Education

जामिया में ‘द होली कुरान’ प्रदर्शनी: विरासत, कला और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

पवित्र रमजान के महीने में जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) की डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी में ‘द होली कुरान’ शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जो इस्लामी बौद्धिक, कलात्मक और आध्यात्मिक विरासत को समर्पित है। इस प्रदर्शनी में 15वीं सदी से लेकर 20वीं सदी की शुरुआत तक की 35 दुर्लभ और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित कुरान पांडुलिपियां प्रदर्शित की गई हैं।

यह प्रदर्शनी 12 मार्च 2026 को जामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ द्वारा उद्घाटित की गई और यह 18 मार्च 2026 तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

दुर्लभ पांडुलिपियों में झलकती इस्लामी कला और इतिहास

प्रदर्शनी की सबसे खास बात इन दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह है, जो विभिन्न इस्लामी सुलेख (कैलिग्राफी) परंपराओं और कलात्मक सजावट (इल्यूमिनेशन) को दर्शाती हैं। ये पांडुलिपियां न केवल धार्मिक महत्व रखती हैं, बल्कि इस्लामी कला और संस्कृति के विकास की भी गवाही देती हैं।

इसके अलावा, 7वीं से 14वीं सदी के बीच कुरानिक सुलेख के विकास को दर्शाने वाले पोस्टरों की एक श्रृंखला भी प्रदर्शित की गई है, जो दर्शकों को कुरान की लेखन शैली के ऐतिहासिक सफर से परिचित कराती है।

कई भाषाओं में कुरान के अनुवाद भी प्रदर्शित

इस प्रदर्शनी में भारत की विभिन्न भाषाओं—मलयालम, कन्नड़, हिंदी, उर्दू, तमिल और बांग्ला—में प्रकाशित कुरान के संस्करण भी शामिल हैं। इसके साथ ही चीनी, जापानी, जर्मन, फ्रेंच, तुर्की, रूसी, अंग्रेज़ी, स्पेनिश, अल्बानियाई, म्यांमारी (बर्मी) और फारसी भाषाओं में अंतरराष्ट्रीय अनुवाद भी प्रदर्शित किए गए हैं।

विशेष रूप से, ब्रेल लिपि में कुरान का संस्करण भी इस प्रदर्शनी का हिस्सा है, जो दृष्टिबाधित लोगों के लिए ज्ञान की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

कुलपति ने दिया एकता और मानवता का संदेश

उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन में जामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ ने कहा कि पुस्तकालय हमारी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा, “डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी का लक्ष्य है कि कुरान की प्रतियां देश की सभी भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएं, ताकि इसका संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।” उन्होंने यह भी कहा कि सभी आसमानी किताबें मानवता, दया और आपसी सम्मान का संदेश देती हैं।

डिजिटाइजेशन और संरक्षण की सराहना

जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने इस अवसर पर कुरान पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन और संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये अमूल्य धरोहर न केवल सुरक्षित रखी जा रही हैं, बल्कि डिजिटल माध्यम से शोधकर्ताओं और आम लोगों तक भी पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि कुरान को केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि उसके अर्थ और संदेश को समझना भी जरूरी है। उनके अनुसार, कुरान जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन देने वाली एक संपूर्ण किताब है।

विशेष व्याख्यान में कुरान के सार्वभौमिक संदेश पर जोर

इस कार्यक्रम में एक विशेष व्याख्यान भी आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. जाकिर हुसैन इस्लामिक स्टडीज संस्थान के मानद निदेशक प्रो. हबीबुल्लाह खान ने कुरान के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि कुरान अल्लाह का दिव्य संदेश है, जो केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने कुरान में निहित न्याय, समानता, करुणा और मानवाधिकारों के मूल्यों को रेखांकित किया।

कैटलॉग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हुआ लोकार्पण

इस अवसर पर कुरान पांडुलिपियों और दुर्लभ मुद्रित संस्करणों की सूची (कैटलॉग) का भी विमोचन किया गया। इस कैटलॉग में 71 पांडुलिपियां, एक ब्रेल कुरान, कपड़े पर लिखी एक लिथोग्राफ पांडुलिपि और 37 दुर्लभ मुद्रित संस्करण शामिल हैं।

साथ ही एक वेब-आधारित इंटरएक्टिव कैटलॉग भी लॉन्च किया गया, जिससे देश-विदेश के शोधकर्ताओं को इन अमूल्य संसाधनों तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

कार्यक्रम का उद्देश्य: शांति और भाईचारे का संदेश

कार्यक्रम के स्वागत भाषण में लाइब्रेरियन डॉ. विकास नागराले ने कहा कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य कुरान के मानवीय संदेश को लोगों तक पहुंचाना और पांडुलिपियों के संरक्षण के महत्व को उजागर करना है।

इस पहल के जरिए समाज में शांति, भाईचारा और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।