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जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल, उमर अब्दुल्ला का BJP पर ‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप,20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस समय जबरदस्त उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी पर उनकी सरकार को गिराने की साजिश रचने का एक बहुत ही गंभीर आरोप लगाया है। उमर अब्दुल्ला का दावा है कि सूबे में ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधायकों को पाला बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये और मंत्री पद का लालच दिया जा रहा है।

इस बड़े सियासी खुलासे के बाद श्रीनगर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसके खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक मोर्चा खोलने का फैसला किया है। वह 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल सर्वदलीय धरना-प्रदर्शन करने जा रहे हैं। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को तेज करना है।

20 से 30 करोड़ रुपये में विधायक खरीदने का दावा

श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं की एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने मंच से खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के एक बड़े नेता और सुप्रीम कोर्ट के एक नामचीन वकील ने उनकी पार्टी के एक विधायक से सीधा संपर्क साधा था। उन्होंने उस विधायक को पाला बदलने के बदले भारी-भरकम रकम, सरकार में मंत्री पद और यहां तक कि राज्य का दर्जा बहाल करवाने का भरोसा दिया था।

उमर अब्दुल्ला ने गर्व से कहा कि विरोधी ताकतें उनके एक भी विधायक को तोड़ नहीं पाईं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर बीजेपी उनकी पार्टी के हर एक विधायक को 100 करोड़ रुपये का ऑफर भी दे, तब भी वह अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो पाएगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और बिकने वाले नहीं हैं।

बीजेपी ने आरोपों को नकारा, बताया बेबुनियाद

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के इन तीखे हमलों पर बीजेपी ने भी तुरंत पलटवार किया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविंदर रैना ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और जनता को गुमराह करने वाले हैं। केंद्र सरकार ने हमेशा राज्य के विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के आर्थिक मदद दी है।

रविंदर रैना ने मुख्यमंत्री को उनके एक पुराने बयान की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले खुद मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से माना था कि अगर केंद्र सरकार समय पर फंड जारी नहीं करती, तो राज्य सरकार के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे भी नहीं होते। ऐसे में केंद्र पर इस तरह के झूठे आरोप लगाना ठीक नहीं है।

विधानसभा में फिलहाल मजबूत है उमर सरकार

अगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो उमर अब्दुल्ला की सरकार काफी मजबूत स्थिति में दिखाई देती है। 90 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कुल 46 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस समय नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास अपने खुद के 41 विधायक हैं।

इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के 6 विधायक सरकार को बाहर से अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। सरकार को 5 निर्दलीय विधायकों और 1 माकपा (CPM) विधायक का भी साथ मिला हुआ है। इस तरह उमर अब्दुल्ला के पास बहुमत के आंकड़े से कहीं ज्यादा विधायकों का समर्थन है। यही वजह है कि सरकार फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही है।

पूर्ण राज्य का दर्जा देने में देरी पर केंद्र पर बरसे

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के सामने किए गए वादों से मुकर जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने देश की सबसे बड़ी अदालत को भरोसा दिया था कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन और विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा वापस दे दिया जाएगा। परिसीमन में भारी कमियों और नाइंसाफियों के बावजूद उनकी पार्टी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए चुनाव में भाग लिया।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बीजेपी को लगता था कि वे नई सीटों के सहारे जम्मू-कश्मीर पर राज करेंगे। लेकिन राज्य की जनता ने अपनी सूझबूझ से उनके इस गणित को फेल कर दिया। अब चुनाव जीतने के बाद कतर में बैठे नेताओं की तरह केंद्र सरकार नए-नए बहाने बना रही है। वे कह रहे हैं कि सही समय आने पर राज्य का दर्जा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने पूछा कि आखिर वह सही समय कब आएगा और इसके लिए उन्हें और क्या करना होगा?

राजभवन से सरकार चलाने की कोशिशों की निंदा

उमर अब्दुल्ला ने तंज कसते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार को राजभवन के जरिए ही जम्मू-कश्मीर को चलाना था, तो फिर अरबों रुपये खर्च करके चुनाव कराने का नाटक क्यों किया गया? अगर चुनी हुई सरकार को फैसले लेने की आजादी ही नहीं होगी, तो जनता से वोट मांगने का क्या मतलब रह जाता है? उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश बनाकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को सजा दी जा रही है।

उन्होंने लद्दाख का उदाहरण देते हुए कहा कि एक तरफ लद्दाख को अलग से संवैधानिक सुरक्षा दी जा रही है। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के अधिकारों को दबाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई हर मुलाकात में इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से उठाया है।

20 जुलाई को दिल्ली चलो का नारा, विपक्ष से मांगा साथ

इस पूरे विवाद के बीच उमर अब्दुल्ला ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए सभी राजनीतिक दलों से एक साथ आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग सिर्फ उनकी या उनके परिवार की नहीं है। यह जम्मू-कश्मीर के हर एक नागरिक के आत्मसम्मान की लड़ाई है।

उन्होंने उन आलोचनाओं को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि इस आंदोलन के लिए बाकी दलों से सलाह नहीं ली गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि विधानसभा में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी राजनीतिक दलों को इस धरने का न्यौता भेजा गया है। उन्होंने गुलाम नबी आजाद, अल्ताफ बुखारी और हकीम यासीन जैसे तमाम नेताओं से अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर इस बड़े मकसद के लिए दिल्ली आने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई दल डर या दबाव में इस प्रदर्शन से दूरी बनाता है, तो यह राज्य की जनता के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात होगा।

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