Shia Solidarity: ईरान पर हमले के विरोध में भारत में नहीं मनेगी ईद, मौलाना कलबे जव्वाद का बड़ा फैसला
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नई दिल्ली | मुस्लिम नाउ ब्यूरो
रमजान के मुकद्दस महीने की शुरुआत के साथ ही ईरान पर इजरायल और अमेरिका के भीषण संयुक्त हमलों ने पूरी दुनिया के मुसलमानों को झकझोर कर रख दिया है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई की शहादत, लगभग डेढ़ हजार बेगुनाह लोगों की मौत और लड़कियों के स्कूल पर बमबारी में 180 छात्राओं के कत्लेआम के विरोध में भारत के शिया समुदाय ने इस बार ईद का जश्न न मनाने और इसे सादगी से बिताने का फैसला किया है।
मशहूर शिया धर्मगुरु मौलाना कलबे जव्वाद ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि जब ईरान में मानवता का कत्ल हो रहा हो, तब उत्सव मनाना मुमकिन नहीं है।
खामनेई की शहादत से गमजदा है समुदाय
मौलाना कलबे जव्वाद ने एक निजी समाचार चैनल (आज तक) से बातचीत में भावुक होते हुए कहा कि आयतुल्लाह खामनेई की मौत के बाद पूरी दुनिया के शिया समुदाय में मातम का माहौल है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की जा रही इस बर्बर बमबारी की भारत सरकार ने अब तक कड़ी निंदा नहीं की है। मौलाना ने साफ किया कि इस बार ईद पर कोई पारंपरिक उत्सव या खुशियां नहीं मनाई जाएंगी, बल्कि इसे विरोध और शोक के रूप में सादगी से गुजारा जाएगा।
‘ईरान गीदड़ भभकियों से नहीं डरता’
ईरान की बहादुरी का जिक्र करते हुए मौलाना ने कहा, “ईरान ने आठ साल तक इराक से जंग लड़ी है और उस वक्त आधा तेहरान तबाह होने के बावजूद ईरान नहीं झुका। आज भी अमेरिका और इजरायल की बमबारी से भारी नुकसान हुआ है, लेकिन ईरान के लोग डरने वाले नहीं हैं।”
उन्होंने एक व्यक्तिगत वाकया साझा करते हुए बताया कि उनके बेटे, भांजे और दो बेटियां भी ईरान में ही हैं। जब उन्होंने अपनी बेटियों से भारत आने के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। मौलाना के मुताबिक, ईरान की जनता बेहद बहादुर है और वे अपनी जमीन छोड़कर भागने वालों में से नहीं हैं।
शिया धर्मगुरु मौलाना कलबे जव्वाद ने आज तक से खास बातचीत में कहा कि ईरान में उनके परिवार के सदस्य फंसे हुए हैं, जिनमें उनके बेटे और भांजे शामिल हैं। जव्वाद ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर बमबारी की भारत सरकार ने निंदा नहीं की। उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद शिया… pic.twitter.com/VHmwhcppqz
— AajTak (@aajtak) March 6, 2026
गौ-मांस पर इजरायल और कट्टरपंथियों को घेरा
मौलाना कलबे जव्वाद ने इजरायल का समर्थन करने वाले कट्टरपंथियों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा:
“मैं ईरान में दस साल रहा हूँ, लेकिन मुझे वहां पूरे देश में कहीं भी गाय के गोश्त (बीफ) की दुकान नहीं दिखी। ईरान के लोग गाय का गोश्त नहीं खाते। इसके विपरीत, इजरायल में गाय का गोश्त खाना आम बात है; वहां खाने की मेज पर रोजाना गाय का मांस होता है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग भारत में गाय को ‘माता’ मानते हैं, वे उन देशों (इजरायल और अमेरिका) का समर्थन कैसे कर सकते हैं जो गाय को काटकर खाते हैं? मौलाना ने इसे उन लोगों के दोहरे मापदंड पर एक बड़ा हमला बताया जो इजरायल के साथ खड़े हैं।
शिया-सुन्नी एकजुटता की मिसाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान पर हुए इस हमले के विरोध में भारत में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच अभूतपूर्व एकजुटता देखी जा रही है। जिस तरह से दोनों समुदाय इस त्रासदी के खिलाफ खड़े हुए हैं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि सुन्नी समुदाय भी इस बार ईद के सार्वजनिक उत्सवों से दूरी बनाए रख सकता है और ईरान के मजलूमों के साथ अपनी हमदर्दी जाहिर करेगा।

