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ईरान-इज़राइल युद्ध का असर: महंगी होंगी हवाई यात्राएं, जेट ईंधन संकट से बढ़े किराए

दुबई/नई दिल्ली:

अगर आप इस गर्मी में विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, खासकर मध्य पूर्व, यूरोप, अमेरिका या एशिया की उड़ानों के लिए टिकट बुक करने का विचार कर रहे हैं, तो आपकी जेब पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक एविएशन सेक्टर को झकझोर दिया है। इसका सीधा असर अब आम यात्रियों पर दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में एयरफेयर यानी हवाई किराए में फिर से बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेट फ्यूल की कीमतों में 121 प्रतिशत से अधिक की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। यही नहीं, कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में भी करीब 77 प्रतिशत उछाल आया है। ऐसे में एयरलाइंस कंपनियों के लिए विमान संचालन पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। विमानन उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि एयरलाइंस इन बढ़ती लागतों का बोझ सीधे यात्रियों पर डाल रही हैं, जिसके चलते फ्लाइट टिकट की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं।

जेट फ्यूल संकट से क्यों महंगी हो रही उड़ानें?

एविएशन इंडस्ट्री में सबसे बड़ा खर्च विमान के ईंधन पर होता है। विमान उड़ाने के कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) या जेट फ्यूल पर निर्भर करता है। अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष के कारण तेल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, समुद्री व्यापार मार्गों पर जोखिम बढ़ा है और तेल निर्यात को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है। इसका परिणाम यह हुआ कि एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट अचानक कई गुना बढ़ गई।

अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जेट ईंधन की कीमतों में साल-दर-साल आधार पर 121.1 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ तो अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट टिकट और महंगे हो सकते हैं, खासकर लंबी दूरी की उड़ानों पर।

IATA के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा कि अप्रैल में जेट फ्यूल की लागत दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गई, जिससे एयरफेयर पर दबाव बना है। एयरलाइंस अब सीमित सीटें उपलब्ध करा रही हैं और लागत संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं।

मिडिल ईस्ट की उड़ानों पर सबसे ज्यादा असर

मध्य पूर्व लंबे समय से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण एविएशन हब माना जाता है। दुबई, अबू धाबी, दोहा और रियाद जैसे शहर अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट का बड़ा केंद्र हैं। लेकिन युद्ध की वजह से कई एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े। कुछ उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा, जिससे ईंधन की खपत और बढ़ गई।

अप्रैल 2026 के दौरान मिडिल ईस्ट एयरलाइंस की यात्री मांग में 46.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मार्च में यह गिरावट करीब 59 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, इसलिए विशेषज्ञ इसे धीरे-धीरे सुधार का संकेत भी मान रहे हैं।

यात्रियों की संख्या घटने के बावजूद किराए कम नहीं हो रहे क्योंकि एयरलाइंस की परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है। कम सीटें, ज्यादा खर्च और अनिश्चित मांग—इन तीनों कारणों ने हवाई यात्रा को पहले से कहीं अधिक महंगा बना दिया है।

यूरोप और एशिया रूट पर बढ़ सकता है दबाव

मध्य पूर्व के ऊपर से गुजरने वाले एयर कॉरिडोर प्रभावित होने के कारण कई यूरोपीय और एशियाई उड़ानों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे उड़ान का समय बढ़ रहा है और ईंधन की खपत भी ज्यादा हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत से दुबई, यूरोप, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले यात्रियों को आने वाले हफ्तों में टिकट की कीमतों में अतिरिक्त बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर गर्मियों और त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने के कारण किराए और ऊंचे रह सकते हैं।

हालांकि, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यात्रा मांग मजबूत बनी हुई है। रिकॉर्ड 87.5 प्रतिशत लोड फैक्टर के साथ एयरलाइंस ने अप्रैल में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन चीन-जापान मार्गों पर राजनीतिक तनाव के चलते यात्री संख्या में कुछ गिरावट देखी गई।

UAE में सामान्य हो रही उड़ानें, लेकिन खर्च बढ़ा

युद्ध के शुरुआती महीनों में UAE के एयरस्पेस और संचालन पर एहतियाती प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन अब हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं। 2 मई 2026 से संयुक्त अरब अमीरात में एयर ट्रैफिक संचालन पूरी तरह बहाल कर दिया गया है।

दुबई स्थित प्रमुख एयरलाइन एमिरेट्स अब 72 देशों के 137 गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित कर रही है। वहीं एतिहाद एयरवेज मध्य पूर्व, एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका सहित करीब 80 गंतव्यों के लिए सेवाएं दे रही है।

इसके बावजूद यात्रियों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही, क्योंकि महंगा जेट फ्यूल, सीमित उड़ानें और बढ़ती परिचालन लागत टिकट की कीमतों को ऊपर बनाए हुए हैं।

यात्रियों के लिए क्या है सलाह?

ट्रैवल एजेंट्स और एविएशन एक्सपर्ट्स यात्रियों को सलाह दे रहे हैं कि अगर वे आने वाले महीनों में यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो कम से कम एक से दो महीने पहले टिकट बुक कर लें। शुरुआती बुकिंग करने पर किराए अपेक्षाकृत कम मिल सकते हैं।

इसके अलावा यात्रियों को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे फ्लेक्सिबल ट्रैवल डेट्स रखें, अलग-अलग एयरलाइंस की कीमतों की तुलना करें और ऑफ-पीक दिनों में यात्रा की योजना बनाएं। क्योंकि जैसे-जैसे तेल संकट और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ेगा, एयरफेयर पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है।

क्या आगे और महंगी होंगी फ्लाइट्स?

एविएशन सेक्टर के जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। यह वैश्विक हवाई यात्रा, एयरलाइन उद्योग, पर्यटन क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल संकेत यही हैं कि 2026 की गर्मियों में विदेश यात्रा पहले के मुकाबले कहीं अधिक महंगी साबित हो सकती है। ऐसे में यात्रियों के लिए समय रहते टिकट बुक करना और यात्रा बजट पहले से तैयार रखना सबसे समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।

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