Politics

बंगाल बजट: अल्पसंख्यक योजनाओं के फंड में भारी कटौती, सियासत गरमाई

कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार के गठन के बाद राज्य की राजनीतिक और सामाजिक फिजां तेजी से बदल रही है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद भाजपा सरकार ने राज्य का नया बजट पेश किया है। इस बजट में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के फंड में भारी कटौती की गई है। इस वित्तीय फैसले के साथ-साथ राज्य के कई हिस्सों से चुनाव के बाद हुई हिंसा की खबरें भी सामने आ रही हैं। इन दोनों घटनाक्रमों ने राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय के बीच सुरक्षा और विकास को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

आधी से भी कम हुई अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की हिस्सेदारी

तृणमूल कांग्रेस सरकार के पिछले कार्यकाल की तुलना में इस बार का बजट बिल्कुल अलग रुख दिखाता है। पश्चिम बंगाल के नए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने इस बार अल्पसंख्यक विभाग के लिए केवल 2,165 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह राशि पिछले साल की तुलना में आधी से भी कम है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पिछली टीएमसी सरकार ने साल 2025-26 के बजट में इस विभाग के लिए 5,713 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

अगर पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह विभाग हमेशा से बड़ी फंडिंग पाता रहा है। टीएमसी सरकार ने साल 2023-24 में 5,166.99 करोड़ रुपये और साल 2024-25 में 5,530.66 करोड़ रुपये इस क्षेत्र के विकास के लिए दिए थे। लेकिन नई सरकार के इस फैसले से कई चालू योजनाओं की रफ्तार पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

इन प्रमुख योजनाओं के बजट पर चली कैंची

बजट दस्तावेजों के विश्लेषण से साफ होता है कि सरकार ने अल्पसंख्यकों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं के फंड को पूरी तरह खत्म या बेहद कम कर दिया है।

  • बेसहारा महिलाओं के लिए आवास: पिछली सरकार के समय ‘बेसहारा अल्पसंख्यक महिलाओं’ को पक्का मकान देने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान था। नई भाजपा सरकार ने इस योजना के फंड को पूरी तरह शून्य कर दिया है।
  • ऐक्यश्री स्कॉलरशिप योजना: आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक छात्रों को पढ़ाई के लिए मिलने वाली इस स्कॉलरशिप का बजट 741 करोड़ रुपये से घटाकर सीधे 250 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • सबूज साथी योजना: माध्यमिक स्कूलों और मदरसों के छात्रों को मुफ्त साइकिल बांटने वाली इस लोकप्रिय योजना का बजट भी 100 करोड़ रुपये से घटकर महज 15.5 करोड़ रुपये रह गया है।
  • अल्पसंख्यक विकास और कल्याण: इस सामान्य कल्याण कोष को भी 103 करोड़ रुपये से घटाकर केवल 21 करोड़ रुपये पर समेट दिया गया है।

बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में सरकार के इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने केवल अल्पसंख्यकों को गुमराह करने का काम किया। बच्चों को केवल मदरसों में भेजने के बजाय परिवारों को उन्हें डॉक्टर और इंजीनियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।

चुनाव के बाद भड़की हिंसा ने बढ़ाई सुरक्षा को लेकर चिंता

बजट में कटौती के अलावा राज्य के ग्रामीण इलाकों से आ रही हिंसा की खबरों ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। हुगली जिले के केलेपारा गांव में 71 वर्षीय बुजुर्ग शेख शाह आलम की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते उन पर ईंटों, लोहे की छड़ों और लाठियों से हमला किया गया। जब घर की महिलाओं ने उन्हें बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी निशाना बनाया गया।

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ Civil Rights यानी एपीसीआर की एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने इस घटना पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला चुनाव के बाद सुनियोजित तरीके से की गई सामूहिक हिंसा का हिस्सा था। इस घटना के बाद से पूरे गांव में खौफ का माहौल है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पीड़ित परिवार को चुनाव नतीजे आने के बाद से ही लगातार धमकियां मिल रही थीं और उनसे जबरन उगाही की मांग की जा रही थी। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बाकी की तलाश जारी है।

इसी तरह के एक अन्य हमले में सरकारी शिक्षक 41 वर्षीय अताफ मल्लिक और शेख अब्दुल रहीम नाम के व्यक्ति के पैरों में गंभीर फ्रैक्चर आने की बात भी सामने आई है। इन घटनाओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत से दखल देने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस कई जगहों पर हिंसा की एफआईआर दर्ज करने से कतरा रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल को बुल्डोजर संस्कृति वाला राज्य नहीं बनने दिया जा सकता और नागरिकों की सुरक्षा हर हाल में तय होनी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *