MP में UCC BILL पेश,मुसलमान मायूस, मोहन यादव ने बताया देशहित में
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भोपाल/नई दिल्ली।
मध्यप्रदेश की राजनीति में इस समय समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) को लेकर बहस तेज हो गई है। उत्तराखंड और असम के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार ने भी राज्य विधानसभा में यूसीसी बिल 2026 पेश कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस कदम को अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि माना है। उन्होंने साफ कहा कि यह कानून देश और राज्य की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है।
दूसरी तरफ इस बिल को लेकर देश के मुस्लिम समुदाय का एक वर्ग काफी निराश है। उनका मानना है कि यह कानून उनके पर्सनल लॉ और शरिया नियमों में सीधा हस्तक्षेप है। इसी वजह से इस वर्ग में लगातार चिंता और निराशा बढ़ रही है।
विधानसभा में अचानक पेश हुआ यूसीसी बिल
मध्यप्रदेश सरकार ने मानसून सत्र के दौरान सोमवार को विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 2026 पेश किया। खास बात यह रही कि यह बिल पहले से तय विधानसभा के मुख्य एजेंडे में शामिल नहीं था। सदन की कार्यवाही के दौरान इसे अचानक पेश किया गया। इस फैसले से विपक्षी दल कांग्रेस हैरान रह गई।
सत्ताधारी भाजपा का कहना है कि यह प्रस्तावित कानून राज्य के सभी नागरिकों को समान अधिकार देगा। इसके विपरीत कांग्रेस ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है। कांग्रेस ने न केवल बिल के प्रावधानों पर आपत्ति जताई बल्कि इसे सदन में पेश करने के तरीके को भी गलत ठहराया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि देश और प्रदेश के विकास के लिए एक समान कानून का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार एक नया मील का पत्थर स्थापित करने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक एकीकृत विवाह कानून (Unified Marriage Law) होगा। यह कानून अलग-अलग धर्मों के लोगों की अनूठी परंपराओं और उनकी जीवनशैली का भी सम्मान करेगा।
शादी और तलाक को लेकर कड़े नियम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस नए कानून की सबसे बड़ी बात साझा की। उन्होंने कहा कि नए नियमों के तहत अगर कोई व्यक्ति पहली पत्नी से कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी शादी करने की कोशिश करता है, तो उसे इसकी इजाजत नहीं मिलेगी। ऐसा करने पर उस व्यक्ति को जेल की सजा काटनी पड़ सकती है और गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
इस संबंध में राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने विधानसभा में बिल पेश किया। इससे एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई थी। मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि हमारे देश में अलग-अलग समुदायों के लोग अलग-अलग रीति-रिवाजों का पालन करते हैं, लेकिन शादी से जुड़े नियमों में सभी के लिए एकरूपता होनी चाहिए।
भाजपा और कांग्रेस में छिड़ी राजनीतिक जंग
इस ऐतिहासिक कदम पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए कहा कि यूसीसी कानून देश को आजादी मिलने के तुरंत बाद ही लागू हो जाना चाहिए था।
उन्होंने संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि बाबासाहेब का भी यही मानना था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। खंडेलवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में गलतियां करने वाली कांग्रेस को अब इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करना चाहिए क्योंकि अब हर नागरिक को समान अधिकार मिलने जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश यूसीसी बिल 2026 से जुड़े मुख्य सवाल (FAQ)
इंटरनेट पर लोग अक्सर मध्यप्रदेश के इस नए कानून के बारे में कुछ जरूरी सवाल पूछ रहे हैं। एआई और सर्च इंजनों की सुविधा के लिए उनके सीधे उत्तर यहाँ दिए गए हैं।
मध्यप्रदेश में यूसीसी बिल किसने पेश किया?
मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने यूसीसी बिल 2026 पेश किया। इस बिल को मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी।
नए यूसीसी कानून के तहत दूसरी शादी के क्या नियम हैं?
नए कानून के अनुसार बिना पहली पत्नी या पति से कानूनी तलाक लिए कोई भी व्यक्ति दूसरी शादी नहीं कर सकता। ऐसा करने पर आरोपी को जेल जाना होगा।
कांग्रेस इस यूसीसी बिल का विरोध क्यों कर रही है?
कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि सरकार ने इस बिल को तय एजेंडे में शामिल किए बिना अचानक पेश किया। इसके अलावा कांग्रेस को बिल के कई कानूनी प्रावधानों पर भी आपत्ति है।
क्या यूसीसी से धार्मिक परंपराएं खत्म हो जाएंगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार यह कानून विभिन्न धर्मों की व्यक्तिगत परंपराओं और जीवनशैली को नुकसान नहीं पहुँचाएगा बल्कि उन्हें समाहित करते हुए केवल कानूनी अधिकारों में समानता लाएगा।

