पाकिस्तान–अफगानिस्तान ‘ओपन वॉर’: काबुल पर हमले, ड्रोन स्ट्राइक और सीमा पर भीषण लड़ाई
Table of Contents
इस्लामाबाद–काबुल में धमाके; दोनों देशों के दावों में भारी हताहत, आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब खुली जंग में बदलता दिख रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने हालिया घटनाक्रम को “ओपन वॉर” करार दिया है, जबकि काबुल और सीमा क्षेत्रों में धमाकों की खबरें लगातार आ रही हैं। उधर, तालिबान सरकार के प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने दावा किया कि अफगानिस्तान ने ड्यूरंड लाइन के साथ “बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान” शुरू किया है।
दोनों पक्षों ने भारी हताहतों का दावा किया है, लेकिन इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सीमा पर भड़की आग: ड्यूरंड लाइन बना जंग का केंद्र
अफगानिस्तान–पाकिस्तान सीमा, जिसे ड्यूरंड लाइन कहा जाता है, पिछले कई हफ्तों से झड़पों का केंद्र बनी हुई थी। अब ताज़ा हमलों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं।
पाकिस्तान का दावा है कि उसने 297 तालिबान लड़ाकों को मार गिराया, जबकि उसके दो सुरक्षाकर्मी मारे गए। इसके उलट अफगानिस्तान का कहना है कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और उसके आठ लड़ाके हताहत हुए।
सीमा पार गोलाबारी, रॉकेट लॉन्चर और ड्रोन हमलों की खबरों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
काबुल, कंधार और पक्तिया में हमले
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ हिस्सों में हवाई हमले किए। इसके बाद इस्लामाबाद ने इसे “खुला युद्ध” बताते हुए सैन्य अभियान जारी रखने की बात कही।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पलटवार का दावा करते हुए कहा कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। मंत्रालय के प्रवक्ता Enayatullah Khwarazmi के अनुसार, इस्लामाबाद के पास फैज़ाबाद के नजदीक एक सैन्य शिविर, नौशेरा का मुख्यालय, जमरूद की सैन्य टाउनशिप और एबटाबाद को निशाना बनाया गया।
तालिबान सेना प्रमुख Fasihuddin Fitrat ने कहा, “हम अफगान जनता को भरोसा दिलाते हैं कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा।”
ड्रोन हमले और पाकिस्तान में राष्ट्रीय प्रतिबंध
पाकिस्तान के सूचना मंत्री Attaullah Tarar ने दावा किया कि अफगानिस्तान की ओर से एबटाबाद, स्वाबी और नौशेरा पर ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें एंटी-ड्रोन सिस्टम ने मार गिराया और कोई जनहानि नहीं हुई।
तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान सरकार ने पूरे देश में सभी वाणिज्यिक और निजी ड्रोन संचालन पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगा दिया है। गृह मंत्रालय ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया।
अमेरिका की संभावित भूमिका: ट्रंप का बयान
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वे हस्तक्षेप पर विचार कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी उल्लेख किया।
वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैं हस्तक्षेप कर सकता हूं, लेकिन पाकिस्तान के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं।” उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका हालात पर करीबी नजर रखे हुए है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो यह संघर्ष व्यापक सैन्य टकराव का रूप ले सकता है। दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच पाकिस्तान–अफगानिस्तान टकराव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
ड्यूरंड लाइन पर लंबे समय से अविश्वास और आरोप–प्रत्यारोप की स्थिति रही है। दोनों देश एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं। ताजा घटनाक्रम ने इन आरोपों को और तीखा कर दिया है।
मानवीय संकट की आशंका
सीमा क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों पर इस संघर्ष का सीधा असर पड़ रहा है। विस्फोटों और गोलाबारी के कारण स्थानीय आबादी में दहशत है। यदि झड़पें जारी रहीं तो शरणार्थी संकट और मानवीय चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने दोनों देशों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
आगे क्या?
दोनों देशों के आधिकारिक बयानों से साफ है कि फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दिख रहे। पाकिस्तान “ऑपरेशन जारी” रखने की बात कर रहा है, जबकि अफगानिस्तान इसे जवाबी कार्रवाई बता रहा है।
राजनयिक स्तर पर अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि वार्ता के रास्ते नहीं खुले तो यह टकराव लंबे संघर्ष में बदल सकता है।

