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हज 2026 के बाद मक्का में लौटी बाजारों की रौनक

मक्का मुकर्रमा:

हज 2026 के अंतिम चरण में मक्का मुकर्रमा एक बार फिर रौनक से भर उठा है। कुछ दिन पहले तक जो सड़कें और बाजार हाजियों के मिना और मुज़दलिफा रवाना होने के कारण शांत दिखाई दे रहे थे, अब वहां फिर से चहल पहल लौट आई है। दुनिया भर से आए लाखों हाजी अब अपने वतन लौटने से पहले खरीदारी में व्यस्त नजर आ रहे हैं। इसी बीच मक्का के आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय घटना ने भी लोगों का ध्यान खींचा, जब सूरज लगभग सीधे खाना ए काबा के ऊपर दिखाई दिया।

हज के अहम अरकान पूरे होने के बाद बड़ी संख्या में हाजी तीसरे दिन की रमी के बाद मक्का पहुंचे। इसके बाद बाजारों में अचानक भीड़ बढ़ गई। कई लोग अपने परिवार और दोस्तों के लिए तोहफे खरीदते दिखे। वहीं कुछ हाजी मक्का की ऐतिहासिक जगहों की जियारत में व्यस्त नजर आए।

हाजियों की खरीदारी से मक्का के बाजार गुलजार

हज के दौरान मक्का के कई इलाके खाली हो जाते हैं क्योंकि अधिकतर हाजी मिना, अराफात और मुज़दलिफा में इबादत में व्यस्त रहते हैं। लेकिन जैसे ही हज की मुख्य रस्में पूरी होती हैं, लोग वापस मक्का लौट आते हैं और बाजारों में रौनक बढ़ जाती है।

इस साल भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मक्का के पुराने और मशहूर बाजारों में हाजियों की भारी भीड़ रही। दुकानों पर सबसे ज्यादा खरीदारी जायनमाज, तस्बीह, अरबी इत्र, महिलाओं के अबाया, बच्चों के कपड़े, खजूर और अरबी थौब की देखी गई।

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया से आए हाजी खास तौर पर अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए उपहार खरीदते नजर आए। कई लोगों का कहना था कि हज का सफर सिर्फ इबादत तक सीमित नहीं होता, बल्कि अपनों के लिए यादगार तोहफे ले जाना भी इस सफर का हिस्सा माना जाता है।

कुछ हाजी ऐसे भी मिले जिनकी वापसी सीधे मक्का से होनी है। इसलिए उन्होंने यहीं खरीदारी पूरी करने को प्राथमिकता दी। वहीं जिन लोगों को मदीना मुनव्वरा जाना है, उनका कहना है कि वे वहां से भी अपने परिवार के लिए तोहफे खरीदेंगे।

जियारत स्थलों पर भी उमड़ी भीड़

खरीदारी के साथ साथ बड़ी संख्या में हाजी मक्का की ऐतिहासिक और धार्मिक जगहों की जियारत के लिए भी पहुंचे। खास तौर पर गारे हिरा, जबल ए सौर, मस्जिद अल खैफ और मस्जिद अल बैअह में लोगों की भीड़ देखने को मिली।

गारे हिरा वह जगह है जहां इस्लामी मान्यताओं के अनुसार पहली वही नाजिल हुई थी। वहीं जबल ए सौर का भी इस्लामी इतिहास में खास महत्व माना जाता है।

मस्जिद अल बैअह, जिसे मस्जिद अकबा भी कहा जाता है, वादी ए मिना में स्थित एक ऐतिहासिक मस्जिद है। माना जाता है कि इसी स्थान पर मदीना के अंसार ने पैगंबर हजरत मुहम्मद के हाथ पर बैअत की थी। इसलिए हज के दौरान यहां आने वाले हाजियों की संख्या काफी अधिक रहती है।

कई लोग इन ऐतिहासिक स्थलों पर तस्वीरें लेते और वीडियो बनाते दिखाई दिए। मोबाइल फोन में इस रूहानी सफर की यादें सहेजने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।

मक्का के आसमान में दिखी दुर्लभ खगोलीय घटना

इसी बीच मक्का में एक अनोखी खगोलीय घटना ने लोगों को हैरान कर दिया। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजकर 18 मिनट पर सूरज लगभग सीधे खाना ए काबा के ऊपर आ गया।

इस दौरान सूरज की स्थिति इतनी सटीक थी कि काबा और मक्का में खड़ी ऊंची वस्तुओं की छाया लगभग गायब हो गई। वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना साल में केवल दो बार होती है।

जेद्दा एस्ट्रोनॉमी सोसायटी के विशेषज्ञों ने बताया कि सूरज करीब 89.94 डिग्री की ऊंचाई पर था। यानी वह लगभग पूरी तरह काबा के ऊपर था। अंतर केवल 0.06 डिग्री का था।

विशेषज्ञों के अनुसार इस समय दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद मुसलमान सूरज की दिशा देखकर किबला दिशा की जांच कर सकते हैं। यही वजह है कि इस घटना को धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

किबला दिशा जानने का प्राकृतिक तरीका

खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि जब सूरज सीधे काबा के ऊपर होता है, तब पृथ्वी के अलग अलग हिस्सों में खड़े लोग सूर्य की दिशा के आधार पर आसानी से सही किबला निर्धारित कर सकते हैं।

इतिहास में भी इस पद्धति का इस्तेमाल किया जाता रहा है। मध्यकालीन इस्लामी विद्वान दूर देशों में मस्जिदों की दिशा तय करने के लिए इसी तकनीक का उपयोग करते थे।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मक्का पृथ्वी के लगभग 21.4 डिग्री उत्तर अक्षांश पर स्थित है। इसी कारण हर साल मई के अंत और जुलाई के मध्य में सूरज दो बार लगभग सीधे इसके ऊपर पहुंचता है।

गर्मी को लेकर भी फैली चर्चा

इस दुर्लभ घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी शुरू हो गई कि क्या सूरज का सीधे काबा के ऊपर होना मक्का और सऊदी अरब में अत्यधिक गर्मी का कारण बनता है।

हालांकि सऊदी अरब के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने इसे साफ किया। विशेषज्ञों ने कहा कि सूर्य की सीधी किरणों का मतलब यह नहीं कि अत्यधिक गर्मी केवल इसी वजह से हो।

उनके अनुसार तापमान कई चीजों पर निर्भर करता है। इसमें हवा की गति, नमी, वातावरण का दबाव और मौसम की स्थिति अहम भूमिका निभाते हैं।

रूहानी सफर के साथ यादों का खजाना

हज 2026 अब अपने समापन की ओर है। लेकिन हाजियों के लिए यह सफर सिर्फ इबादत का अनुभव नहीं रहा। यह भावनाओं, यादों और आत्मिक सुकून का सफर भी बना।

मक्का के बाजारों में लौटती रौनक, जियारत स्थलों की भीड़ और काबा के ऊपर सूरज का दुर्लभ दृश्य इस बार के हज को कई मायनों में खास बना गया। अब हाजी अपने साथ सिर्फ तोहफे ही नहीं, बल्कि जिंदगी भर की यादें लेकर अपने देशों को लौट रहे हैं।

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