  • 13 फ़िलिस्तीनी घरों और 9 पशु बाड़ों को गिराया गया,
  • दो घरों पर कब्ज़ा कर उन्हें सैन्य चौकियों में बदल दिया गया,
  • 20,000 वर्ग मीटर कृषि भूमि को बुलडोज़र से समतल किया गया,
  • 30 जैतून के पेड़ उखाड़े गए,
  • हेब्रोन के जबल जौहर इलाक़े में कई दिनों तक कर्फ़्यू लगाया गया,
  • 237 फ़िलिस्तीनियों को गिरफ़्तार किया गया, जिनमें 11 बच्चे भी शामिल हैं,
  • और दो बच्चों को घायल किया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इज़रायली सेटलर्स ने 10 वर्षीय एक बच्चे पर हमला किया। इसके अलावा, कब्ज़ा बलों ने तुर्मुस अय्या के एक माध्यमिक विद्यालय में घुसकर उसके प्रधानाचार्य को हिरासत में ले लिया।

मस्जिदों पर हमले और धार्मिक उकसावे

धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यहूदी चरमपंथियों ने अल-अक्सा मस्जिद के प्रांगण में घुसकर तल्मूदिक प्रार्थनाओं वाले पर्चे बांटे। यह कार्रवाई कथित तौर पर इज़रायली चरमपंथी मंत्री इतामार बेन-गवीर के इशारे पर की गई।

वहीं, हेब्रोन की इब्राहीमी मस्जिद को बंद कर नमाज़ियों को बाहर निकाल दिया गया, जबकि सेटलर्स ने नाब्लुस की शेख़ मस्जिद पर भी हमला किया।

सेटलर हिंसा: बेदखली और तबाही

OIC रिपोर्ट के अनुसार, सात दिनों में 83 सेटलर हमले दर्ज किए गए। इनमें सेटलर्स ने

  • जेरिको के शल्लाह अल-अउजा बेदुईन समुदाय की 15 परिवारों को ज़बरन बेदखल कर दिया। इस तरह बेदखल परिवारों की कुल संख्या 94 तक पहुँच गई।
  • सेटलर्स ने 19 बार चराई के नाम पर फ़िलिस्तीनी ज़मीनों में घुसपैठ की,
  • तीन बुलडोज़र, दो ट्रक और सात वाहनों को जलाया,
  • कृषि भूमि और पशु बाड़ों को नुकसान पहुँचाया,
  • रामल्लाह के पास एक बेदुईन समुदाय की बिजली आपूर्ति पर हमला किया,
  • सोलर पैनल और निगरानी कैमरे तोड़े और ज़ब्त किए,
  • और पानी की लाइनों को नुकसान पहुँचाकर 19 से अधिक रिहायशी इलाक़ों की जल आपूर्ति काट दी

इसके अलावा, सेटलर्स ने उत्तरी जॉर्डन घाटी में एक वर्कशॉप से वाहन मरम्मत उपकरण चुरा लिए, पेड़ काटे, जैतून की शाखाएँ फेंकीं और जनीन के बिर अल-बाशा गाँव में स्थित इराकी शहीदों के क़ब्रिस्तान में मोटरसाइकिलों पर घुसकर उकसावे वाली गतिविधियाँ कीं।

अवैध बस्तियों का विस्तार और खुदाई

रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में सात सेटलमेंट गतिविधियाँ दर्ज की गईं। इनमें

  • सलफ़ीत के अल-ज़ाविया कस्बे की ज़मीन पर कब्ज़ा कर बनाई गई सेटलमेंट कब्रिस्तान में शव दफनाए गए,
  • यरुशलम के ख़ान अल-अहमर क्षेत्र में बेदुईन स्कूल के पास एक नया आउटपोस्ट बनाना शुरू किया गया,
  • नाब्लुस के आसपास ज़मीन को समतल कर नए सेटलमेंट आउटपोस्ट की तैयारी की गई,
  • हब्रोन के जबल जौहर इलाक़े में सेटलमेंट विस्तार की योजना बनाई गई।

इसके अलावा, कब्ज़ा प्रशासन ने अल-अक्सा मस्जिद के नीचे खुदाई जारी रखी, जिससे पास के एक मकान का कमरा ढह गया और तीन फ़िलिस्तीनी परिवारों को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। सिलवान इलाक़े में भी एक परिवार को ज़बरन बेदखल किया गया ताकि उनकी ज़मीन पर सेटलमेंट सड़क बनाई जा सके।

1,125 अपराध एक हफ्ते में

OIC मीडिया ऑब्ज़र्वेटरी के अनुसार, सिर्फ़ एक सप्ताह में 1,125 इज़रायली अपराध दर्ज किए गए—जो यह दर्शाता है कि फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में हिंसा, बेदखली और दमन किसी अपवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और निरंतर प्रक्रिया बन चुकी है।

निष्कर्ष

यह रिपोर्ट न केवल आँकड़ों का संग्रह है, बल्कि उन अनगिनत ज़िंदगियों की कहानी है जो गोलियों, बुलडोज़रों, बेदखली और भय के साये में जीने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और प्रभावी हस्तक्षेप की कमी के बीच फ़िलिस्तीनी जनता पर यह संकट और गहराता जा रहा है। OIC की यह रिपोर्ट एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और मानवता की आवाज़ आखिर कब सुनी जाएगी?