जामिया में डेंटल शिक्षा में एआई पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
नई दिल्ली।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से चिकित्सा और दंत चिकित्सा शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। इसी दिशा में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की फैकल्टी ऑफ डेंटिस्ट्री ने डेंटल छात्रों और शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम SPARC UKIERI सहयोगी परियोजना के तहत आयोजित किया गया, जिसका विषय था डेंटल एजुकेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।
यह व्याख्यान श्रृंखला डेंटल छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल का हिस्सा थी। कुल आठ मॉड्यूल वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि भविष्य की डेंटल शिक्षा, क्लिनिकल प्रैक्टिस और चिकित्सा अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस तरह अहम भूमिका निभाने वाली है।
कार्यक्रम का यह चौथा संपर्क सत्र था। इसमें छात्रों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई बल्कि व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से यह भी बताया गया कि आधुनिक दंत चिकित्सा में एआई आधारित तकनीकों का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग कैसे किया जा सकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत फैकल्टी ऑफ डेंटिस्ट्री के डीन प्रोफेसर नदीम यूनुस के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लिए यह गर्व की बात है कि उसे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सहयोगी परियोजना की मेजबानी का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक तेजी से बदलाव ला रही है और डेंटल छात्रों के लिए इन बदलावों को समझना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रहें बल्कि नई तकनीकों को भी सीखें। उनके अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य के डेंटल पेशे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है और जो छात्र आज इसे समझेंगे, वे आने वाले समय में अधिक सक्षम चिकित्सक बन सकेंगे।
कार्यक्रम का पहला व्याख्यान डॉ दीपक राय ने दिया। वे इंटरडिसिप्लिनरी ऑर्थोडॉन्टिस्ट होने के साथ नोएडा स्थित नियोस्माइल डेंटल प्रैक्टिस और नियोस्माइल इंडिया एजुकेशन के संस्थापक भी हैं।
उन्होंने विस्तार से बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल एक तकनीकी अवधारणा नहीं रह गया है बल्कि यह डेंटल शिक्षा, अनुसंधान और क्लिनिकल सेवाओं का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कई ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए जिनमें एआई आधारित सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स उपचार की योजना बनाने, मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण करने और शोध कार्य को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता कर रहे हैं।
डॉ दीपक राय ने छात्रों से कहा कि तकनीक पर पूरी तरह निर्भर होना उचित नहीं है। किसी भी एआई आधारित परिणाम को स्वीकार करने से पहले चिकित्सक के पास उसका वैज्ञानिक मूल्यांकन करने की क्षमता होना आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को क्रिटिकल अप्रेजल स्किल विकसित करने की सलाह दी ताकि वे आधुनिक तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई का उद्देश्य डॉक्टर की जगह लेना नहीं है। इसका काम डॉक्टर को बेहतर निर्णय लेने में सहायता देना है। अंतिम निर्णय हमेशा प्रशिक्षित चिकित्सक का ही होना चाहिए।
दूसरा व्याख्यान डॉ वरुण सूर्य ने प्रस्तुत किया। वे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली के सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च में सहायक प्रोफेसर हैं।
उन्होंने डेंटिस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज एआई की मदद से मरीजों की जांच पहले की तुलना में अधिक सटीक और तेज हो रही है। डिजिटल इमेजिंग, एक्स रे विश्लेषण, ओरल डिजीज की पहचान और उपचार की योजना तैयार करने जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित तकनीक लगातार उपयोग में आ रही है।
डॉ वरुण सूर्य ने कहा कि आने वाले वर्षों में दंत चिकित्सा पूरी तरह डिजिटल तकनीकों के साथ आगे बढ़ेगी। इसलिए छात्रों को अभी से इन आधुनिक प्रणालियों को सीखना होगा। उन्होंने शोध कार्य में भी एआई के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला और बताया कि डेटा विश्लेषण तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोधकर्ताओं का समय और मेहनत दोनों बचा सकती है।
कार्यक्रम में दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। इस दौरान छात्रों ने एआई आधारित डेंटल उपकरणों, नैतिक चुनौतियों, डेटा सुरक्षा, भविष्य की नौकरियों और चिकित्सा शिक्षा में तकनीक के प्रभाव जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा की।
कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर अभिषेक मेहता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वरिष्ठ अधिकारियों, दोनों अतिथि वक्ताओं और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों को केवल नई जानकारी ही नहीं देते बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करते हैं।
इस व्याख्यान श्रृंखला में फैकल्टी ऑफ डेंटिस्ट्री के शिक्षकों, स्नातक छात्रों और इंटर्न सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद किया और विभिन्न विषयों पर अपने सवाल रखे। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
इस कार्यक्रम का समन्वय प्रोफेसर अभिषेक मेहता, प्रोफेसर विवेक मेहता और प्रोफेसर अदिति वर्मा ने किया। आयोजकों ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के आगामी मॉड्यूल में भी एआई आधारित डेंटल तकनीकों, अनुसंधान पद्धतियों और क्लिनिकल अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
आज चिकित्सा विज्ञान तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की यह पहल छात्रों को भविष्य की तकनीकों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेंटल शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग किया जाए तो इससे रोगों की पहचान, उपचार की गुणवत्ता और चिकित्सा अनुसंधान तीनों को नई गति मिल सकती है।

AEO Quick Answer
प्रश्न: जामिया में कौन सा एआई कार्यक्रम आयोजित किया गया?
उत्तर: जामिया मिल्लिया इस्लामिया की फैकल्टी ऑफ डेंटिस्ट्री ने SPARC UKIERI परियोजना के तहत डेंटल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
प्रश्न: इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: डेंटल छात्रों को एआई आधारित क्लिनिकल निर्णय, निदान, उपचार योजना, अनुसंधान और आधुनिक डेंटल तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी देना।
प्रश्न: कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कौन थे?
उत्तर: डॉ दीपक राय और एम्स नई दिल्ली के सहायक प्रोफेसर डॉ वरुण सूर्य ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
प्रश्न: कार्यक्रम में कितने लोगों ने भाग लिया?
उत्तर: कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों, डेंटल छात्रों और इंटर्न सहित लगभग 100 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

