महाराष्ट्र में मुस्लिम युवाओं के लिए उम्मीद की नई राह, SEWA का सातवां पुलिस भर्ती बैच शुरू
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर
महाराष्ट्र में मुस्लिम युवाओं को शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही सामाजिक संस्था ‘सेवा’ एक बार फिर नई पहल के साथ सामने आई है। संस्था ने पुलिस भर्ती और अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपने सातवें बैच की घोषणा कर दी है। जुलाई 2026 से शुरू होने वाला यह बैच उन युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं।
नागपुर से संचालित यह पहल पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। खास बात यह है कि इस कोचिंग कार्यक्रम में छात्रों को न केवल निशुल्क पढ़ाई कराई जाती है, बल्कि रहने, लाइब्रेरी और मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। यही वजह है कि सीमित संसाधनों वाले परिवारों के छात्र बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम से जुड़ रहे हैं।
जुलाई से शुरू होगा नया बैच
संस्था की ओर से जारी जानकारी के अनुसार SEWA पुलिस भर्ती एवं अन्य सिविल सेवा कोचिंग क्लासेस का सातवां बैच जुलाई 2026 से शुरू होगा। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 9 जून से शुरू हो चुकी है और 30 जून 2026 तक जारी रहेगी।
रजिस्ट्रेशन पूरा करने वाले विद्यार्थियों को आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी 5 जुलाई 2026 तक जमा करनी होगी। संस्था का कहना है कि सीटें सीमित हैं। इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि का इंतजार नहीं करना चाहिए।
युवाओं के लिए पूरी तरह निशुल्क सुविधा
आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी काफी महंगी हो चुकी है। बड़े शहरों में कोचिंग, हॉस्टल और किताबों पर हजारों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी नौकरी की तैयारी करना आसान नहीं होता।
इसी चुनौती को देखते हुए सेवा ने अपने कोचिंग कार्यक्रम को पूरी तरह निशुल्क रखा है।
छात्रों को निशुल्क कोचिंग दी जाएगी।
निशुल्क हॉस्टल सुविधा उपलब्ध होगी।
निशुल्क लाइब्रेरी का लाभ मिलेगा।
अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा।
पुलिस भर्ती के साथ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी कराई जाएगी।
संस्था का मानना है कि प्रतिभा केवल संपन्न परिवारों में नहीं होती। सही अवसर मिलने पर गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।
छह बैचों ने बदली सैकड़ों युवाओं की जिंदगी
सेवा की यह पहल केवल घोषणा तक सीमित नहीं है। पिछले छह बैचों के परिणाम इसकी सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं।
संस्था के अनुसार अब तक लगभग 70 विद्यार्थी केवल पुलिस विभाग में चयनित हो चुके हैं। इसके अलावा कई युवाओं ने अन्य सरकारी विभागों में भी सफलता हासिल की है।
महाराष्ट्र के कई जिलों में आज ऐसे युवा सरकारी सेवा में काम कर रहे हैं जिन्होंने इसी कोचिंग सेंटर से तैयारी की थी। इनमें ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के छात्र भी शामिल हैं।
स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि मुस्लिम समाज में सरकारी नौकरियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस तरह की पहल बेहद जरूरी है।

शिक्षा से रोजगार तक का मजबूत पुल
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है। रोजगार तक पहुंचने के लिए सही मार्गदर्शन भी जरूरी होता है।
सेवा इसी कमी को दूर करने का प्रयास कर रही है।
यह संस्था छात्रों को केवल परीक्षा पास करने की तकनीक नहीं सिखाती बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी विकसित करती है। इंटरव्यू की तैयारी से लेकर शारीरिक परीक्षण और लिखित परीक्षा तक हर चरण पर मार्गदर्शन दिया जाता है।
यही कारण है कि यहां से पढ़ने वाले छात्रों का चयन प्रतिशत लगातार बेहतर रहा है।
समाज के सहयोग से चल रही है पूरी व्यवस्था
दिलचस्प बात यह है कि सेवा का पूरा मॉडल सामाजिक सहयोग पर आधारित है। संस्था को किसी बड़े कॉर्पोरेट या सरकारी फंड का सहारा नहीं है।
कोचिंग, हॉस्टल, लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं का खर्च समाज के सहयोग से पूरा किया जाता है।
संस्था के सचिव शेख निजामुद्दीन के अनुसार एक विद्यार्थी को पांच महीने तक तैयार करने में लगभग 30 हजार रुपये का खर्च आता है।
हर महीने एक छात्र पर करीब 6 हजार रुपये खर्च होते हैं।
यदि 50 छात्रों का बैच तैयार किया जाए तो कुल खर्च लगभग 15 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
इसके बावजूद संस्था लगातार नए बैच शुरू कर रही है ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक अवसर पहुंच सके।
समाज से मदद की अपील
नए बैच की शुरुआत के साथ संस्था ने समाज के जिम्मेदार लोगों से सहयोग की अपील भी की है।
संस्था का कहना है कि यदि समाज आगे आए तो और अधिक छात्रों को निशुल्क शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का अवसर दिया जा सकता है।
शेख निजामुद्दीन का कहना है कि एक छात्र की सफलता केवल उसके परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की सफलता होती है। जब कोई युवा पुलिस, प्रशासन या किसी अन्य सरकारी विभाग में पहुंचता है तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाता है।
मुस्लिम युवाओं के लिए नई उम्मीद
महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में जागरूकता बढ़ी है। लेकिन आर्थिक बाधाएं अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
ऐसे समय में सेवा जैसी संस्थाएं युवाओं के लिए उम्मीद का नया दरवाजा खोल रही हैं।
पुलिस भर्ती, सरकारी नौकरी, सिविल सेवा परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग और रोजगार के अवसर जैसे क्षेत्रों में यह पहल उल्लेखनीय मानी जा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समाज आधारित ऐसे मॉडल देश के दूसरे हिस्सों में भी अपनाए जाएं तो हजारों प्रतिभाशाली युवाओं का भविष्य बदला जा सकता है।
सिर्फ कोचिंग नहीं, सामाजिक बदलाव की मुहिम
सेवा का यह प्रयास केवल नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा सामाजिक उद्देश्य भी है।
संस्था चाहती है कि शिक्षित और जागरूक युवाओं की नई पीढ़ी तैयार हो। ऐसी पीढ़ी जो अपने परिवार, समाज और देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सके।
पिछले छह बैचों की सफलता के बाद अब सातवें बैच से भी बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।
कई परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने लेकर इस कार्यक्रम की ओर देख रहे हैं।
आने वाले महीनों में यह नया बैच कितने युवाओं की जिंदगी बदलता है, इस पर सबकी नजर रहेगी। लेकिन इतना तय है कि नागपुर से शुरू हुई यह छोटी सी पहल अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।


