Muslim World

शेख मोहम्मद के 77 वर्ष: दुबई को ग्लोबल सिटी बनाने वाले विज़नरी लीडर की कहानी

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई

संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के इतिहास में 15 जुलाई का दिन बहुत खास है। यूएई के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दुबई के शासक हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम आज अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक छोटे से रेतीले इलाके को दुनिया के सबसे आधुनिक और अमीर शहर में बदलना कोई आसान काम नहीं था। शेख मोहम्मद ने अपनी दूरदर्शी सोच, कड़े फैसलों और कभी न हार मानने वाले जज्बे से यह करिश्मा कर दिखाया है। आज पूरी दुनिया दुबई के विकास मॉडल की मिसाल देती है। उनका जीवन इस बात का सबूत है कि अगर आपके पास सही विज़न है तो आप इतिहास बदल सकते हैं।

बचपन और शुरुआती संस्कार

शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम का जन्म 15 जुलाई 1949 को दुबई के ऐतिहासिक अल शिंगधा इलाके में हुआ था। वह अल मकतूम शाही परिवार में पैदा हुए थे। उस समय उनके दादा शेख सईद बिन मकतूम अल मकतूम दुबई के शासक थे। साल 1958 में जब शेख मोहम्मद सिर्फ दस साल के थे तब उनके पिता शेख राशिद बिन सईद अल मकतूम ने दुबई की कमान संभाली। चार भाइयों में वह तीसरे नंबर पर थे। उनके बड़े भाइयों में शेख मकतूम और शेख हमदान शामिल थे जबकि छोटे भाई का नाम शेख अहमद है। उनका पूरा बचपन एक ऐसे माहौल में बीता जहां नेतृत्व करना सिर्फ सिखाया नहीं जाता था बल्कि रोज जिया जाता था।

उनकी मां शेखा लतीफा बिंत हमदान बिन जायद अल नाहयान का उनके जीवन पर सबसे गहरा असर रहा। अपनी मां के साथ उनका रिश्ता बेहद खास था। साल 1983 में उनकी मां का निधन हो गया था। इसके दशकों बाद शेख मोहम्मद ने अपनी किताब माई स्टोरी में लिखा कि जब मां चली जाती है तो घर की रौनक खत्म हो जाती है। रास्ते, घर और चेहरे सब बदले हुए लगते हैं। यहाँ तक कि खाने का स्वाद भी बदल जाता है। मेरी मां जैसा दुनिया में कोई दूसरा दिल नहीं हो सकता।

इसके अलावा उनके दादा शेख सईद ने भी उन्हें बहुत कुछ सिखाया। बचपन में वह अपने दादा के साथ रोज लगने वाली मजलिस यानी चौपाल में बैठते थे। वहां कबीले के बुजुर्ग और आम लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे। उसी मजलिस में बैठकर नन्हे मोहम्मद ने राजनीति, जनता की सेवा, धैर्य और न्याय करने के शुरुआती सबक सीखे। वह मजलिस ही उनकी जिंदगी का पहला स्कूल साबित हुई।

सैन्य प्रशिक्षण और शिक्षा की शुरुआत

शेख मोहम्मद की पढ़ाई बहुत कम उम्र में शुरू हो गई थी। महज चार साल की उम्र में उनके पिता ने उनकी शिक्षा का इंतजाम किया। शुरुआत में उन्होंने अरबी भाषा और इस्लामिक तौर तरीकों की बुनियादी शिक्षा ली। साल 1955 में उन्होंने देइरा के अल अहमदिया स्कूल में दाखिला लिया। इसके बाद वह अल शाब स्कूल गए और फिर दुबई सेकेंडरी स्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की।

उनके पिता जानते थे कि दुबई के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उनके बेटे को सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों की गहरी समझ होनी चाहिए। इसी वजह से उन्होंने मोहम्मद को सेना की ट्रेनिंग के लिए ब्रिटेन भेजने का फैसला किया। साल 1966 में शेख मोहम्मद लंदन पहुंचे। वहां उन्होंने कैंब्रिज के बेल स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस में पढ़ाई की। इस संस्थान में दुनिया भर से आए छात्रों से मिलकर उन्हें अलग संस्कृतियों को समझने का मौका मिला।

