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Assam Muslims Success Story : अर्शेल अख्तर ने साइकिलिंग से बदली असम की पहचान

मुस्लिम नाउ विशेष

कभी एक साधारण शौक के तौर पर शुरू हुई साइकिलिंग आज असम में एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। इस बदलाव के केंद्र में हैं अर्शेल अख्तर। वह शख्स जिसने साइकिल को केवल खेल या फिटनेस का साधन नहीं माना, बल्कि उसे बेहतर शहर, स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित परिवहन का माध्यम बनाने का अभियान शुरू किया। आज अर्शेल अख्तर का नाम असम में साइकिलिंग, टिकाऊ परिवहन, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण जागरूकता के साथ जुड़ चुका है।

अर्शेल अख्तर की कहानी किसी पेशेवर खिलाड़ी की नहीं है। यह एक ऐसे युवा की कहानी है जिसने अपने जुनून को समाज की जरूरतों से जोड़ा और एक नई सोच को जन्म दिया। आज वह केवल साइकिल चालकों के बीच ही लोकप्रिय नहीं हैं, बल्कि गुवाहाटी और असम के आम लोगों के बीच भी एक परिचित चेहरा बन चुके हैं।

अर्शेल का साइकिल से रिश्ता बचपन में शुरू हुआ। जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब उनके पिता ने उन्हें एक साइकिल उपहार में दी। उसी साइकिल ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। स्कूल के दिनों में वह अपने दोस्तों के साथ आसपास के इलाकों की सैर करते थे। नई जगहों को देखना और साइकिल से लंबी दूरी तय करना उन्हें अच्छा लगता था।

समय बीता। पढ़ाई पूरी हुई। वर्ष 2001 में स्नातक करने के बाद उन्होंने नौकरी शुरू की। कामकाजी जीवन की व्यस्तताओं के बीच साइकिलिंग पीछे छूट गई। उन्होंने अपनी पुरानी साइकिल बेच दी और बाद में एक कार खरीद ली। लेकिन कॉर्पोरेट नौकरी और कार वाली जिंदगी उन्हें वह संतोष नहीं दे सकी जिसकी उन्हें तलाश थी।

कुछ वर्षों बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और उद्यमिता की राह चुनी। इसी दौरान वर्ष 2016 में उन्होंने एक बार फिर साइकिल चलाना शुरू किया। शुरुआत में यह सिर्फ एक व्यक्तिगत रुचि थी, लेकिन धीरे धीरे यह एक बड़े उद्देश्य में बदल गई।

अर्शेल ने गुवाहाटी और आसपास के इलाकों की साइकिल यात्राएं शुरू कीं। सप्ताहांत में होने वाली राइड्स में वह दूसरे साइकिल प्रेमियों से मिलने लगे। व्हाट्सएप समूहों और स्थानीय साइकिलिंग समुदायों के जरिए उनका दायरा बढ़ता गया। वर्ष 2017 तक आते आते उन्हें महसूस होने लगा कि साइकिलिंग के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

इसी दौरान उन्होंने जागरूकता कार्यक्रम, सामुदायिक राइड्स, साइकिल रैलियां और चर्चा सत्र आयोजित करने शुरू किए। उनका मकसद लोगों को यह समझाना था कि साइकिल केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि रोजमर्रा के आवागमन का भी एक प्रभावी तरीका हो सकती है।

अर्शेल के जीवन में बड़ा मोड़ वर्ष 2018 में आया। उन्हें वैश्विक संस्था बीवाईसीएस के साइकिल मेयर कार्यक्रम की जानकारी मिली। यह संस्था दुनिया भर के शहरों में साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। अर्शेल ने आवेदन किया और गुवाहाटी के लिए अपना विजन विस्तार से प्रस्तुत किया।

कई चरणों के ऑनलाइन इंटरव्यू और मूल्यांकन के बाद उन्हें चुना गया। अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस के अवसर पर 22 अप्रैल 2018 को अर्शेल अख्तर को गुवाहाटी का पहला साइकिल मेयर नियुक्त किया गया।

यह उपलब्धि उनके लिए केवल एक पद नहीं थी। इससे उन्हें सरकार, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के साथ काम करने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि भारत के अधिकांश शहरों में साइकिल को अभी भी परिवहन के गंभीर विकल्प के रूप में नहीं देखा जाता।

