राजस्थान में बढ़ा मुस्लिम IAS अफसरों का दबदबा: महत्वपूर्ण जिलों की मिली कमान
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अशफाक कायममखानी,जयपुर
राजस्थान की प्रशासनिक मशीनरी में इन दिनों एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश की भजनलाल सरकार के कार्यकाल में मुस्लिम आईएएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी सौंपने का सिलसिला जारी है। हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद भरतपुर और सलूंबर जैसे जिलों की कमान मुस्लिम कलेक्टरों के हाथ में दी गई है। यह बदलाव उन चर्चाओं को विराम दे रहा है जिनमें माना जा रहा था कि भाजपा सरकार में मुस्लिम अफसरों को मुख्यधारा से दूर रखा जा सकता है।
नए जिलों में अनुभवी हाथों को कमान
ताजा नियुक्तियों में कमरुल जमन चौधरी को भरतपुर का जिला कलेक्टर बनाया गया है। वह इससे पहले दौसा और सीकर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसी तरह मोहम्मद जुनैद पीपी को सलूंबर जिले के कलेक्टर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मोहम्मद जुनैद मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं और यूपीएससी के जरिए सीधे भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर राजस्थान कैडर में आए हैं।

प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन तैनातियों को योग्यता और अनुभव के आधार पर देखा जा रहा है। अधिकारियों की एक मजबूत लॉबी उभर कर सामने आ रही है जो राज्य के विकास में अहम भूमिका निभा रही है।
इतिहास के झरोखे से प्रशासनिक सफर
राजस्थान के गठन के समय से ही मुस्लिम अधिकारियों का प्रदेश की सेवा में बड़ा योगदान रहा है। रियासतों के विलय के दौर में अलाउद्दीन खिलजी और रहमत अली जाफरी जैसे छह प्रमुख अधिकारी विभिन्न जिलों के कलेक्टर रहे थे। उनके बाद से ही यूपीएससी और राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से प्रमोट होकर आईएएस बनने का सिलसिला बना हुआ है।
प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में सलाउद्दीन अहमद खान का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वह उत्तर प्रदेश से आकर राजस्थान कैडर में शामिल हुए और अपनी काबिलियत के दम पर राज्य के मुख्य सचिव के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। उनके बाद अतर आमिर और अब कमरुल जमन चौधरी जैसे युवा अधिकारी इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

वर्तमान में सक्रिय प्रमुख चेहरे
वर्तमान में राजस्थान में कई मुस्लिम आईएएस अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर से आए कमरुल जमन चौधरी और अतर आमिर के अलावा केरल के मोहम्मद जुनैद पीपी प्रमुख हैं। सीधी भर्ती वाले इन अफसरों के साथ-साथ राजस्थान प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर आईएएस बने इकबाल खान और शाहीन खान भी शासन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पूर्व में जे.एम. खान, एम.एस. खान, ए.आर. खान, अशफाक हुसैन, मोहम्मद हनीफ और शफी मोहम्मद जैसे अधिकारियों ने भी विभिन्न जिलों में कलेक्टर रहकर जनता की सेवा की है। जाकिर हुसैन और यू.डी. खान जैसे नाम भी इसी फेहरिस्त का हिस्सा रहे हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा और भविष्य की राह
वरिष्ठ पत्रकारों और जानकारों का मानना है कि इन अधिकारियों की सफलता समाज में एक सकारात्मक संदेश भेज रही है। हालांकि राजस्थान कैडर में मुस्लिम आईएएस अधिकारियों की संख्या अभी भी उंगलियों पर गिनी जा सकती है। लेकिन जिस रफ्तार से नए चेहरे सामने आ रहे हैं उससे उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यह तादाद बढ़ेगी।
प्रशासनिक पदों पर इस तरह की नियुक्तियों से मुस्लिम समाज के युवाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति रुझान बढ़ रहा है। यदि यह गति बरकरार रहती है तो प्रदेश और देश की सेवा के लिए अधिक कुशल नेतृत्व तैयार हो सकेगा। सरकार का यह रुख दर्शाता है कि प्रशासनिक कार्यक्षमता और अनुभव किसी भी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर है। संतुलित नियुक्तियों से न केवल प्रशासन में विविधता आती है बल्कि शासन व्यवस्था भी अधिक समावेशी नजर आती है।

