अमेरिका ने ईरान पर फिर किए हमले, बंदरगाह और तटीय इलाके बने निशाना
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, तेहरान
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दक्षिणी ईरान में बुधवार देर रात कई धमाकों की खबरें सामने आईं। इसके बाद अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान ने ईरान में नई सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। वहीं ईरानी मीडिया ने कई तटीय इलाकों में विस्फोटों की सूचना दी है। हालांकि सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
ईरानी समाचार माध्यमों के अनुसार सबसे पहले दक्षिणी ईरान के सिरिक और क़ेशम द्वीप के आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। इसके कुछ समय बाद बंदर अब्बास के आसपास भी धमाकों की खबरें आने लगीं। स्थानीय लोगों ने रात के समय कई तेज धमाकों की आवाज सुनने की बात कही।
इसी बीच अमेरिकी केंद्रीय कमान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान ने एक दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया था। अमेरिकी सेना ने इसे युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान के कुछ रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हमले का मुख्य उद्देश्य तटीय सैन्य ढांचे और उन स्थानों को निशाना बनाना था जिनका उपयोग समुद्री गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। बयान में कहा गया कि ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
🚨🚨BREAKING NEWS 🚨
— Corefrontline (@corefrontline) July 7, 2026
🇺🇸🇮🇷 New Footage Shows US Delivers Significantly Larger Strikes on Iran
US officials confirm the latest airstrikes in southern Iran are 4–5 times larger in scale and firepower than those conducted just 10 days ago, marking the most intense American… https://t.co/qsw0kQktwp pic.twitter.com/vCI7GEalaV
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि सिरिक क्षेत्र में स्थित मछली पकड़ने वाले घाट और वाणिज्यिक बंदरगाह के आसपास नुकसान हुआ है। कुछ घायलों को इलाज के लिए मीनाब अस्पताल ले जाने की भी खबर सामने आई है। हालांकि घायलों की संख्या और नुकसान का आधिकारिक विवरण अभी जारी नहीं किया गया है।
इसी दौरान ईरान के सरकारी समाचार चैनल ने क़ेशम द्वीप और खारग द्वीप के आसपास भी विस्फोट होने की जानकारी दी। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से शुरुआती घंटों में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया। इसलिए कई सूचनाओं की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
घटनाक्रम के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान का कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह इराक के नजफ में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। अमेरिकी हमलों की खबर के बाद उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़ा और तेहरान लौटने का फैसला किया।
रिपोर्टों में कहा गया है कि खामेनेई के पार्थिव शरीर को नजफ में श्रद्धांजलि के बाद कर्बला ले जाने की योजना थी। इसके बाद पार्थिव शरीर को ईरान वापस लाकर अंतिम संस्कार किया जाना था। इस बीच सुरक्षा स्थिति बदलने से सरकारी गतिविधियों में भी तेजी देखी गई।
अमेरिकी सेना का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा की है। अमेरिका का दावा है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा बनाए रखना है।
दूसरी ओर ईरानी मीडिया ने अमेरिकी हमलों के बाद कई तटीय इलाकों में अलर्ट बढ़ाए जाने की जानकारी दी है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। कई स्थानों पर राहत और बचाव दल भी तैनात किए गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बना रहा तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अपने परिचालन की समीक्षा कर सकती हैं। इससे समुद्री बीमा लागत बढ़ सकती है। तेल और गैस की आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है।
भारत सहित कई एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं। इसलिए नई सैन्य गतिविधियों पर नई दिल्ली समेत दुनिया की कई सरकारें लगातार नजर बनाए हुए हैं। अभी तक भारत की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। कूटनीतिक प्रयासों की सफलता अब पहले से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है ताकि समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित न हो।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जवाबी कार्रवाई यहीं तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा। दुनिया की नजर अब होर्मुज जलडमरूमध्य और दक्षिणी ईरान के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
The US launches new strikes on Iran despite a promise by US President Donald Trump to pause attacks during the 7-day funeral of Iran’s Supreme Leader Ali Khamanei. Washington says it was responding to attacks on commercial ships in the Strait of Hormuz. pic.twitter.com/nr1HuxbxWF
— Al Jazeera English (@AJEnglish) July 8, 2026
क्या है पूरा मामला
प्रश्न: अमेरिका ने कार्रवाई क्यों की?
उत्तर: अमेरिकी केंद्रीय कमान का दावा है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए कथित हमलों के जवाब में की गई।
प्रश्न: किन क्षेत्रों में धमाकों की खबर आई?
उत्तर: रिपोर्टों में सिरिक, क़ेशम द्वीप, बंदर अब्बास और खारग द्वीप के आसपास विस्फोटों का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न: क्या सभी दावों की पुष्टि हो चुकी है?
उत्तर: नहीं। कई घटनाओं की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। अलग अलग पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं।
प्रश्न: होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से गुजरते हैं।
प्रश्न: भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
उत्तर: यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

