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एएमयू की बेटियों का कमाल: अंतरराष्ट्रीय मंच पर परचम, विज्ञान और डेंटल रिसर्च में ऐतिहासिक उपलब्धि

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अलीगढ़

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Aligarh Muslim University (एएमयू) की छात्राओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मुस्लिम बेटियां शिक्षा और शोध के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। वन्यजीव विज्ञान और डेंटल रिसर्च जैसे विशेष क्षेत्रों में दो छात्राओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों ने न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे समुदाय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

एथेंस में एएमयू की गूंज: आयशा का अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध प्रस्तुतीकरण

वन्यजीव विज्ञान विभाग की शोध छात्रा आयशा मोहम्मद मसलेहउद्दीन ने एथेंस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Centering Community: Integrative Conservation” में वर्चुअल माध्यम से एएमयू का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने सेंट्रल हिमालय के Streaked Laughingthrush पक्षियों में ध्वनि विविधता (Vocal Variation) पर अपना शोध प्रस्तुत किया, जिसे विशेषज्ञों ने काफी सराहा।

आयशा अपने विभाग की पहली शोधार्थी हैं, जिन्होंने एवियन बायोअकूस्टिक्स (Avian Bioacoustics) जैसे उभरते क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की है। यह विज्ञान पक्षियों की आवाज़ों के अध्ययन के माध्यम से उनके व्यवहार, पहचान, संचार प्रणाली और संरक्षण रणनीतियों को समझने का प्रयास करता है।

उनका शोध प्रो. सतीश कुमार के निर्देशन में और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डॉ. अनिल कुमार के सह-निर्देशन में पूरा हुआ। यह शोध न केवल जैव विविधता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में भी नई दृष्टि प्रदान करता है।

एएमयू प्रशासन ने आयशा की उपलब्धि को विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया है। कुलपति और विभागाध्यक्षों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की शोध संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान का प्रमाण है।


डेंटल साइंस में नवाचार: डॉ. अंबर खान ने जीता प्रथम पुरस्कार

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इसी कड़ी में एक और प्रेरणादायक सफलता सामने आई है। Dr Z A Dental College की पीरियोडॉन्टोलॉजी विभाग की जूनियर रेज़िडेंट (प्रथम वर्ष) डॉ. अंबर खान ने E-Poster Competition 2025 में आइडिया/कॉन्सेप्ट श्रेणी में प्रथम पुरस्कार हासिल किया।

यह प्रतियोगिता Indo-US APJ Abdul Kalam Center for STEM Education and Research द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें International Society for Muslim Women in Sciences (ISMW) का सहयोग रहा।

डॉ. अंबर खान का पोस्टर “AI-Enabled Dual Salivary Biosensors: A Non-Invasive Dual Diagnostic for Diabetes and Oral Diseases” विषय पर आधारित था। इस शोध प्रस्ताव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित दोहरे लार बायोसेंसर की अवधारणा प्रस्तुत की गई है, जो बिना किसी दर्दनाक प्रक्रिया के डायबिटीज और मौखिक रोगों की एक साथ पहचान कर सके।

विशेषज्ञों ने इसे अभिनव, अंतःविषय (Interdisciplinary) और क्लीनिकल रूप से अत्यंत प्रासंगिक बताया।

उनके सुपरवाइजर प्रो. एन. डी. गुप्ता ने कहा कि यह उपलब्धि विभाग की शोध उत्कृष्टता और अकादमिक माहौल की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. अंबर का काम भविष्य में रोग निदान की प्रक्रिया को सरल और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


मुस्लिम बेटियों की नई उड़ान

आयशा और डॉ. अंबर की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक संदेश भी है। यह दर्शाता है कि जब अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो मुस्लिम बेटियां विज्ञान, तकनीक और स्वास्थ्य जैसे जटिल क्षेत्रों में भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

एएमयू, जो लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक उत्थान का केंद्र रहा है, इन उपलब्धियों के माध्यम से एक बार फिर अपनी प्रगतिशील परंपरा को मजबूत करता दिख रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों छात्राओं को सम्मानित करने की घोषणा की है और उम्मीद जताई है कि उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।


निष्कर्ष: शिक्षा से सशक्तिकरण की मिसाल

अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध प्रस्तुति हो या चिकित्सा विज्ञान में एआई आधारित नवाचार—एएमयू की बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल कक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्श का हिस्सा बन रही हैं।

यह उपलब्धियां उस बदलती सोच की गवाही हैं, जहां मुस्लिम समाज की बेटियां शिक्षा को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाकर नई पहचान गढ़ रही हैं।

अलीगढ़ से उठी यह दो प्रेरक कहानियां आने वाले समय में न जाने कितनी और बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का हौसला देंगी।