Culture

जब सूरजकुंड में गूंजे सूफियाना सुर, सलमान अली ने बना दी शाम यादगार

सूरजकुंड मेले की शामें यूं तो हर साल रंग, रौनक और रचनात्मकता से भरपूर होती हैं, लेकिन गुरुवार की रात कुछ खास थी। वजह थे—मेवात की मिट्टी से निकले, अपनी आवाज़ से लाखों दिलों पर राज करने वाले गायक सलमान अली। 39वें सूरजकुंड इंटरनेशनल आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल 2026 की मुख्य चौपाल पर जब सलमान अली मंच पर आए, तो यह शाम सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रही—यह सुरों, जज़्बात और सूफियाना एहसासों का एक अविस्मरणीय सफ़र बन गई।

पिछले कई वर्षों से सलमान अली का सूरजकुंड मेले से एक खास रिश्ता रहा है। मेवात के बेटे सलमान अली हर बार यहां आकर अपनी गायकी का जौहर दिखाते हैं और इस बार भी दर्शकों को निराश नहीं किया। कार्यक्रम शुरू होने से काफी पहले ही मुख्य चौपाल दर्शकों से खचाखच भर चुकी थी। दूर-दूर से आए हजारों संगीत प्रेमी समय से पहले अपनी जगह संभाल चुके थे। बैठने की जगह सीमित पड़ गई, लेकिन उत्साह कम नहीं हुआ। लोग खड़े होकर, प्रवेश द्वारों और एलईडी स्क्रीन के पास जमा होकर कार्यक्रम का इंतज़ार करते रहे। मोबाइल कैमरों की चमक, तालियों की गूंज और “सलमान… सलमान” के नारों ने पूरे परिसर को किसी बड़े म्यूजिक फेस्टिवल जैसा माहौल दे दिया।

जैसे ही सलमान अली ने मंच संभाला, तालियों और उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत सूफियाना अंदाज़ में की। “सांसों की माला पे सिमरूं मैं पिया का नाम…” के पहले ही बोल ने माहौल को भावनात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उनकी आवाज़ की गहराई, सुरों की मजबूती और भावों की सच्चाई ने श्रोताओं को पहले गीत से ही अपने साथ जोड़ लिया। यह साफ़ संकेत था कि आने वाली शाम संगीत के उच्चतम स्तर की होने वाली है।

मंच से संवाद करते हुए सलमान अली ने फरीदाबाद और सूरजकुंड मेले से अपने आत्मीय जुड़ाव का ज़िक्र किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “फरीदाबाद मेरा दूसरा घर है।” यह वाक्य सुनते ही चौपाल तालियों से गूंज उठी। दर्शकों और कलाकार के बीच यह भावनात्मक रिश्ता पूरे कार्यक्रम में साफ़ झलकता रहा। सलमान अली मंच पर सिर्फ गा नहीं रहे थे, बल्कि अपने श्रोताओं से दिल से बात कर रहे थे।

इसके बाद उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों की श्रृंखला से कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। “मेरे रश्क़े क़मर तूने पहली नज़र…” जैसे ही गूंजा, दर्शक झूम उठे। इसके बाद “ज़रा सी दिल में जगह तू…” ने माहौल में रोमांच और ऊर्जा भर दी। हर गीत के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। युवा हों या बुजुर्ग, महिलाएं हों या बच्चे—हर कोई सुरों के साथ खुद को बहने देता नज़र आया। मोबाइल फोन हवा में उठे थे, हर कोई इस यादगार शाम को अपने कैमरे में क़ैद करना चाहता था।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और यादगार पल तब आया, जब सलमान अली ने मशहूर सूफी कलाम “ओ लाल मेरी… बला झूलन लालन…” पेश किया। इस प्रस्तुति ने पूरे माहौल को रूहानियत के रंग में रंग दिया। तालियों की लय, दर्शकों की सामूहिक सहभागिता और सलमान अली की भावपूर्ण गायकी ने चौपाल को किसी सूफी दरबार में बदल दिया। कई लोग भाव-विभोर होकर साथ गुनगुनाते दिखे, तो कुछ की आंखों में नमी साफ़ झलक रही थी।

सलमान अली की गायकी की ताकत उनकी जड़ों से आती है। हरियाणा के मेवात क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले सलमान ऐसे सांस्कृतिक परिवेश में पले-बढ़े हैं, जहां लोक और सूफी संगीत की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके परिवार में गायन एक विरासत की तरह रहा है। यही वजह है कि उनकी आवाज़ में एक सहज मिठास, दर्द और आत्मिक कंपन सुनाई देता है। संगीत उनके लिए सिर्फ मंच पर गाने का ज़रिया नहीं, बल्कि उनकी पहचान और विरासत है।

उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे गीत को केवल सुरों में नहीं ढालते, बल्कि उसे जीते हैं। हर शब्द, हर आलाप और हर ऊंचे सुर में सच्ची भावना झलकती है। उनकी आवाज़ में जहां सूफियाना नज़ाकत है, वहीं मंचीय ऊर्जा और दमखम भी है। यही संतुलन उन्हें अलग पहचान देता है और हर तरह के श्रोताओं से जोड़ता है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्य चौपाल का दृश्य किसी जश्न से कम नहीं था। हजारों मोबाइल फ्लैशलाइट्स से जगमगाता मैदान किसी सितारों भरे आसमान जैसा प्रतीत हो रहा था। हर गीत के बाद देर तक तालियां गूंजती रहीं और दर्शक बार-बार “एक और गीत” की फरमाइश करते रहे। कलाकार और श्रोता के बीच यह जीवंत संवाद इस शाम की सबसे बड़ी खूबसूरती बन गया।

सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट फेस्टिवल अब केवल हस्तशिल्प और पारंपरिक कला का मंच नहीं रहा, बल्कि यह संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। सलमान अली की प्रस्तुति ने इस पहचान को और मज़बूती दी। मेवात की मिट्टी से निकली उनकी खानदानी गायकी और सूरजकुंड का अंतरराष्ट्रीय मंच—दोनों का यह संगम इस शाम को खास बना गया।

गौरतलब है कि इंडियन आइडल–10 के विजेता सलमान अली वर्ष 2026 में लगातार मंचीय प्रस्तुतियों में सक्रिय हैं। हाल ही में उन्होंने जयपुर, हैदराबाद और अन्य शहरों में लाइव शो किए हैं और आने वाले दिनों में मुंबई के सूफी म्यूजिक फेस्टिवल में भी परफॉर्म करने वाले हैं। उनकी लगातार बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि वे आज भी लाइव कॉन्सर्ट सर्किट के सबसे चहेते गायकों में शुमार हैं।

सूरजकुंड की यह संगीतमय शाम इस सच्चाई का जीवंत प्रमाण बन गई कि जब आवाज़ में हुनर, विरासत और रूह की सच्चाई मिल जाए, तो संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं रहता—वह दिलों को जोड़ने वाली ताकत बन जाता है। सलमान अली ने सूरजकुंड के दर्शकों को यादों का ऐसा सुरमयी तोहफ़ा दिया, जिसे वे लंबे समय तक अपने दिलों में संजोकर रखेंगे।