ईरान अमेरिका तनाव बढ़ा, होर्मुज संकट से दुनिया चिंतित
मुस्लिम नाउ ब्यूरो
मध्य पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और गहराता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के 100 दिन बाद भी क्षेत्र में स्थायी शांति का कोई संकेत नहीं मिला है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाने जा रहे ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं। दूसरी ओर ईरान ने बहरीन और कुवैत की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिन्हें बीच रास्ते में रोक लिया गया।
मध्य पूर्व युद्ध, ईरान अमेरिका संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। खासकर तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार शनिवार को दो ईरानी एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सक्रिय थे। अमेरिकी सेना ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बताते हुए नष्ट कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में तैनात सैनिक किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
उधर ईरान का कहना है कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। तेहरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले ईरान के क़ेश्म द्वीप और सीरिक क्षेत्र में स्थित निगरानी सुविधाओं पर हमला किया था। ईरान के अनुसार ये ठिकाने समुद्री सुरक्षा और सीमा निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।
इस बीच अमेरिका ईरान की विदेशी संपत्तियों के उपयोग पर भी विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन खाड़ी देशों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल करने की संभावना पर चर्चा कर रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में एक प्रारंभिक आकलन शुरू किया है।
इजराइल और लेबनान के बीच भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। हाल ही में अमेरिका की मध्यस्थता में युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन इसके बावजूद सीमा पर तनाव जारी है। इजराइली सेना ने रविवार को दावा किया कि लेबनान से दागे गए दो प्रोजेक्टाइल उसके क्षेत्र में पहुंचे, जिन्हें वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया।
इसी दौरान लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 3,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 11,000 लोग घायल हुए हैं। केवल पिछले 24 घंटों में 35 लोगों के मारे जाने और 120 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है।
शनिवार को दक्षिणी लेबनान में हुए इजराइली हवाई हमलों में नौ लोगों की मौत हुई। मृतकों में लेबनानी सेना के तीन सदस्य भी शामिल बताए गए हैं। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस हमले को देश की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताया है।
मध्य पूर्व संकट का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद से इस मार्ग पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। कई देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए ओपेक प्लस देशों की बैठक बुलाई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार ओपेक प्लस उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल उत्पादन बढ़ाने से तेल कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है क्योंकि असली समस्या आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
उधर ईरान में आम लोगों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल है। आर्थिक चुनौतियों और युद्ध की आशंकाओं के बावजूद लोग आगामी फीफा विश्व कप 2026 को लेकर उत्साहित हैं। तेहरान के बाजारों में राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की जर्सियों की मांग बढ़ी हुई है। हालांकि कई नागरिकों का मानना है कि मौजूदा हालात में खेल से ज्यादा जरूरी क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सुधार हैं।
100 दिन पूरे होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान किसी स्थायी समझौते तक पहुंच पाएंगे। फिलहाल हालात यही संकेत दे रहे हैं कि युद्धविराम के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान अमेरिका संघर्ष, इजराइल लेबनान तनाव और बढ़ती तेल कीमतें आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती रहेंगी।


