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भारत सहित दुनिया भर में रमजान का आगाज़, मस्जिदों में पहली तरावीह की रौनक

भारत और पाकिस्तान में रमजान का चांद देखे जाने के साथ ही 19 फरवरी, गुरुवार से पवित्र माहे रमजान की शुरुआत हो गई। विश्व के अधिकांश मुसलमान रोज़े रख रहे हैं। चूंकि कई अरब देशों में एक दिन पहले चांद नजर आ गया था, इसलिए वहां बुधवार से पहला रोज़ा रखा गया, जबकि भारत सहित कई देशों में गुरुवार को पहला रोज़ा है। बरकत, इबादत और रहमत का यह महीना शुरू होते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ का सिलसिला आरंभ हो चुका है।

भारत में चांद दिखने की पुष्टि

लखनऊ स्थित मरकज़ी चांद कमेटी, फरंगी महल के अध्यक्ष और काज़ी-ए-शहर मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने चांद देखे जाने की पुष्टि की। विभिन्न राज्यों से प्राप्त सूचनाओं और शरई गवाही के आधार पर ऐलान किया गया कि 19 फरवरी को भारत में पहला रोज़ा रखा जाएगा।

दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहने के कारण चांद दिखने की संभावना कम थी, लेकिन बिहार और असम से सबसे पहले चांद नजर आने की खबरें सामने आईं। पटना की इमारत-ए-शरिया, फुलवारी शरीफ के काज़ी रज़वान नदवी ने बताया कि रांची, लोहरदगा, दरभंगा और गया समेत कई स्थानों से चांद देखने की पुष्टि हुई है। इसके बाद औपचारिक घोषणा की गई।

इदारा-ए-शरिया औरंगाबाद और मिली काउंसिल बिहार ने भी चांद की तस्दीक करते हुए रमजान की शुरुआत का ऐलान किया। काज़ी फैजान सरवर मिस्बाही के अनुसार औरंगाबाद (बिहार) में आसमान साफ था और आम तौर पर चांद देखा गया।

अरब और अन्य देशों में शुरुआत

सऊदी अरब में मंगलवार शाम चांद दिखने के बाद बुधवार को पहला रोज़ा रखा गया। कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, फिलिस्तीन, सूडान, सोमालिया और जिबूती ने भी बुधवार से रमजान की शुरुआत की घोषणा की।

इराक के सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया उलेमा दोनों ने बुधवार से रोज़ों की पुष्टि की। यमन के हौथी-प्रशासित इलाकों और लेबनान के सुन्नी समुदाय ने भी उसी दिन पहला रोज़ा रखा।

दूसरी ओर मिस्र में मंगलवार शाम चांद नजर न आने के कारण गुरुवार से रमजान शुरू हुआ। यह घोषणा वहां के ग्रैंड मुफ्ती नज़ीर अयाद ने की। जॉर्डन, सीरिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, ईरान, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया और मलेशिया ने भी गुरुवार को पहला रोज़ा घोषित किया।

तुर्की, ओमान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में खगोलीय गणनाओं के आधार पर गुरुवार से रमजान की शुरुआत हुई। यह उल्लेखनीय है कि कुछ देश स्थानीय चांद की दृष्टि पर निर्भर करते हैं, जबकि अन्य वैज्ञानिक और खगोलीय गणनाओं को प्राथमिकता देते हैं।

हरमैन शरीफैन में पहली तरावीह का नूरानी मंज़र

मक्का की मस्जिद अल-हरम और मदीना की मस्जिद-ए-नबवी में लाखों नमाज़ियों ने पहली तरावीह अदा की। स्थानीय नागरिकों, प्रवासी मुसलमानों और दुनिया भर से आए उमरा ज़ायरीनों की बड़ी संख्या ने इबादत में हिस्सा लिया। प्रशासन की ओर से नमाज़ियों की सुविधा के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए।

हरमैन शरीफैन की जनरल अथॉरिटी ने रमजान के लिए विशेष ऑपरेशनल प्लान लागू किया है। ज़मज़म पानी की आपूर्ति, मस्जिद की सफाई और खुशबूदार माहौल, पांच भाषाओं में डिजिटल मार्गदर्शन स्क्रीन और त्वरित अनुवाद उपकरणों से लैस ग्राउंड यूनिट्स की तैनाती की गई है।

मस्जिद अल-अक़्सा में हजारों की शिरकत

यरूशलम स्थित मस्जिद अल-अक़्सा में भी पहली तरावीह के दौरान हजारों फिलिस्तीनियों ने नमाज़ अदा की। नमाज़ की इमामत शेख यूसुफ अबू सनीना ने कराई। हालांकि इलाके में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े रहे और इज़राइली पुलिस की भारी मौजूदगी देखी गई।

यरूशलम और फिलिस्तीनी इलाकों के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन ने बुधवार को पहला रोज़ा घोषित किया। हाल के दिनों में पूर्वी यरूशलम और पश्चिमी तट पर सुरक्षा प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों में वृद्धि की खबरें भी सामने आई हैं।

शाह सलमान का संदेश

सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ ने रमजान के मौके पर नागरिकों, प्रवासियों और दुनिया भर के मुसलमानों को मुबारकबाद दी। उन्होंने इसे रहमत और मगफिरत का महीना बताते हुए कहा कि इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। उन्होंने हरमैन शरीफैन की सेवा का अवसर मिलने पर अल्लाह का शुक्र अदा किया और मुस्लिम उम्मा व दुनिया में अमन-ओ-इस्तेहकाम की दुआ की।

अमेरिका और कनाडा की ओर से शुभकामनाएं

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रमजान की शुरुआत पर संदेश जारी करते हुए इसे आध्यात्मिक नवनीकरण और आत्मचिंतन का समय बताया। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता को राष्ट्र की शक्ति का आधार बताते हुए शांति और बरकत की कामना की।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि रमजान कृतज्ञता और आध्यात्मिक प्रसन्नता का महीना है। उन्होंने इस्लामोफोबिया के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प दोहराया।

इबादत, सब्र और इंसानियत का पैगाम

रमजान इस्लामी चांद्र कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे रोज़ा, नमाज़, तिलावत और आत्ममंथन के रूप में मनाया जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखकर मुसलमान आत्मसंयम, सब्र और इंसानियत का अभ्यास करते हैं।

भारत सहित दुनिया भर में मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है। बाजारों में भी रमजान की खास चहल-पहल नजर आ रही है। सहरी और इफ्तार की तैयारियों के साथ यह महीना सामाजिक एकजुटता और आपसी भाईचारे का संदेश दे रहा है।

इस प्रकार, रमजान का आगाज़ पूरी दुनिया में आध्यात्मिक उत्साह, सामाजिक एकता और दुआओं के माहौल के साथ हुआ है। मुसलमान इस पवित्र महीने में इबादत, खैरात और नेक अमल के जरिए खुद को और समाज को बेहतर बनाने का संकल्प ले रहे हैं।