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ट्रंप की धमकी से ईरान-अमेरिका में भीषण युद्ध : दुनिया में तेल संकट, बांग्लादेश में हाहाकार

ढाका/तेहरान/वॉशिंगटन

दुनिया इस समय एक विनाशकारी ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त बयानबाजी और ईरान के पलटवार ने ‘ईरान-इजरायल-अमेरिका’ युद्ध को उस निर्णायक मोड़ पर पहुँचा दिया है, जहाँ से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिका ने उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाया, तो वह दुनिया की ‘ऊर्जा लाइफलाइन’ कहे जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को स्थायी रूप से बंद कर देगा।

इस युद्ध की तपिश अब दक्षिण एशियाई देशों, विशेषकर बांग्लादेश में महसूस की जाने लगी है, जहाँ पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, हिंसा और ईंधन की भारी किल्लत ने नागरिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।


बांग्लादेश में पेट्रोल पंपों पर ‘लूट’ जैसे हालात: मालिक संघ की चेतावनी

बांग्लादेश पेट्रोल पंप मालिक संघ ने रविवार रात एक आपातकालीन प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देश की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि ईंधन की भारी कमी और बढ़ती असुरक्षा के कारण देशभर के पेट्रोल पंप किसी भी समय स्थायी रूप से बंद हो सकते हैं।

  • लंबी कतारें और मानसिक तनाव: तेल डिपो से पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण मोटरसाइकिल चालक घंटों लाइनों में खड़े हैं। पंप कर्मचारी दिन-रात काम करने और बढ़ती भीड़ के दबाव के कारण शारीरिक व मानसिक रूप से टूट चुके हैं।
  • सुरक्षा का अभाव: संघ ने आरोप लगाया कि सरकार और जिला प्रशासन सुरक्षा के मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे हैं। ठाकुरगाँव जैसी जगहों पर तेल भरवाने के विवाद में हुई हत्याओं ने मालिकों में डर पैदा कर दिया है।
  • कालाबाजारी का बोलबाला: शिकायतें मिली हैं कि कुछ लोग दिन में 10-10 बार तेल भरवाकर उसे बाहर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों को ईंधन नहीं मिल पा रहा है।
  • आपातकालीन सेवाओं पर संकट: स्थिति इतनी गंभीर है कि ईद जैसी पूर्व संध्या पर कई पंप एम्बुलेंस के लिए 200 लीटर तेल भी आरक्षित नहीं रख पाए।

ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम और ईरान का ‘सुसाइडल’ पलटवार

युद्ध की आग तब और भड़क गई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने का आदेश दिया। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अनुपालन न करने की स्थिति में अमेरिका ईरानी पावर प्लांट्स पर बमबारी शुरू कर देगा।

ईरान का करारा जवाब: ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघारी ने सरकारी टेलीविजन पर ट्रंप को ‘आतंकवादी राष्ट्रपति’ संबोधित करते हुए कहा कि यदि हमला हुआ तो:

  1. हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और तब तक नहीं खुलेगा जब तक ईरान के पावर प्लांट दोबारा नहीं बन जाते।
  2. इजरायल के ऊर्जा और आईटी बुनियादी ढांचे को व्यापक रूप से निशाना बनाया जाएगा।
  3. क्षेत्र में स्थित उन सभी कंपनियों को नष्ट कर दिया जाएगा जिनमें अमेरिकी हिस्सेदारी है।
  4. अमेरिकी ठिकानों की मेजबानी करने वाले क्षेत्रीय देशों के पावर प्लांट ‘वैध सैन्य लक्ष्य’ होंगे।

कतर पर हमला और वैश्विक तेल की कीमतें $100 के पार

ईरान ने केवल धमकियां ही नहीं दी हैं, बल्कि कार्रवाई भी शुरू कर दी है। कतर के रास लफ़ान (Ras Laffan) एलएनजी सुविधा पर ईरानी हमलों ने वैश्विक गैस आपूर्ति को हिलाकर रख दिया है। कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी के अनुसार, इन हमलों से देश के 17% एलएनजी निर्यात को नुकसान पहुंचा है, जिसे ठीक करने में 5 साल और $26 बिलियन का खर्च आ सकता है।

वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। चूंकि दुनिया का 20% तेल और एलएनजी हॉर्मुज के रास्ते गुजरता है, इसलिए इस मार्ग के बाधित होने का मतलब है—वैश्विक अंधेरा।


अमेरिका का युद्ध रुख: ‘पैसे की कमी नहीं’

जहाँ दुनिया शांति की अपील कर रही है, वहीं अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने एक विवादास्पद बयान में कहा है कि अमेरिका के पास “युद्ध पर खर्च करने के लिए बहुत पैसा है।” पेंटागन ने भविष्य की सैन्य क्षमताओं के लिए 200 बिलियन डॉलर के पूरक बजट की मांग की है। हालांकि, अमेरिका के भीतर ही डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन इस भारी खर्च का विरोध कर रहे हैं।


ईरान के भीतर की स्थिति: मौत का तांडव और इंटरनेट ब्लैकआउट

ईरान के भीतर भी हालात सामान्य नहीं हैं।

  • मानवीय क्षति: ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक 201 बच्चों सहित सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। लगभग 81,000 इमारतें अमेरिकी-इजरायली हमलों में क्षतिग्रस्त हुई हैं।
  • सेंसरशिप: ईरान में पिछले 23 दिनों से इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है। सरकार ने उन पत्रकारों और मशहूर हस्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है जो युद्ध की स्वतंत्र रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
  • जासूसी के आरोप: ईरान ने अमेरिकी और इजरायली सेना के लिए जासूसी करने के आरोप में 23 लोगों को गिरफ्तार किया है।

निष्कर्ष: क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?

लेबनान में मरने वालों की संख्या 1,029 तक पहुंच गई है और इजरायल के परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास ईरानी मिसाइलें गिरने से तनाव अपने चरम पर है। यदि कूटनीतिक प्रयास जल्द सफल नहीं हुए, तो पेट्रोल की किल्लत केवल बांग्लादेश की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि यह एक वैश्विक आर्थिक महामंदी और महायुद्ध का कारण बन सकती है।