इसके बाद उन्होंने एल्डर्शॉट के मॉन्स ऑफिसर कैडेट स्कूल में एडमिशन लिया जो बाद में सैंडहर्स्ट रॉयल मिलिट्री एकेडमी का हिस्सा बना। वहां उन्होंने बेहद कठिन सैन्य ट्रेनिंग पूरी की। उन्हें बेहतरीन प्रदर्शन के लिए स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया जो किसी भी कैडेट के लिए गर्व की बात होती है।

छोटी उम्र में बड़ी जिम्मेदारियां

अक्टूबर 1968 में मिलिट्री स्कूल से पास आउट होने के बाद शेख मोहम्मद वापस दुबई लौटे। उनके पिता ने तुरंत उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्हें दुबई पुलिस और पब्लिक सिक्योरिटी का चीफ नियुक्त कर दिया गया। यह वह समय था जब दुबई बहुत तेजी से एक व्यापारिक और पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा था। कानून व्यवस्था बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती थी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।

इसी दौरान उन्होंने यूएई की स्थापना की नींव बनते हुए भी देखा। 18 फरवरी 1968 को उनके पिता शेख राशिद और अबू धाबी के शासक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के बीच अल सेदेइरा में एक ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। शेख मोहम्मद उस बैठक के गवाह थे। एक साधारण से टेंट में दोनों नेताओं ने मिलकर एक नया देश बनाने का संकल्प लिया था। शेख मोहम्मद याद करते हैं कि उनके पिता ने खुद शेख जायद से कहा था कि आप हमारे राष्ट्रपति होंगे। इस तरह बिना किसी पद के लालच के एक महान देश का जन्म हुआ।

दुनिया के सबसे युवा रक्षा मंत्री

जब 2 दिसंबर 1971 को आधिकारिक तौर पर संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई का गठन हुआ तो शेख मोहम्मद को देश का रक्षा मंत्री बनाया गया। उस समय उनकी उम्र महज 22 साल थी। वह दुनिया के सबसे युवा रक्षा मंत्री बने थे। उन्होंने इस पद पर 50 साल से भी ज्यादा समय तक काम किया। साल 2024 में उन्होंने यह जिम्मेदारी अपने बेटे और दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद को सौंपी।

रक्षा क्षेत्र के अलावा उन्होंने दुबई के आर्थिक विकास में भी बड़ी भूमिका निभाई। साल 1977 में उन्हें दुबई एयरपोर्ट की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने ओपन स्काइज पॉलिसी यानी मुक्त आकाश नीति लागू की जिससे दुनिया भर की एयरलाइंस दुबई आने लगीं। इसके बाद उन्होंने जेबेल अली फ्री ज़ोन और जेबेल अली पोर्ट का काम संभाला। इन दोनों प्रोजेक्ट्स ने दुबई को ग्लोबल ट्रेड का हब बना दिया। जब खाड़ी देशों में युद्ध चल रहा था तब भी शेख मोहम्मद का ध्यान सिर्फ विकास और इंसानियत की सेवा पर था।

क्राउन प्रिंस के रूप में बड़े प्रोजेक्ट्स

अक्टूबर 1990 में पिता के निधन के बाद उनके बड़े भाई शेख मकतूम दुबई के शासक बने। जनवरी 1995 में शेख मकतूम ने एक बड़ा फैसला लेते हुए शेख मोहम्मद को दुबई का क्राउन प्रिंस घोषित किया। इसके बाद दुबई की तरक्की में एक नई रफ्तार आ गई। शेख मोहम्मद ने एक के बाद एक कई मेगा प्रोजेक्ट्स शुरू किए।

