धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में पहला कदम, जमीयत ए इस्लामी हिंद का बड़ा बयान
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। इस घटनाक्रम पर जमात ए इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस कदम का स्वागत किया है। सलीम इंजीनियर ने कहा कि यह फैसला बहुत पहले आ जाना चाहिए था। हालांकि देर से उठाया गया यह कदम भी प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ी शुरुआत है।
प्रोफेसर सलीम ने जोर देकर कहा कि केवल एक मंत्री के पद छोड़ने से देश की पूरी शिक्षा प्रणाली के संकट का समाधान नहीं हो जाएगा। इसके लिए पूरे तंत्र में बुनियादी बदलाव करने होंगे। उन्होंने छात्र संगठनों और युवाओं से अपनी मांगों को मनवाने के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की है।

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परीक्षा प्रणाली पर उठा भरोसा और मंत्री का त्यागपत्र
देशभर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में धांधली के आरोप लगे थे। इसके बाद से ही छात्र और युवा संगठन सड़कों पर उतर आए थे। नई दिल्ली के जंतर मंतर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में कई हफ्तों से विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। लगातार बढ़ते जनदबाव और छात्रों के गुस्से को देखते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अंततः अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया।
जमात ए इस्लामी हिंद की ओर से जारी एक प्रेस बयान में प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बार-बार आ रही खामियों के कारण छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका था। ऐसे में नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा देना ही सही कदम था। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम स्वीकार करता है कि युवाओं द्वारा उठाए गए सवाल बिल्कुल जायज और गंभीर थे।
युवा शक्ति की जीत और जनरेशन जी को बधाई
प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने आंदोलन में शामिल सभी युवाओं और छात्र संगठनों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जनरेशन जी के छात्रों ने जिस धैर्य, अनुशासन और लोकतांत्रिक भावना के साथ अपनी बात रखी है, वह वाकई सराहनीय है। कड़कती धूप और तमाम दिक्कतों के बावजूद युवाओं ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।
छात्रों के इस दृढ़ संकल्प ने साबित कर दिया है कि देश का युवा अपनी पढ़ाई, भविष्य और व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कितना सजग है। युवाओं के इस दबाव के कारण ही सरकार को झुकना पड़ा और केंद्रीय मंत्री को त्यागपत्र देना पड़ा।
केवल व्यक्ति बदलना काफी नहीं, व्यवस्था बदलनी होगी
जमात ए इस्लामी हिंद ने स्पष्ट किया है कि केवल एक चेहरे को बदल देने से शिक्षा क्षेत्र की गहरी जड़ें जमा चुकी बीमारियां दूर नहीं होंगी। देश को केवल प्रतीकात्मक कदमों की नहीं, बल्कि ठोस और दूरगामी सुधारों की जरूरत है।
सरकार को तुरंत ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और अन्य सरकारी परीक्षा निकायों की साख वापस कायम हो सके। इसके लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम उठाए जाने की मांग की गई है:
- पारदर्शी प्रक्रिया: प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर केंद्रों तक पहुंचाने और मूल्यांकन तक की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए।
- विशेषज्ञों की भागीदारी: नीति निर्माण में केवल नौकरशाहों को शामिल करने के बजाय शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, अनुभवी शिक्षकों और प्रशासनिक विशेषज्ञों की सलाह ली जाए।
- जवाबदेही तय करना: परीक्षा में किसी भी स्तर पर चूक होने पर संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हो।
- समान अवसर: एक ऐसी शिक्षा नीति तैयार की जाए जो देश के हर वर्ग के छात्र के लिए सुलभ हो और सबको आगे बढ़ने के बराबर मौके दे।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग
बयान में दिल्ली और बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर भी गहरी चिंता जताई गई है। प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे छात्रों पर पुलिस ने बेवजह लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और कई छात्रों को हिरासत में लिया।
उन्होंने मांग की कि पुलिस प्रशासन द्वारा की गई इस ज्यादती की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। जिन पुलिस अधिकारियों या कर्मचारियों ने अपनी सीमा का उल्लंघन कर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया है, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
शांतिपूर्ण और रचनात्मक संघर्ष जारी रखने की अपील
अपने वक्तव्य के अंत में जमात ए इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने देश के सभी छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से अपील की है कि वे इस आंदोलन को रुकने न दें। उन्होंने कहा कि मंत्री का इस्तीफा केवल पहला पड़ाव है, अंतिम लक्ष्य नहीं।
जब तक देश में एक पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त शिक्षा प्रणाली लागू नहीं हो जाती, तब तक यह लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहना चाहिए। देश के विकास के लिए एक ऐसी व्यवस्था बेहद जरूरी है जो हर प्रतिभावान छात्र के सपनों की रक्षा कर सके और उसे बिना किसी डर या धांधली के आगे बढ़ने का मौका दे।

