पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच लुलु ग्रुप की बड़ी पहल, भारत से Gulf को खाद्य आपूर्ति
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव और सप्लाई चेन पर पड़ते असर के बीच अब एक सकारात्मक खबर सामने आई है। खाड़ी देशों में खाद्य संकट की आशंका को देखते हुए Lulu Group International ने भारत से ताजा खाद्य उत्पादों की सप्लाई बनाए रखने के लिए विशेष कार्गो उड़ानों का संचालन शुरू किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लुलु ग्रुप ने हाल ही में करीब 80,000 किलोग्राम ताजा फल, सब्जियां और मांस उत्पाद भारत से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अन्य खाड़ी देशों में भेजे हैं, ताकि सुपरमार्केट की अलमारियां भरी रहें और उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।

कोच्चि से अबू धाबी तक विशेष कार्गो उड़ानें
लुलु ग्रुप ने मौजूदा संकट को देखते हुए कोच्चि से अबू धाबी तक चार्टर्ड कार्गो फ्लाइट्स की व्यवस्था की।
ग्रुप के ग्लोबल ऑपरेशंस डायरेक्टर मोहम्मद अल्थाफ के अनुसार, इन उड़ानों में ताजा सब्जियां, फल, मांस और अन्य आवश्यक खाद्य उत्पाद भेजे गए हैं।
उन्होंने बताया कि:
“हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मौजूदा हालात के बावजूद खाड़ी देशों में खाद्य आपूर्ति बाधित न हो। इसके लिए हम भारत से लगातार कार्गो उड़ानें चला रहे हैं।”
मुंबई और दिल्ली से भी बढ़ेगी सप्लाई
लुलु ग्रुप ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में:
- मुंबई
- नई दिल्ली
से भी विशेष कार्गो फ्लाइट्स चलाई जाएंगी, जो GCC (गल्प कोऑपरेशन काउंसिल) देशों के विभिन्न शहरों तक खाद्य सामग्री पहुंचाएंगी।
यह कदम दर्शाता है कि कंपनी केवल एक बार की आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक सप्लाई चेन को बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
कुवैत के लिए भी विशेष उड़ानें
लुलु ग्रुप ने कुवैत के लिए भी दो विशेष उड़ानों का संचालन किया है, जो 12 मार्च को कोच्चि और दिल्ली से रवाना हुईं।
कोच्चि फ्लाइट:
- एयरबस A330-900 विमान
- 32 टन ताजे फल और सब्जियां
- लुलु हाइपरमार्केट्स, कुवैत के लिए
दिल्ली फ्लाइट:
- बोइंग 777 विमान
- 50 टन ताजा मांस और अन्य उत्पाद
इन दोनों उड़ानों के जरिए बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री कुवैत पहुंचाई गई, जिससे वहां की रिटेल सप्लाई स्थिर बनी रही।
भारत बना खाड़ी देशों का खाद्य आधार
लुलु ग्रुप के अनुसार, खाड़ी देशों की खाद्य सुरक्षा में भारत की भूमिका बेहद अहम है।
खासतौर पर दक्षिण भारत—जैसे केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक—से बड़ी मात्रा में खाद्य उत्पाद खाड़ी देशों में निर्यात किए जाते हैं।
इनमें शामिल हैं:
- फल और सब्जियां
- चावल और मसाले
- नारियल और प्याज
- समुद्री खाद्य उत्पाद
- मांस और प्रोसेस्ड फूड
खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनकी खाद्य जरूरतों को पूरा करने में भारत से आने वाले उत्पादों की अहम भूमिका है।
GCC बाजार: 60 मिलियन से ज्यादा उपभोक्ता
गल्प कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों का खाद्य बाजार बेहद बड़ा है।
- 6 करोड़ (60 मिलियन) से अधिक उपभोक्ता
- अरबों डॉलर का वार्षिक व्यापार
- उन्नत लॉजिस्टिक्स और सप्लाई सिस्टम
हालांकि, इन देशों में कृषि संसाधनों और पानी की कमी के कारण खाद्य आयात पर भारी निर्भरता है।
खाद्य सुरक्षा के लिए बड़े निवेश
पिछले एक दशक में खाड़ी देशों ने खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- बड़े अनाज भंडार (grain silos)
- लंबी अवधि के लिए स्टोरेज सुविधाएं
- डेयरी, मछली और पोल्ट्री सेक्टर में आत्मनिर्भरता
इन उपायों ने युद्ध जैसे संकट के समय खाद्य आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद की है।
युद्ध का असर: कीमतों में उतार-चढ़ाव
ईरान-इजरायल युद्ध का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- माल ढुलाई (freight) की लागत बढ़ रही है
- बीमा प्रीमियम महंगे हो रहे हैं
- लॉजिस्टिक्स में बाधाएं आ रही हैं
हालांकि, खाड़ी देशों के मजबूत भंडारण और नियामक तंत्र ने कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है।
रिटेलर्स की अहम भूमिका
इस संकट के दौरान रिटेल कंपनियां भी स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
लुलु ग्रुप जैसे बड़े रिटेलर:
- चावल, आटा, तेल और पानी जैसे जरूरी उत्पादों का स्टॉक बनाए रख रहे हैं
- सप्लाई चेन को लगातार सक्रिय रख रहे हैं
- उपभोक्ताओं में भरोसा बनाए रख रहे हैं
इससे बाजार में घबराहट और पैनिक बाइंग की स्थिति नहीं बन रही।
250 से ज्यादा स्टोर्स का नेटवर्क
लुलु ग्रुप इंटरनेशनल, जिसकी स्थापना 1997 में भारतीय मूल के कारोबारी एम.ए. यूसुफ अली ने की थी, आज एक वैश्विक रिटेल दिग्गज बन चुका है।
- 250 से ज्यादा स्टोर्स
- GCC, एशिया और यूरोप में मौजूदगी
- लाखों ग्राहकों को सेवा
ऐसे बड़े नेटवर्क के कारण कंपनी संकट के समय तेजी से निर्णय लेकर सप्लाई चेन को सक्रिय रख पाती है।
लगातार बढ़ाई जा रही उड़ानों की संख्या
लुलु ग्रुप ने बताया कि:
- पिछले सप्ताह कोच्चि, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से कई कार्गो उड़ानें संचालित की गईं
- आगे और भी उड़ानों की योजना है
- भारत के अलावा अन्य देशों से भी सप्लाई बढ़ाई जाएगी
यह दर्शाता है कि कंपनी इस संकट को लंबे समय तक ध्यान में रखकर तैयारी कर रही है।
क्यों अहम है यह कदम?
विशेषज्ञ मानते हैं कि लुलु ग्रुप की यह पहल कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- खाद्य संकट टालने में मदद
- सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखना
- उपभोक्ताओं में भरोसा कायम रखना
- भारत-खाड़ी व्यापार संबंधों को मजबूत करना
निष्कर्ष: संकट में सप्लाई चेन की सबसे बड़ी परीक्षा
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा किसी भी देश के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
ऐसे समय में लुलु ग्रुप जैसी कंपनियों की सक्रिय भूमिका यह दिखाती है कि निजी क्षेत्र भी संकट प्रबंधन में अहम योगदान दे सकता है।
भारत से लगातार हो रही आपूर्ति ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक खाद्य नेटवर्क में भारत की भूमिका कितनी मजबूत है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह सप्लाई चेन इसी तरह सुचारु बनी रहती है या युद्ध के बढ़ते असर से इसमें और चुनौतियां सामने आती हैं।

