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खैबर पख्तूनख्वा में रातभर गोलाबारी, पाकिस्तान और तालिबान आमने-सामने

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच ड्यूरंड लाइन पर एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। गुरुवार देर रात खैबर पख्तूनख्वा के कई सीमावर्ती सेक्टरों में अचानक गोलाबारी और हमलों की खबरों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला खड़ा किया। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर ‘बिना उकसावे की कार्रवाई’ का आरोप लगाया है और भारी नुकसान पहुंचाने के दावे किए हैं।

पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि अफगान तालिबान बलों ने चितराल, खैबर, मोहम्मद, कुर्रम और बाजौर सेक्टरों में अचानक फायरिंग शुरू की, जिसका “तुरंत और प्रभावी जवाब” दिया गया। वहीं काबुल स्थित तालिबान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में नंगरहार और पक्तिया प्रांतों में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में की गई।


पाकिस्तान का दावा: “मुंहतोड़ जवाब, भारी नुकसान”

पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा कि अफगान बलों की ‘बिना उकसावे की आक्रामकता’ का सुरक्षा बलों ने पूरी ताकत से जवाब दिया। बयान के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में अफगान पक्ष को भारी जन-धन का नुकसान हुआ है और कई चौकियां व सैन्य उपकरण नष्ट कर दिए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी ड्रोन और तोपखाने ने सीमावर्ती अफगान पोस्टों को निशाना बनाया। कुछ सेक्टरों में कथित तौर पर अफगान चौकियां ध्वस्त कर दी गईं और कई ‘क्वाडकॉप्टर’ गिरा दिए गए।

संघीय सूचना मंत्री अता तरार ने दावा किया कि पाकिस्तान की कार्रवाई में 36 अफगान सैनिक मारे गए हैं, जबकि दो पाकिस्तानी जवान शहीद और तीन घायल हुए। हालांकि, पाकिस्तानी पक्ष ने अफगान दावे—कि 40 चौकियों पर कब्जा किया गया—को “झूठा प्रचार” बताया है।

प्रधानमंत्री के विदेशी मीडिया सलाहकार ने भी सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि “किसी पाकिस्तानी चौकी पर कब्जा नहीं हुआ और न ही किसी सैनिक को बंदी बनाया गया है।”


काबुल का पलटवार: “55 पाकिस्तानी सैनिक ढेर, चौकियां कब्जे में”

दूसरी ओर, अफगान तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया मंच X पर बयान जारी कर कहा कि अफगान बलों ने “तीव्र जवाबी कार्रवाई” की है। उनके अनुसार, 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, कई को जीवित पकड़ा गया और 19 चेकपोस्ट व दो मुख्यालयों पर कब्जा कर लिया गया।

अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह ऑपरेशन पाकिस्तानी हवाई हमलों के प्रतिशोध में किया गया, जो हाल ही में नंगरहार और पक्तिया प्रांतों में किए गए थे।

काबुल के अनुसार, इन हवाई हमलों में 13 नागरिक—जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे—घायल हुए। अफगान सेना ने यह भी स्वीकार किया कि इस कार्रवाई में उसके आठ सैनिक मारे गए और 11 घायल हुए।


ड्यूरंड लाइन पर बढ़ता तनाव

ड्यूरंड लाइन लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र रही है। तालिबान शासन इसे औपनिवेशिक विरासत बताते हुए मान्यता नहीं देता, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। हालिया घटनाक्रम ने इस संवेदनशील सीमा को फिर से युद्धक्षेत्र में बदल दिया है।

सीमावर्ती इलाकों—खासकर तोरखम और चमन—में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कई गांवों में लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।


हवाई हमलों से शुरू हुआ टकराव

इस संकट की जड़ पिछले सप्ताह हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों में बताई जा रही है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर 70 उग्रवादियों को मार गिराया।

लेकिन काबुल ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि हमलों में आम नागरिक मारे गए। अफगान रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एक अस्थायी शरणार्थी शिविर भी प्रभावित हुआ, जिससे मानवीय संकट गहराया।

यही घटनाएं अब व्यापक सैन्य टकराव में बदल गई हैं, जिसमें दोनों देश अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।


जमीनी हालात: वीडियो और दावे

अफगान सेना द्वारा जारी वीडियो में रात के अंधेरे में पहाड़ी इलाके से गुजरता एक सैन्य वाहन और गोलाबारी की चमक दिखाई देती है। पाकिस्तान ने भी सीमावर्ती चौकियों पर हमलों और जवाबी कार्रवाई के दृश्य साझा किए हैं।

हालांकि, स्वतंत्र स्रोतों से इन दावों की पुष्टि फिलहाल संभव नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियां—AFP और Reuters—दोनों पक्षों के दावों को सामने रख रही हैं, लेकिन वास्तविक हताहतों की संख्या अस्पष्ट है।


क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है। पहले से ही आतंकवाद, शरणार्थी संकट और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहे इस क्षेत्र में एक खुला सैन्य संघर्ष हालात और बिगाड़ सकता है।

चीन, ईरान और मध्य एशियाई देशों की नजर भी इस घटनाक्रम पर है, क्योंकि यह इलाका रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।


आगे क्या?

दोनों देशों की ओर से फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दिख रहे। पाकिस्तान ने अपनी “क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा” के लिए हर आवश्यक कदम उठाने की बात दोहराई है, जबकि अफगान तालिबान ने इसे “वैध प्रतिशोध” करार दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि कूटनीतिक संवाद जल्द शुरू नहीं हुआ तो यह सीमित झड़प व्यापक संघर्ष में बदल सकती है। फिलहाल सीमा पर गोलाबारी रुकने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि अफगान सेना ने दावा किया है कि ऑपरेशन आधी रात को सेना प्रमुख के आदेश पर समाप्त कर दिया गया।


निष्कर्ष

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर ताजा संघर्ष ने एक बार फिर दिखा दिया है कि ड्यूरंड लाइन पर शांति कितनी नाजुक है। दोनों देशों के परस्पर विरोधी दावे स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। जब तक पारदर्शी जांच और संवाद की पहल नहीं होती, तब तक यह तनाव किसी भी समय बड़े टकराव का रूप ले सकता है।

दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान की राह अपनाएं—वरना सीमावर्ती पहाड़ों में गूंजती गोलियों की आवाज पूरे क्षेत्र के भविष्य को अस्थिर कर सकती है।