ईरान युद्ध का पांचवां हफ्ता: ट्रम्प की नजर तेल पर, कुवैत में भारतीय की मौत और हॉर्मुज़ संकट
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नई दिल्ली/तेहरान/वाशिंगटन | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा संघर्ष अब एक पूर्ण विकसित क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान और ईरान के पलटवार ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। युद्ध के पांचवें हफ्ते में प्रवेश करते ही रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
ट्रम्प का बड़ा बयान: “हमें ईरान का तेल चाहिए”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक साक्षात्कार में अपनी मंशा साफ करते हुए कहा है कि वह “ایران के तेल पर कब्जा करना चाहते हैं।” ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन सार्वजनिक रूप से बातचीत का दिखावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। तेहरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह शांति वार्ता की आड़ में जमीनी हमले (Ground Attack) की योजना बना रहा है।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कड़े शब्दों में कहा, “हमारे जवान जमीन पर अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें आग के हवाले किया जा सके और उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को हमेशा के लिए सजा दी जा सके।”
कुवैत में भारतीय नागरिक की मौत और क्षेत्रीय तनाव
इस युद्ध की आंच अब पड़ोसी खाड़ी देशों तक पहुंच गई है। कुवैत सरकार ने पुष्टि की है कि ईरान द्वारा एक बिजली और जल विलवणीकरण (Desalination) संयंत्र पर किए गए हमले में एक भारतीय कर्मचारी की जान चली गई है। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध में निर्दोष विदेशी कामगार भी निशाना बन रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई 16 बैलिस्टिक मिसाइलों और 42 ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया है।
ऊर्जा ठिकानों पर भीषण हमले: अंधेरे में डूबा तेहरान
इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों ने ईरान के ऊर्जा ढांचे को तहस-नहस कर दिया है।
- तेहरान में ब्लैकआउट: ईरान के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, बिजली केंद्रों पर हमलों के बाद राजधानी तेहरान और अलबोर्ज़ प्रांत में भारी बिजली कटौती हुई है।
- पेट्रोकेमिकल प्लांट तबाह: तबरीज़ में एक बड़े पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया गया है।
- इजरायल का पलटवार: इजरायली सेना ने तेहरान में हथियार विकास केंद्रों पर 120 से अधिक युद्धक सामग्री गिराने का दावा किया है।
जवाब में, ईरानी सेना ने दक्षिणी इजरायल के नियोत होवाव औद्योगिक क्षेत्र को निशाना बनाया, जहाँ ‘अदामा’ नामक कीटनाशक कारखाने पर मिसाइल गिरी। यहाँ खतरनाक रसायनों के रिसाव का डर पैदा हो गया है, जो पर्यावरण के लिए बड़ी तबाही ला सकता है।
शिक्षा संस्थानों पर हमला: दहकते विश्वविद्यालय
युद्ध की विभीषिका से शिक्षण संस्थान भी अछूते नहीं हैं। इस्फ़हान विश्वविद्यालय पर दूसरी बार हवाई हमला हुआ है। ईरान के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक 250 छात्र और शिक्षक मारे जा चुके हैं और लगभग 600 शैक्षणिक सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि वे इसके बदले में क्षेत्र के दो अमेरिकी या इजरायली विश्वविद्यालयों को निशाना बनाएंगे।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
दुनिया की नजरें अब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरानी नौसेना कमांडरों का दावा है कि इस समुद्री रास्ते पर उनका पूर्ण नियंत्रण है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना करीब आई, तो उन्हें तटीय मिसाइल प्रणालियों से नष्ट कर दिया जाएगा।
वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों के युद्ध में शामिल होने से ‘बाब अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य पर भी खतरा बढ़ गया है। यदि ये दोनों रास्ते बंद होते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है और तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
शांति की कोशिशें: इस्लामाबाद में बैठक
बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने इस्लामाबाद में आपातकालीन बैठक की है। इन देशों ने युद्ध को रोकने और तनाव कम करने के लिए एक ‘डी-एस्केलेशन’ मार्ग बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
मानवीय त्रासदी: बढ़ता मौत का आंकड़ा
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक 2,076 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 216 मासूम बच्चे शामिल हैं। आवासीय क्षेत्रों पर हमलों से हजारों लोग बेघर हो गए हैं। ओसमावंदन गांव में हुए हमले में एक साथ पांच घर तबाह हो गए, जिसमें छह नागरिकों की जान चली गई।
निष्कर्ष: पत्रकार का विश्लेषण
यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं रहा, बल्कि एक वैश्विक आपदा बन चुका है। ट्रम्प द्वारा ईरान के संसाधनों (तेल) पर कब्जा करने की बात कहना आग में घी डालने जैसा है। हॉर्मुज़ और बाब अल-मंडेब जैसे चोकपॉइंट्स पर तनाव का मतलब है कि आने वाले दिनों में पूरी दुनिया को गंभीर ऊर्जा संकट और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत हस्तक्षेप कर इस विनाशकारी युद्ध को रोकना होगा, वरना इतिहास इसे एक बड़ी विफलता के रूप में याद रखेगा।
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