Culture

शार्क टैंक वाली नमिता थापर ने किया नमाज के विज्ञान का जिक्र, इंटरनेट के ‘ठेकेदारों’ को लगी मिर्ची

 मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

शार्क टैंक इंडिया की मशहूर जज और एमक्योर फार्मास्युटिकल्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नमिता थापर इन दिनों सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका कोई बिजनेस इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि एक इंस्टाग्राम वीडियो है। नमिता ने अपनी सहेलियों के साथ ईद मनाई और नमाज के शारीरिक फायदों पर चर्चा की। बस इतनी सी बात इंटरनेट के स्वयंभू रक्षकों को चुभ गई। देखते ही देखते उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जाने लगा।

क्या था पूरा मामला?

नमिता थापर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने बताया कि शनिवार को वह अपने कुछ दोस्तों के साथ ईद सेलिब्रेट करने गई थीं। वहां स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर चर्चा छिड़ गई। नमिता जो खुद फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं, उन्हें उनके दोस्तों ने नमाज के वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में बताया।

नमिता ने वीडियो में वही बातें दोहराईं जो उनके दोस्तों ने उनसे कही थीं। उनके दोस्तों का तर्क था कि नमाज केवल एक धार्मिक इबादत ही नहीं, बल्कि एक ‘फुल बॉडी एक्सरसाइज’ भी है। इससे शरीर में लचीलापन आता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है और पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है। साथ ही, दिन में पांच बार काम से ब्रेक मिलने से मानसिक शांति और सामूहिक नमाज से सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है।

नफरत फैलाने वालों का ‘लो लेवल’ हमला

नमिता थापर ने अपनी तरफ से नमाज पर कोई धार्मिक टिप्पणी नहीं की थी। उन्होंने सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी फायदों का जिक्र किया। लेकिन ट्रोलर्स को तो बस बहाना चाहिए था। ‘LOL Patrol’ जैसे कुछ यूट्यूब चैनलों ने इस मुद्दे को पकड़ लिया। उन्होंने नमिता के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और ओछी टिप्पणी की।

वीडियो में नमिता को ‘कॉमेडियन’ कहा गया। उनके बिजनेस करियर और शार्क टैंक में उनके निवेश करने के तरीकों पर तंज कसे गए। हद तो तब हो गई जब उनके व्यक्तिगत राजनीतिक झुकाव को लेकर भी बातें बनाई जाने लगीं। इन यूट्यूबर्स ने न केवल नमिता का मजाक उड़ाया, बल्कि नमाज जैसे संवेदनशील विषय पर भी अभद्र टिप्पणी की। वीडियो में कुछ पुराने क्लिप्स का सहारा लेकर नमाज पढ़ने वालों के पहनावे का मजाक उड़ाया गया, जो सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है।

योग बनाम नमाज का बेतुका विवाद

ट्रोलर्स का एक बड़ा तर्क यह था कि नमिता ने योग की तारीफ क्यों नहीं की। यह तर्क पूरी तरह से बचकाना और नफरत से भरा लगता है। किसी एक चीज की तारीफ करने का मतलब यह कतई नहीं होता कि आप दूसरी चीज का अपमान कर रहे हैं। नमिता ने कभी नहीं कहा कि योग खराब है। उन्होंने तो बस उस चर्चा को साझा किया जो उनके दोस्तों के बीच हुई थी।

हकीकत यह है कि नमाज की मुद्राओं (रुक्कू और सजदा) के शारीरिक लाभों पर दुनिया भर में कई शोध हुए हैं। कई वैज्ञानिक शोध यह साबित कर चुके हैं कि ये मुद्राएं रीढ़ की हड्डी और जोड़ों के लिए फायदेमंद हैं। लेकिन जब चश्मा नफरत का हो, तो विज्ञान और तर्क कहीं पीछे छूट जाते हैं।

पत्रकारिता के नाम पर परोसी जा रही गंदगी

आजकल कुछ यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया हैंडल केवल व्यूज पाने के लिए किसी भी हद तक गिर जाते हैं। नमिता थापर जैसे सफल उद्यमियों को निशाना बनाकर वे अपनी दुकान चलाना चाहते हैं। इस पूरे विवाद में नमिता की बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। ऐसा दिखाया गया जैसे वह नमाज का प्रचार कर रही हों, जबकि वह सिर्फ स्वास्थ्य चर्चा का एक हिस्सा था।

इस तरह की ट्रोलिंग न केवल व्यक्ति की निजता पर हमला है, बल्कि समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश भी है। नमिता थापर ने हमेशा महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य के मुद्दों पर खुलकर बात की है। उन्हें इस तरह से ‘हिंदू विरोधी’ घोषित कर देना न केवल गलत है, बल्कि अनैतिक भी है।

निष्कर्ष: सच बनाम प्रोपेगेंडा

नमिता थापर का विवाद यह साफ करता है कि आज के दौर में कुछ लोग किसी भी सकारात्मक चर्चा को विवाद का रूप देने में माहिर हैं। नमिता ने नमाज के बहाने सिर्फ फिटनेस की बात की थी। उनके दोस्तों ने उन्हें जो बताया, उन्होंने वही साझा किया। इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था।

जरूरत इस बात की है कि हम इंटरनेट पर मौजूद इस ‘ट्रॉल आर्मी’ की असलियत को समझें। किसी के खिलाफ जहर उगलने से पहले तथ्यों की जांच करना जरूरी है। नमिता थापर एक बिजनेस आइकन हैं और उनके खिलाफ इस तरह की घटिया कमेंट्री करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। समाज को यह सोचने की जरूरत है कि क्या हम इतने असहिष्णु हो गए हैं कि स्वास्थ्य पर होने वाली एक सामान्य चर्चा भी हमें बर्दाश्त नहीं है?

नफरत फैलाने वाले भले ही चिल्लाते रहें, लेकिन सच यही है कि नमिता ने केवल एक नया नजरिया पेश किया था। इसे सांप्रदायिक रंग देना ट्रोलर्स की अपनी कुंठा को दर्शाता है।