इजरायल-अमेरिका चोर-चोर मौसेरे भाई, ईरान को हराना नामुमकिन: बाबा रामदेव
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विशेष रिपोर्ट: मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
अंतरराष्ट्रीय योग गुरु बाबा रामदेव अपने योग और आयुर्वेद के अभियानों के लिए तो सदैव चर्चा में रहते हैं, लेकिन हाल ही में एक राष्ट्रीय समाचार चैनल पर उनके द्वारा दिए गए बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैचारिक गलियारों में एक नया ‘चक्रव्यूह’ रच दिया है। न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया के कार्यक्रम ‘चक्रव्यूह’ में पत्रकारों के तीखे सवालों का सामना करते हुए बाबा रामदेव ने जिस बेबाकी से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर अपनी राय रखी, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही लगभग दो मिनट की इस क्लिपिंग ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या एक आध्यात्मिक गुरु का वैश्विक राजनीति को देखने का नजरिया पारंपरिक राजनेताओं से कहीं अधिक गहरा और मानवीय है?
‘चोर-चोर मौसेरे भाई’: अमेरिका और इजरायल पर तीखा तंज
साक्षात्कार के दौरान जब बाबा रामदेव से इजरायल और अमेरिका के गठबंधन पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कबीर की साखियों जैसी स्पष्टता के साथ उत्तर दिया। उन्होंने कहा, “इजरायल और अमेरिका, दोनों चोर-चोर मौसेरे भाई हैं।” जब इस मुहावरे पर एंकर ने उन्हें टोकते हुए पूछा कि क्या वह बेंजामिन नेतन्याहू को चोर कह रहे हैं, तो रामदेव ने स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति विशेष को चोर नहीं कह रहे, बल्कि यह एक कहावत है जिसका अर्थ है कि इन दोनों की नीतियां और कृत्य एक जैसे ही विनाशकारी हैं।
बाबा रामदेव यहीं नहीं रुके। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि ये दोनों देश केवल युद्ध के मैदान में प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं, बल्कि ये ‘युद्ध अपराधी’ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर मानवता, प्रकृति और पर्यावरण के खिलाफ अपराध किया है। उनके अनुसार, इन दोनों देशों ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अविश्वास का एक ऐसा ‘हिमालय’ खड़ा कर दिया है, जिसे ढहाने में दुनिया को दशकों लग जाएंगे।
ईरान का ‘मोहम्मदी’ जज्बा और शिया समुदाय की शक्ति
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव पर टिप्पणी करते हुए बाबा रामदेव काफी भावुक नजर आए। उन्होंने ईरान के प्रति अपने सम्मान को साझा करते हुए कहा कि भले ही वह ईरान के भूगोल और राजनीति के बारे में बहुत अधिक न जानते हों, लेकिन वह वहां के लोगों के आध्यात्मिक जज्बे से परिचित हैं।
उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा, “ईरानी लोग पैगंबर मोहम्मद साहब के खानदान के असली वारिस हैं, जिन्हें शिया कहा जाता है। इनको कोई झुका नहीं सकता, इनको कोई हरा नहीं सकता।” रामदेव का तर्क था कि शिया समुदाय के भीतर अपने आदर्शों के प्रति जो समर्पण है, वह उन्हें किसी भी सैन्य शक्ति से ऊपर ले जाता है।
विचारधारा की जीत: खामेनेई और ईरानी आवाम
जब उनसे आयतुल्लाह अली खामेनेई की संभावित हत्या या इजरायली आक्रामकता पर सवाल हुआ, तो रामदेव ने एक दार्शनिक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “आप किसी व्यक्ति को मार सकते हैं, लेकिन उसके जज्बे, शौर्य, उसके विचार, दर्शन और उसके स्वाभिमान को कभी नहीं मार सकते।”
ईरान की लगभग 10 करोड़ की आबादी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां कम से कम एक करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो खामेनेई के विचारों को अपने ‘रोम-रोम’ में जीते हैं। उनके अनुसार, जब कोई विचार किसी देश के अस्तित्व के साथ इस तरह जुड़ जाए, तो उसे दुनिया की कोई भी सेना या परमाणु बम खत्म नहीं कर सकता। उन्होंने अमेरिका की इस युद्धप्रिय नीति को ‘राजनीतिक अपरिपक्वता’ करार दिया।
ऐतिहासिक चेतावनी: “इजरायल-अमेरिका कभी जीत नहीं सकते”
एक संन्यासी और ‘वैश्विक नागरिक’ की हैसियत से अपनी बात रखते हुए बाबा रामदेव ने एक बड़ी भविष्यवाणी की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस युद्ध में इजरायल और अमेरिका की जीत असंभव है।
“मैं एक संन्यासी के तौर पर कह रहा हूं—इस युद्ध में इजरायल और अमेरिका जीत नहीं सकते और ईरान हार नहीं सकता।” उनका मानना है कि इस युद्ध का खामियाजा इजरायल और अमेरिका को अगले 50 से 100 सालों तक भुगतना पड़ेगा। उन्होंने इसे केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि मानवता के प्रति एक अपराध बताया, जिसकी भरपाई भविष्य में बहुत महंगी पड़ेगी।
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— NDTV India (@ndtvindia) March 27, 2026
निष्कर्ष: एक संन्यासी का वैश्विक दृष्टिकोण
बाबा रामदेव के ये बयान दर्शाते हैं कि वह वैश्विक राजनीति को केवल आंकड़ों और हथियारों के नजरिए से नहीं, बल्कि संस्कृति, वंश और वैचारिक दृढ़ता के नजरिए से देख रहे हैं। ईरान को ‘मोहम्मद साहब के वंशज’ के रूप में पहचान देना और उनके प्रतिरोध को ‘स्वाभिमान की लड़ाई’ बताना, भारत के एक प्रमुख हिंदू आध्यात्मिक गुरु की ओर से दिया गया एक बहुत बड़ा संदेश है।
यह साक्षात्कार केवल एक वायरल वीडियो भर नहीं है, बल्कि यह पश्चिम के सैन्य अहंकार को पूर्व के आध्यात्मिक और वैचारिक प्रतिरोध की एक खुली चुनौती है।

