ईरान-इजरायल युद्ध खतरनाक मोड़ पर, तेल ठिकानों पर हमले की धमकी
मुस्लिम नाउ ब्यूरो | वेस्ट एशिया डेस्क
पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के 19वें दिन हालात और गंभीर हो गए, जब ईरान ने खाड़ी देशों—सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर—के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाने की खुली चेतावनी दे दी। यह धमकी इजरायल द्वारा ईरान के दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर किए गए हमले के बाद सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सख्त लहजे में कहा है कि उनके देश के वरिष्ठ सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की हत्या का बदला जरूर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हर खून की एक कीमत होती है और शहीदों के हत्यारों को जल्द ही इसकी कीमत चुकानी होगी।” खामेनेई ने लारिजानी को एक बुद्धिमान और समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उनकी हत्या इस बात का सबूत है कि दुश्मन इस्लामी व्यवस्था से कितना भयभीत है।

इसी बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। IRGC के खतम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि “हमारे ऊर्जा ढांचे पर हमला करने वालों के तेल, गैस और ईंधन के ठिकानों को जल्द ही राख में बदल दिया जाएगा।” इस बयान ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में ऊर्जा ठिकाने युद्ध का मुख्य लक्ष्य बन सकते हैं।
ईरान ने केवल चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में संभावित हमलों को देखते हुए वहां के कई अहम ऊर्जा ठिकानों को खाली करने का आदेश भी जारी कर दिया है। जिन ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है, उनमें सऊदी अरब का SAMREF रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई का अल होसन गैसफील्ड, और कतर का रास लफान रिफाइनरी तथा मेसईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ईरान के सबसे बड़े गैस क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ पर इजरायली हमले की खबरें आईं। ईरान के पेट्रोलियम मंत्रालय ने पुष्टि की कि इस हमले में कुछ रिफाइनिंग यूनिट्स को नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। गैसफील्ड में लगी आग पर काबू पा लिया गया है और उत्पादन आंशिक रूप से जारी है।
इस हमले की संयुक्त अरब अमीरात ने कड़ी निंदा की है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने इसे “खतरनाक उकसावा” करार देते हुए कहा कि ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण ढांचों पर किसी भी परिस्थिति में हमला नहीं होना चाहिए।
सऊदी अरब ने भी खतरे को भांपते हुए अपने प्रमुख इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। रियाद और अल-खर्ज क्षेत्रों में आपात चेतावनी प्रणाली सक्रिय कर दी गई है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि उसने अपने पूर्वी क्षेत्र की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और दो ड्रोन को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है।
युद्ध का सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। ईरान में 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बुधवार को दक्षिणी ईरान के लारेस्तान में एक अदालत परिसर पर हुए हवाई हमले में कम से कम आठ लोगों की जान चली गई। यह हमला नागरिक ढांचे पर बढ़ते हमलों का एक और उदाहरण है।
ईरान की न्यायपालिका से जुड़ी एजेंसी मिजान के अनुसार, देश में एक व्यक्ति को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी भी दी गई है। वहीं, स्वीडन ने ईरान में अपने एक नागरिक को दी गई सजा की कड़ी निंदा की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ गया है।

परमाणु सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि बुशेहर परमाणु संयंत्र के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा था, हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि किसी परमाणु दुर्घटना का खतरा न पैदा हो।
भारत पर भी इस युद्ध का असर साफ दिख रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, लगभग 1,000 भारतीय नागरिक अभी भी ईरान में फंसे हुए हैं, हालांकि सभी लोग देश छोड़ना नहीं चाहते। इसके अलावा, खाड़ी देशों में रह रहे करीब 23,000 छात्र इस संकट के कारण CBSE की अंतिम परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सके हैं।
लेबनान में भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाते हुए बेरूत में कई रिहायशी इमारतों पर हमले किए हैं। इन हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए हैं। एक हमले में अल-मनार टीवी के वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद शर्री और उनकी पत्नी की मौत हो गई, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए हैं।
लेबनान सरकार के अनुसार, इजरायली हमलों के कारण अब तक 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत है। अब तक 912 लोगों की मौत और 2,200 से अधिक के घायल होने की पुष्टि हुई है।
इजरायल में भी हालात सामान्य नहीं हैं। ईरानी मिसाइल हमलों में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 13 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबर भी सामने आई है।
विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति इस युद्ध को और खतरनाक बना सकती है। इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। तेल और गैस आपूर्ति बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच यह संघर्ष अब कई देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह युद्ध एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।

