प्रह्लाद जोशी: शिक्षा मंत्रालय एक बार फिर आरएसएस के पुराने कार्यकर्ता के हाथ
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की कमान एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े पुराने चेहरे को सौंप दी गई है। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार ने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया है। प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक सफर और उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि लंबे समय से संघ परिवार के इर्द-गिर्द रही है। ऐसे वक्त में जब देश का शिक्षा महकमा तमाम तरह के विवादों और प्रशासनिक फेरबदल से गुजर रहा है, एक पक्के संघ स्वयंसेवक को यह जिम्मेदारी मिलना राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा का विषय बन गया है।
बचपन से आरएसएस से जुड़ाव और पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर में हुआ था। उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में नौकरी करते थे। घर का माहौल साधारण था, लेकिन प्रह्लाद जोशी बहुत कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आ गए थे। उन्होंने बचपन से ही आरएसएस की शाखाओं में जाना शुरू कर दिया था। संघ के विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। यहीं से उनकी संगठनात्मक क्षमता और वैचारिक सुदृढ़ता का विकास हुआ। संघ की शाखाओं और शखा संस्कृति ने उनके राजनीतिक जीवन की नींव तैयार की, जिसके बाद वह धीरे-धीरे जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी के मुख्यधारा संगठन से पूरी तरह जुड़ते चले गए।

हुब्बल्ली ईदगाह मैदान और तिरंगा आंदोलन से मिली पहचान
प्रह्लाद जोशी को मुख्यधारा की राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान 1990 के दशक के शुरुआती दौर में मिली। कर्नाटक के हुब्बल्ली स्थित ईदगाह मैदान (जिसे कित्तूर रानी चेन्नम्मा मैदान भी कहा जाता है) में तिरंगा फहराने को लेकर चले ऐतिहासिक आंदोलन में उन्होंने बहुत आक्रामक और मुख्य भूमिका निभाई थी। साल 1992 से 1994 के बीच चले इस तिरंगा आंदोलन ने दक्षिण भारत की राजनीति में भूचाल ला दिया था। इस आंदोलन ने प्रह्लाद जोशी को कर्नाटक के एक कद्दावर और आक्रामक हिंदूवादी नेता के रूप में स्थापित कर दिया।
इसके साथ ही उन्होंने उस दौर में कश्मीर बचाओ आंदोलन का भी खुलकर नेतृत्व किया था। इन आंदोलनों की वजह से वह राज्य के कोने-कोने में एक चर्चित चेहरा बन गए। इन तीखे वैचारिक आंदोलनों से निकलने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पार्टी संगठन में धारवाड़ जिले के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली।
🚨 Meet India’s new Education Minister — Pralhad Joshi! 🇮🇳📚
— Uday Kumar Roy 🇮🇳 (@udaykumarroy) July 25, 2026
The Left lobby’s happiness didn’t even last 24 hours! 😂
Modi Ji basically said: “Not today.” 😎🔥
This is the RSS.
Its roots run so deep that attempts to eliminate it from the political game have only made it… pic.twitter.com/NQQ9ndJSRy
चुनावी राजनीति और लंबा प्रशासनिक अनुभव
अपने शुरुआती जीवन में व्यापार से जुड़े रहे प्रह्लाद जोशी ने साल 2004 में पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार को शिकस्त दी। तब से लेकर आज तक वह लगातार पांच बार इस सीट से सांसद चुने जाते रहे हैं। साल 2009 के आम चुनावों में जब देश भर के कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था, तब प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक में भारी अंतर से जीत दर्ज करके अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का अहसास कराया था।
साल 2014 से 2016 के बीच उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी संगठन की कमान संभाली। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में उन्हें लगातार अहम और भारी-भरकम मंत्रालय सौंपे गए। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी प्रशासनिक दक्षता साबित की। वर्तमान में वह शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय के सामने खड़ी नई चुनौतियां
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल के दौरान शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर देश भर में कई तरह की चर्चाएं रहीं। सीबीएसई पाठ्यक्रम में बदलाव और इतिहास से जुड़े अध्यायों को लेकर आलोचकों ने लगातार सवाल उठाए। हाल के दिनों में नीट परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों को लेकर देश भर के छात्रों और युवाओं में भारी असंतोष देखा गया। इसी छात्र आक्रोश और तीखे विरोध प्रदर्शनों के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री को पद से हटना पड़ा।
ये हैं हमारे नए शिक्षा मंत्री। और इनका Education Level
— I am Janvi (@jaanvii0) July 26, 2026
क्या RSS में सारे अनपढ़ जवान होते है। pic.twitter.com/9mJ2OlDArM
अब प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के करोड़ों विद्यार्थियों का शिक्षा व्यवस्था से डगमगाया हुआ भरोसा फिर से कायम करने की है। परीक्षा प्रणाली में पूरी तरह पारदर्शिता लाना, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की कार्यशैली को सुधारना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सही दिशा में आगे बढ़ाना उनके लिए आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपनी संघ पृष्ठभूमि और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले प्रह्लाद जोशी इस नई जिम्मेदारी को किस प्रकार निभाते हैं, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।

