Uttar pradesh muslims success story : सरहद की निगहबान और ‘ड्रोन किलर’ हैं कैप्टन सारिया अब्बासी
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मुस्लिम नाउ विशेष
कामयाबी कभी विरासत में नहीं मिलती, उसे हौसलों और पसीने से सींचना पड़ता है। ‘मुस्लिम नाउ’ की खास सीरीज ‘मुस्लिम सक्सेज स्टोरी’ में आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं उत्तर प्रदेश की उस जांबाज बेटी से, जिसने लैब की सफेद कोट छोड़कर सरहद की जैतून की वर्दी चुनी और आज चीन सीमा पर देश की ढाल बनी हुई हैं। यह कहानी है गोरखपुर की कैप्टन सारिया अब्बासी की।
अरुणाचल की पहाड़ियों में गूंजता एक नाम
गोरखपुर के राम जानकी नगर की तंग गलियों से निकलकर कैप्टन सारिया आज अरुणाचल प्रदेश की दुर्गम पहाड़ियों में तैनात हैं। जहाँ ऑक्सीजन कम और चुनौतियां ज्यादा हैं, वहाँ सारिया L-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन की कमान संभालती हैं। उन्हें सेना में ‘ड्रोन किलर’ के रूप में जाना जाता है। तकनीक और बहादुरी के इस संगम ने उन्हें भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति का एक भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।
जेनेटिक इंजीनियरिंग से ‘वॉर ज़ोन’ तक का सफर
सारिया का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक मेधावी छात्रा के रूप में उन्होंने IMS गाजियाबाद से जेनेटिक इंजीनियरिंग में बी.टेक किया। उनके पास कॉरपोरेट जगत के शानदार ऑफर थे, विदेश जाकर करियर बनाने के मौके थे, लेकिन उनकी आंखों में बचपन से ही सेना की वर्दी का ख्वाब पलता था।
उनके पिता, आकाशवाणी के वरिष्ठ प्रसारक डॉ. तहसीन अब्बासी और शिक्षिका मां रेहाना शमीम ने अपनी बेटी के पंखों को कभी बांधा नहीं। सारिया कहती हैं, “मैं खुद को दफ्तर की चारदीवारी में नहीं देख सकती थी, मेरा दिल हमेशा देश की मिट्टी के लिए धड़कता था।”

संघर्ष और सफलता: जब खुद को साबित किया
सेना में जाना आसान नहीं था। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की CDS परीक्षा में महिलाओं के लिए मात्र 12 सीटें थीं। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन सारिया के इरादे फौलादी थे। दूसरे प्रयास में उन्होंने न केवल सफलता हासिल की, बल्कि ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), चेन्नई के कठिन प्रशिक्षण को भी पार किया। 9 सितंबर 2017 को जब उन्होंने पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया, तो वह पल केवल एक परिवार की जीत नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच के बदलने का गवाह बना।
एलएसी पर ‘ड्रोन किलर’ का खौफ
अक्टूबर 2021 में जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव चरम पर था, तब कैप्टन सारिया एयर डिफेंस की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनकी यूनिट की कमान जिस L-70 गन के हाथ में है, उसे हाल ही में अपग्रेड कर लेजर और ऑप्टिकल रडार से लैस किया गया है। यह गन अब दुश्मन के आधुनिक ड्रोन्स को पलक झपकते ही खाक करने की क्षमता रखती है।
एक मिसाल, एक पैगाम
कैप्टन सारिया आज उन हजारों लड़कियों के लिए एक जलती हुई मशाल हैं, जो छोटे शहरों में रहकर बड़े सपने देखती हैं। उनके छोटे भाई तम्सिल अहमद अब्बासी गर्व से कहते हैं कि उनकी बहन ने यह साबित कर दिया कि बहादुरी का कोई जेंडर नहीं होता।
सारिया का संदेश साफ है: “अगर दिल में जज्बा और हौसले की चिंगारी है, तो रास्ते खुद-ब-खुद बनते चले जाते हैं।” आज वह सिर्फ आसमान की रक्षक नहीं हैं, बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए उम्मीद का वह आसमान हैं, जिसकी कोई सीमा नहीं है।

