खामेनेई के बाद ईरान में सत्ता किसके हाथ? अंतरिम नेतृत्व परिषद से लेकर IRGC की असली ताकत तक पूरी तस्वीर
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की संयुक्त अमेरिकी–इज़रायली हमलों में मौत के बाद इस्लामिक रिपब्लिक एक नए और बेहद संवेदनशील दौर में प्रवेश कर चुका है। तेहरान में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत तत्काल प्रभाव से एक अंतरिम नेतृत्व परिषद (Interim Leadership Council) सक्रिय कर दी गई है, जिसने देश की बागडोर अस्थायी रूप से संभाल ली है।
राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने रविवार को घोषणा की कि “नया नेतृत्व परिषद अपना काम शुरू कर चुका है।” यह बयान संकेत देता है कि ईरान अब उत्तराधिकार (succession) की औपचारिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है।
संवैधानिक व्यवस्था: सत्ता का अंतरिम हस्तांतरण कैसे होता है?
ईरान के संविधान के अनुसार यदि सर्वोच्च नेता का निधन हो जाए या वे कार्य करने में असमर्थ हों, तो अस्थायी रूप से तीन सदस्यीय परिषद देश की सर्वोच्च सत्ता संभालती है। इस परिषद में शामिल होते हैं:
- राष्ट्रपति
- न्यायपालिका प्रमुख
- गार्जियन काउंसिल का एक वरिष्ठ इस्लामी विधिवेत्ता
वर्तमान परिषद में ये तीन चेहरे शामिल हैं:
- मसूद पेज़ेशकियन – राष्ट्रपति
- गोलामहुसैन मोहसेनी एजई – न्यायपालिका प्रमुख
- अलीरेज़ा अराफी – गार्जियन काउंसिल सदस्य व वरिष्ठ धर्मगुरु
इन तीनों का दायित्व है कि वे राज्य संचालन, सुरक्षा नियंत्रण और नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित करें।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन: राजनीतिक चेहरा, सीमित शक्तियां

71 वर्षीय मसूद पेज़ेशकियन 2024 में राष्ट्रपति बने थे। पेशे से हार्ट सर्जन रहे पेज़ेशकियन को एक सुधारवादी और शांत स्वभाव वाले टेक्नोक्रेट के रूप में देखा जाता है। उनका जन्म महाबाद में हुआ — पिता तुर्क मूल के और माता कुर्द पृष्ठभूमि से थीं।
राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने इज़रायल के साथ 12 दिन के सैन्य टकराव और महंगाई को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों जैसी चुनौतियों का सामना किया। खामेनेई की मौत के बाद उन्होंने इसे “मुसलमानों के खिलाफ युद्ध की घोषणा” बताया और ईरान की प्रतिक्रिया को “वैध अधिकार” करार दिया।
हालांकि वे अंतरिम परिषद का हिस्सा हैं, लेकिन ईरान की राजनीतिक संरचना में राष्ट्रपति की शक्तियां पारंपरिक रूप से सर्वोच्च नेता से कम होती हैं। इसलिए पेज़ेशकियन का चेहरा प्रमुख है, पर निर्णायक नहीं।
न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी एजई: सख्त रुख और सुरक्षा तंत्र का प्रतिनिधित्व



करीब 68 वर्षीय Gholamhossein Mohseni Ejei को इस्लामिक रिपब्लिक के सख्त और संस्थागत ढांचे का प्रतीक माना जाता है। इस्फहान प्रांत में जन्मे एजई दशकों से न्यायपालिका और खुफिया ढांचे में सक्रिय रहे हैं। 2021 में उन्हें खामेनेई ने न्यायपालिका प्रमुख नियुक्त किया था।
2009 के विवादित चुनावों के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के आरोपों को लेकर अमेरिका ने 2010 में उन पर प्रतिबंध लगाए थे।
खामेनेई की मौत के बाद एजई ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान अपने “वीर नेता” की हत्या को कभी माफ नहीं करेगा। उनकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि सुरक्षा और कठोर रुख वाली नीतियां जारी रहेंगी।
अलीरेज़ा अराफी: धार्मिक वैधता का चेहरा




65 वर्षीय Alireza Arafi अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम चर्चित हैं, लेकिन संस्थागत दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वे क़ुम स्थित सेमिनरी प्रबंधन केंद्र के प्रमुख हैं, गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष भी हैं।
1971 से क़ुम में धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने वाले अराफी शाह के दौर में जेल भी जा चुके हैं। उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि अंतरिम परिषद को वैचारिक और धार्मिक वैधता प्रदान करती है। खामेनेई की मौत के बाद उन्होंने कहा कि “राष्ट्र क्रांति के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा।”
परदे के पीछे की असली ताकत: अली लारिजानी और IRGC
हालांकि अंतरिम परिषद औपचारिक सत्ता संभाल रही है, लेकिन असली शक्ति सुरक्षा प्रतिष्ठान में निहित है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख Ali Larijani को संक्रमण काल का प्रमुख रणनीतिकार माना जा रहा है।
नजफ में 1957 में जन्मे लारिजानी एक प्रभावशाली धार्मिक परिवार से आते हैं और संसद, सेना व मीडिया सहित कई अहम पदों पर रह चुके हैं। उन्होंने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ “कड़ा जवाब” देने की बात कही है, जिससे संकेत मिलता है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान पूरी तरह सक्रिय है।
असली निर्णायक कौन? इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC)
Islamic Revolutionary Guard Corps ईरान की सबसे शक्तिशाली संस्था मानी जाती है। इसके पास:
- विशिष्ट सैन्य बल
- बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम
- खुफिया तंत्र
- ऊर्जा और व्यापार में व्यापक आर्थिक हित
राजनीतिक अस्थिरता के समय IRGC को व्यवस्था का “रीढ़” माना जाता है। नए सर्वोच्च नेता के चयन में उसकी भूमिका निर्णायक होगी।
अगला कदम: नया सर्वोच्च नेता कैसे चुना जाएगा?
ईरान के 88 सदस्यीय Assembly of Experts को नए सर्वोच्च नेता का चयन करना है। यह निकाय जनता द्वारा चुना जाता है, लेकिन उम्मीदवारों की जांच गार्जियन काउंसिल करती है।
व्यवहारिक तौर पर प्रक्रिया इन केंद्रों के बीच सहमति से आगे बढ़ेगी:
- क़ुम के वरिष्ठ धर्मगुरु
- IRGC का कमांड ढांचा
- सुरक्षा एजेंसियां
- प्रभावशाली राजनीतिक परिवार
यदि इन समूहों में सहमति बनती है, तो ईरान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण संक्रमण देख सकता है। लेकिन यदि अंदरूनी खींचतान बढ़ी, तो सत्ता संघर्ष गहरा सकता है।
निष्कर्ष: अंतरिम परिषद के हाथ में प्रशासन, असली नियंत्रण सुरक्षा अभिजात वर्ग के पास
फिलहाल ईरान संवैधानिक रूप से गठित अंतरिम परिषद के तहत चल रहा है। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन, न्यायपालिका प्रमुख एजई और धर्मगुरु अराफी औपचारिक रूप से सत्ता संभाल रहे हैं।
लेकिन वास्तविक शक्ति सुरक्षा और धार्मिक अभिजात वर्ग — विशेषकर IRGC — के हाथों में केंद्रित है। आने वाले हफ्ते तय करेंगे कि ईरान तेजी से नए सर्वोच्च नेता की ओर बढ़ता है या लंबा संक्रमण काल देखता है।
खामेनेई के बाद का ईरान अब केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन की नई परिभाषा लिख रहा है।

