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जामिया के मुन्ना खालिद ने राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन में जीता रजत पदक

नई दिल्ली

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के पीएचडी शोधार्थी मुन्ना खालिद ने एक बार फिर अपनी खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए Yonex-Sunrise 7वीं सीनियर नेशनल पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में रजत पदक जीतकर देश और विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है।

यह प्रतिष्ठित चैंपियनशिप बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) द्वारा 6 से 10 मार्च 2026 के बीच तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले स्थित हार्टफुलनेस गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी, कान्हा वनम आश्रम में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से पैरा बैडमिंटन के शीर्ष खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

फाइनल में कड़ा मुकाबला, मामूली अंतर से चूके खिताब

मुन्ना खालिद ने पुरुष युगल (Men’s Doubles) स्पर्धा में अपने जोड़ीदार शशांक कुमार के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि, खिताबी मुकाबले में उन्हें अबू हुबैदा और प्रेम कुमार अले की जोड़ी के खिलाफ 17-21 और 18-21 से करीबी हार का सामना करना पड़ा।

फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। बावजूद इसके, मुन्ना खालिद और उनके साथी ने शानदार खेल भावना और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दमदार रिकॉर्ड

मुन्ना खालिद केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल कर चुके हैं। अब तक वह भारत के लिए कुल 10 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं, जिनमें 2 स्वर्ण, 2 रजत और 6 कांस्य पदक शामिल हैं।

उनकी यह उपलब्धि उन्हें देश के उभरते हुए पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों में एक खास स्थान दिलाती है।

पढ़ाई और खेल का शानदार संतुलन

मुन्ना खालिद न केवल एक उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं, बल्कि एक समर्पित छात्र भी हैं। वह वर्तमान में जामिया मिल्लिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में पीएचडी कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से बी.ए. (ऑनर्स), मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) और हिंदी में एम.ए. की पढ़ाई पूरी की है।

उनका यह सफर इस बात का उदाहरण है कि यदि समर्पण और मेहनत हो, तो शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।

जामिया प्रशासन ने दी बधाई

मुन्ना खालिद की इस उपलब्धि पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ ने उन्हें हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मुन्ना की यह सफलता न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।

वहीं, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने भी मुन्ना की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए उनके आगामी टूर्नामेंट्स के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय हमेशा ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ खड़ा है जो देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

इसके अलावा, जामिया के खेल एवं क्रीड़ा निदेशक प्रो. नफीस अहमद ने भी मुन्ना खालिद की मेहनत, लगन और समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

भविष्य के बड़े लक्ष्य

मुन्ना खालिद अब आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं। उनका सपना है कि वह एशियन पैरा गेम्स 2026 और पैरालंपिक 2028 में भारत के लिए पदक जीतकर देश, अपने राज्य और अपनी मातृ संस्था जामिया मिल्लिया इस्लामिया का नाम और ऊंचा करें।

उनकी यह उपलब्धि न केवल युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर हौसले बुलंद हों, तो सफलता जरूर मिलती है।