उन्होंने शहरी परिवहन, ट्रैफिक प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ गतिशीलता से जुड़े विषयों का गहराई से अध्ययन शुरू किया। दुनिया के विभिन्न शहरों के साइकिल मेयरों और परिवहन विशेषज्ञों से बातचीत ने उनकी समझ को और व्यापक बनाया।

अर्शेल का मानना है कि आज शहरों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां प्रदूषण और ट्रैफिक जाम हैं। साइकिल इन दोनों समस्याओं का प्रभावी समाधान बन सकती है। यही सोच उनके अभियान की आधारशिला बनी।

वर्ष 2019 में उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर “पेडल फॉर ए चेंज” नामक संगठन की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य साइकिलिंग संस्कृति को बढ़ावा देना और लोगों को टिकाऊ परिवहन के प्रति जागरूक करना था।

संगठन ने गुवाहाटी और असम के विभिन्न हिस्सों में कई कार्यक्रम शुरू किए। इनमें साइकिल राइड्स, सड़क सुरक्षा अभियान, जागरूकता रैलियां और सामुदायिक संवाद शामिल रहे। इन गतिविधियों ने युवाओं और छात्रों के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल की।

अर्शेल ने केवल शहरों तक खुद को सीमित नहीं रखा। वर्ष 2023 में उन्होंने पूरे असम की एकल साइकिल यात्रा की। 28 दिनों में उन्होंने लगभग दो हजार किलोमीटर की दूरी तय की और 27 जिलों का दौरा किया। इस यात्रा का उद्देश्य राज्य के विभिन्न साइकिलिंग समुदायों से जुड़ना और लोगों की जरूरतों को समझना था।

इस दौरान उन्हें ग्रामीण और शहरी इलाकों में परिवहन से जुड़ी कई चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ। यही अनुभव आगे की योजनाओं का आधार बना।

वर्ष 2024 में अर्शेल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पूर्वा फाउंडेशन की स्थापना की। यह संस्था जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक परिवहन, पैदल यात्रियों की सुरक्षा, साइकिलिंग और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर काम कर रही है।

फाउंडेशन नियमित रूप से साइकिल राइड्स, सार्वजनिक जागरूकता अभियान और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करता है। “आई एम कार फ्री टुडे” जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को निजी वाहनों का कम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वहीं “वी टू” अभियान सड़क पर साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहा है।

अर्शेल और उनकी टीम ने ऑनलाइन और ऑफलाइन चर्चा मंच भी शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों में विशेषज्ञ, नागरिक और नीति निर्माता एक साथ बैठकर शहरी परिवहन के मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

उन्होंने सार्वजनिक परिवहन और साइकिलिंग को लेकर लोगों की सोच समझने के लिए कई सर्वेक्षण भी किए हैं। इन अध्ययनों का उद्देश्य बेहतर नीतियों के लिए साक्ष्य तैयार करना है।

वर्ष 2023 में अर्शेल ने नॉर्थ ईस्ट साइकिलिंग अवार्ड्स की शुरुआत की। इस पहल का मकसद उन व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित करना है जो साइकिलिंग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

आने वाले वर्षों के लिए भी उनकी योजनाएं स्पष्ट हैं। वह गुवाहाटी में ऐसे मॉडल विकसित करना चाहते हैं जहां लोग आसानी से पैदल चल सकें और साइकिल के जरिए सार्वजनिक परिवहन केंद्रों तक पहुंच सकें। उनका लक्ष्य इन मॉडलों को बाद में असम के दूसरे शहरों तक पहुंचाना है।

अर्शेल विशेष रूप से उन लोगों के लिए भी कार्यक्रम शुरू करना चाहते हैं जो रोजी रोटी कमाने के लिए साइकिल का उपयोग करते हैं। उनका मानना है कि ऐसे लोगों को बेहतर सुविधाएं और सामाजिक पहचान मिलनी चाहिए।

आज अर्शेल अख्तर की पहचान केवल एक साइकिल प्रेमी के रूप में नहीं है। वह असम में टिकाऊ परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के मजबूत चेहरे बन चुके हैं। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि एक साधारण शौक भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है, यदि उसके पीछे स्पष्ट सोच और निरंतर प्रयास हो।

साइकिल से शुरू हुआ यह सफर अब असम के भविष्य को नई दिशा देने की कोशिश में बदल चुका है। यही अर्शेल अख्तर की सबसे बड़ी सफलता है।

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