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भिवाड़ी में गौ-रक्षकों का तांडव, ट्रक ड्राइवर आमिर की गोली मारकर हत्या; बजरंग दल पर FIR

भिवाड़ी/नई दिल्ली | मुस्लिम नाउ ब्यूरो

राजस्थान एक बार फिर तथाकथित ‘गौ-रक्षकों’ की वहशियाना हरकत की वजह से देश भर में शर्मसार हुआ है। भिवाड़ी में 28 वर्षीय मुस्लिम ट्रक चालक आमिर की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। परिजनों का आरोप है कि बजरंग दल से जुड़े हथियारबंद गौ-रक्षकों ने आमिर को निशाना बनाया और उनके सिर में गोली मार दी। यह घटना उस समय हुई जब राजस्थान सरकार और प्रशासन पर इन दरिंदों को काबू करने के लिए कोई ठोस कदम न उठाने के आरोप लग रहे हैं।

परिवार का इकलौता चिराग बुझा, खुशियां मातम में बदलीं

हरियाणा के पल्ला गांव का रहने वाला आमिर अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। आमिर की मौत ने न केवल एक मासूम की जान ली है, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का गम दे दिया है।

  • आमिर अपने पीछे दो साल की बेटी छोड़ गए हैं।
  • उनकी पत्नी चार महीने की गर्भवती हैं।
  • ईद के ठीक बाद आमिर की बहन की शादी तय थी, जिसकी तैयारियां घर में चल रही थीं।

अब उस घर में शादी की शहनाइयों के बजाय चीख-पुकार और सन्नाटा है। दरिंदों ने एक झटके में एक अजन्मे बच्चे के सिर से पिता का साया और एक बहन के सिर से भाई का हाथ छीन लिया।

निशाना बनाकर की गई हत्या, फिर लगाया ‘तस्करी’ का ठप्पा

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और परिजनों के बयानों के अनुसार, आमिर को सिर्फ उनकी धार्मिक पहचान की वजह से निशाना बनाया गया। परिवार का कहना है कि हत्या को अंजाम देने के बाद इसे ‘कानूनी और तर्कसंगत’ रूप देने के लिए आमिर पर गौ-तस्करी का झूठा आरोप मढ़ दिया गया। यह इस क्षेत्र में एक पुराना पैटर्न बन चुका है, जहां पहले हत्या की जाती है और फिर पीड़ित को ही अपराधी घोषित कर दिया जाता है।

पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल

इस मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। शुरुआत में पुलिस ने आमिर को गोली लगने की बात से साफ इनकार कर दिया था। प्रशासन ने दावा किया कि आमिर की चोटें ‘पत्थरबाजी’ की वजह से आई हैं। हालांकि, परिजनों का स्पष्ट कहना है कि आमिर के सिर में नजदीक से गोली मारी गई है।

फिलहाल, पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों और बजरंग दल के सदस्यों के खिलाफ FIR तो दर्ज कर ली है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

सरकार की खामोशी और सुलगते सवाल

राजस्थान में रात के अंधेरे में शैतान की तरह घूमने वाले इन ‘गौ-गुंडों’ पर नकेल कसने में सरकार पूरी तरह विफल दिख रही है। ‘मुस्लिम नाउ’ ब्यूरो इस घटना के जरिए प्रशासन से कुछ कड़े सवाल पूछता है:

  1. आमिर जैसे बेगुनाह नागरिकों के खिलाफ हिंसा करने वाले इन ‘आतंकियों’ पर UAPA जैसी धाराएं क्यों नहीं लगाई जातीं?
  2. क्या सरकार का बुलडोजर सिर्फ एक विशेष वर्ग के लिए है? इन हत्यारों के घरों पर कार्रवाई कब होगी?
  3. भिवाड़ी और मेवात क्षेत्र में बार-बार होने वाली इन हत्याओं के बावजूद राजस्थान सरकार ने अब तक कोई ठोस नीति क्यों नहीं बनाई?

निष्कर्ष: न्याय की आस में पल्ला गांव

आमिर की हत्या ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजस्थान में कानून का डर खत्म हो चुका है और स्वघोषित रक्षक ही भक्षक बन चुके हैं। जब तक इन अपराधियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं होती जो नज़ीर बन जाए, तब तक सड़क पर चलने वाला हर अल्पसंख्यक खुद को असुरक्षित महसूस करेगा।