एपस्टीन प्रकरण : मौलाना उमरैन महफूज़ रहमानी बोले, शालीनता जरूरी है
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े वरिष्ठ आलिम मौलाना मुहम्मद उमरैन महफूज़ रहमानी ने हाल ही में चर्चित “एपस्टीन फाइल्स” के संदर्भ में एक बयान जारी करते हुए पश्चिमी समाज की नैतिकता पर सवाल उठाए हैं और मुस्लिम समाज, विशेषकर महिलाओं के पर्दा और शालीनता से जुड़े उसूलों को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका वक्तव्य सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश के माध्यम से सामने आया है, जिसे लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
अपने संबोधन में मौलाना रहमानी ने कहा कि लंबे समय से कुछ वर्गों द्वारा मुस्लिम समाज पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि वह महिलाओं को पर्दा करने, सादगी से रहने और अश्लीलता से दूर रहने के लिए दबाव में रखता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आलोचक अक्सर इस्लामी सामाजिक मूल्यों को पिछड़ेपन के रूप में पेश करते हैं, जबकि पश्चिमी जीवनशैली को “आज़ादी” और “तरक्की” का प्रतीक बताते हैं। मौलाना के अनुसार, हाल में सामने आई एपस्टीन से जुड़ी दस्तावेज़ी चर्चाओं ने कथित तौर पर उस तथाकथित सभ्य समाज के भीतर छिपे गंभीर नैतिक संकटों पर बहस को तेज किया है।
मौलाना उमरैन महफूज़ रहमानी ने अपने बयान में कहा कि जिन समाजों में खुली जीवनशैली और नैतिक स्वतंत्रता का सबसे अधिक दावा किया जाता है, वहीं महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के शोषण जैसे मामलों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि एपस्टीन प्रकरण से जुड़े आरोपों और अदालती रिकॉर्डों ने वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली लोगों के आचरण पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। (ध्यान रहे कि इन मामलों के कई पहलू अभी भी कानूनी और जांच के दायरे में रहे हैं और विभिन्न दावों पर अलग-अलग स्तर पर विवाद भी मौजूद हैं।)
उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज में शालीनता, हया और नैतिक अनुशासन को जो महत्व दिया गया है, उसका मकसद महिलाओं को दबाना नहीं बल्कि उन्हें सामाजिक बुराइयों और शोषण से सुरक्षित रखना है। उनके अनुसार, पर्दा और मर्यादा का सिद्धांत किसी सजा या बंदिश के रूप में नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच और नैतिक ढांचे के रूप में समझा जाना चाहिए।
मौलाना रहमानी ने अपने बयान में अफगानिस्तान और ईरान जैसे देशों के उदाहरणों का भी उल्लेख किया, जहां महिलाओं की शिक्षा, हिजाब और सामाजिक अधिकारों को लेकर चल रही बहसों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती रही हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक विमर्श में अक्सर मुस्लिम समाज के मुद्दों को एकतरफा ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, जबकि अन्य समाजों के अंदरूनी संकटों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने “एपस्टीन फाइल्स” को कथित तौर पर “सभ्य दुनिया का काला और भयावह चेहरा” बताते हुए कहा कि यह प्रकरण नैतिकता पर पुनर्विचार का अवसर है। उन्होंने अपने समर्थकों और आम लोगों से अपील की कि वे नैतिक मूल्यों, पारिवारिक व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को समझें और इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं।
वीडियो के अंत में मौलाना ने कहा कि किसी भी समाज की असली ताकत उसकी नैतिक बुनियाद, शिक्षा और सामाजिक अनुशासन में होती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं की इज्जत, सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना हर सभ्यता की पहली जिम्मेदारी है — और इसी कसौटी पर किसी भी सामाजिक मॉडल का मूल्यांकन होना चाहिए।
यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर बहस तेज हो गई है, जहां लोग नैतिकता, महिला अधिकार, धार्मिक मूल्यों और आधुनिक सामाजिक ढांचे के बीच संतुलन पर अपने-अपने विचार रख रहे हैं।