उन्होंने दुबई शॉपिंग फेस्टिवल की शुरुआत की जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला। इसके बाद उन्होंने सरकारी कामकाज को ऑनलाइन करने के लिए दुबई ई-गवर्नमेंट का आइडिया पेश किया। उन्होंने इंटरनेट सिटी और मीडिया सिटी जैसे अत्याधुनिक टेक हब बनाए। दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा, समंदर के बीच बना पाम जुमेराह द्वीप, आलीशान बुर्ज अल अरब होटल और दुबई मरीना जैसी संरचनाएं उन्हीं की सोच का नतीजा हैं। एमिरेट्स एयरलाइन और डीपी वर्ल्ड जैसी वैश्विक कंपनियों को खड़ा करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।

दुबई के शासक और आधुनिक यूएई के निर्माता

4 जनवरी 2006 को अपने बड़े भाई शेख मकतूम के निधन के बाद शेख मोहम्मद दुबई के आधिकारिक शासक बने। इसके तुरंत बाद यूएई के तत्कालीन राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान ने उन्हें देश का उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया। फरवरी 2006 में उन्होंने नई सरकार का गठन किया।

जिस तरह उन्होंने दुबई का चेहरा बदला था उसी तरह उन्होंने पूरे यूएई के विकास को एक नई दिशा दी। उन्होंने यूएई विज़न 2021 लागू किया जिसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रखकर बिजनेस और टूरिज्म पर आधारित करना था। आज यूएई सरकार को दुनिया भर में सबसे कुशल और आधुनिक सरकारों में गिना जाता है।

सादगी और परिवार के प्रति प्रेम

इतने बड़े पदों पर रहने के बावजूद शेख मोहम्मद का निजी जीवन बेहद अनुशासित और सादगी से भरा है। उनकी दिनचर्या सुबह तड़के फज्र की नमाज के साथ शुरू होती है। वह अपने प्रोजेक्ट्स की खुद निगरानी करते हैं और अचानक किसी भी दफ्तर या साइट का दौरा करने पहुंच जाते हैं। वह अपने परिवार को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं।

साल 1979 में उनका विवाह शेखा हिंद बिंत मकतूम से हुआ था। यह शादी उस दौर में सात दिनों तक चली थी जिसमें 20 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। शेख मोहम्मद के 16 बच्चे हैं जिनमें 7 बेटे और 9 बेटियां हैं। वह अक्सर अपने बच्चों के साथ वक्त बिताते हैं और उन्हें यूएई की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना सिखाते हैं।

कविता और घोड़ों से लगाव

राजनीति और विकास के अलावा शेख मोहम्मद एक बेहतरीन कवि भी हैं। वह अरबी भाषा की पारंपरिक नबाती शैली में कविताएं लिखते हैं। शुरुआत में वह अपनी कविताएं अलग नामों से छपवाते थे ताकि लोग उनकी शायरी को उनके पद की वजह से नहीं बल्कि उसकी काबिलियत की वजह से पसंद करें। उनकी कई कविताओं को मशहूर अरब गायकों ने अपनी आवाज दी है।

इसके साथ ही उन्हें घोड़ों से बेहद प्यार है। उन्हें दुनिया भर में फारिस अल अरब यानी अरब का घुड़सवार कहा जाता है। उन्होंने गोडोल्फिन नाम की एक प्रोफेशनल हॉर्स रेसिंग टीम बनाई जो आज दुनिया की सबसे सफल टीमों में से एक है। साल 1996 में उन्होंने दुबई वर्ल्ड कप की शुरुआत की जो दुनिया की सबसे महंगी घुड़दौड़ प्रतियोगिता मानी जाती है। वह खुद भी एंड्यूरेंस रेसिंग यानी लंबी दूरी की घुड़दौड़ में हिस्सा लेते रहे हैं।

शेख मोहम्मद का मानना है कि किसी भी देश का असली विकास वहां के नागरिकों की खुशहाली में है। वह हमेशा कहते हैं कि इंसान का निर्माण करना ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है। उनके इसी विज़न की वजह से आज दुबई एक वैश्विक शहर बनकर दुनिया को प्रेरित कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *