कालीकट में रोज़ा-इफ़्तार का कारवां: जामिया मरकज़ कैंपस में उमड़ी सैकड़ों लोगों की भीड़
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, कालीकट | रिपोर्ट: अब्दुल कारी अमजदी
रमज़ान की रूहानियत और सामाजिक एकता का जीवंत नज़ारा इस बार भी कालीकट के जामिया मरकज़ कैंपस में देखने को मिला। हर साल की तरह इस साल भी “मरकज़ रमज़ान लयाली” स्कीम के तहत भव्य कम्युनिटी इफ़्तार का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए।
मुसाफ़िरों, मज़दूरों, मरीज़ों, छात्रों और आम नागरिकों के लिए आयोजित यह इफ़्तार महज़ एक दावत नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का संदेश बनकर उभरा।
इंसानियत की मिसाल बना मरकज़
जामिया मरकज़ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में हर तबके के लोगों का स्वागत किया गया। खबरों के मुताबिक, दूर-दराज़ से आए मुसाफ़िर, रोज़गार की तलाश में लगे मज़दूर, इलाज के लिए आए मरीज़, स्थानीय छात्र और तीर्थयात्री बड़ी संख्या में शामिल हुए।
मरकज़ प्रशासन ने इस आयोजन के लिए व्यापक इंतज़ाम किए। रोज़ेदारों के लिए साफ-सुथरे इफ़्तार स्थल, पानी और खजूर की व्यवस्था, विशेष भोजन और नमाज़ के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया गया।
100 से अधिक वॉलंटियर्स की सेवा
इफ़्तार इवेंट को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए 100 से अधिक स्वयंसेवकों को तैनात किया गया। ये वॉलंटियर्स पूरे दिन तैयारी में जुटे रहे—भोजन पैकिंग, वितरण, सफाई और नमाज़ व्यवस्था तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया।
स्वयंसेवकों का कहना था कि “रमज़ान सेवा और सब्र का महीना है। इस महीने में रोज़ेदारों की खिदमत करना हमारे लिए सौभाग्य है।”
इबादत और इल्म का संगम
इफ़्तार से पहले रोज़ेदार असर की नमाज़ अदा कर हल्क़ा-ए-ज़िक्र में शामिल हुए। इसके बाद वे अल-हामिल मस्जिद पहुंचे, जहां परंपरा के मुताबिक विशेष नमाज़ अदा की गई।
रमज़ान के पूरे महीने में मरकज़ में कई धार्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं—जैसे जलसा एतिकाफ, दरस-ए-हदीस, दरस-ए-कुरआन, ख़तम अल-बुर्दा, मजलिस कादरिया, कियामुल-लैल और सामूहिक इफ़्तार। इन आयोजनों में राज्य के प्रमुख उलेमा, शेख और सआदात शरीक होते हैं।

डॉ. अजहरी का संदेश: रोज़ा जोड़ता है दिलों को
सामुदायिक समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. अजहरी ने कहा कि रोज़ा और इफ़्तार का असली मक़सद केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि इंसानियत, मोहब्बत और एकता का पैग़ाम देना है।
उन्होंने कहा, “रोज़ा रखने और साथ मिलकर इफ़्तार करने से देश में आपसी प्रेम और सहमति का माहौल बनता है। रमज़ान के पहले दस दिन रहमत और बरकत से भरे होते हैं। हमें इस महीने में दान और सदका को बढ़ाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि मरकज़ के लिए गर्व की बात है कि रमज़ान के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में इफ़्तार, शैक्षिक प्रचार, रमज़ान प्रवचन और सामाजिक-कल्याणकारी सेवाओं के सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
सामाजिक सेवा का विस्तार
डॉ. अजहरी ने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि मुसलमानों को समाज की भलाई और विकास के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रमज़ान आत्मशुद्धि का महीना है, जो इंसान को समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
मरकज़ द्वारा संचालित ये कार्यक्रम न केवल धार्मिक जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग की दिशा में भी सकारात्मक भूमिका निभाते हैं।
रमज़ान: रूहानियत से आगे सामाजिक एकता तक
कालीकट का यह कम्युनिटी इफ़्तार इवेंट एक बार फिर साबित करता है कि रमज़ान सिर्फ इबादत का महीना नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और इंसानियत की सेवा का भी प्रतीक है।
सैकड़ों लोगों की मौजूदगी, वॉलंटियर्स की समर्पित सेवा और विद्वानों का मार्गदर्शन—इन सबने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
रमज़ान की शाम में जब अज़ान की आवाज़ गूंजी और रोज़ेदारों ने एक साथ दुआ के साथ रोज़ा खोला, तो वहां मौजूद हर शख्स ने भाईचारे और एकता की ताकत को महसूस किया।
कालीकट से उठी यह तस्वीर देशभर के लिए एक प्रेरक संदेश है—रोज़ा सिर्फ आत्मसंयम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का माध्यम भी है।

