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असम बाढ़ आपदा: सेलिब्रेटीज़ और धार्मिक संस्थानों ने खोली राहत की राह

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, गुवहाटी

असम के ऊपरी हिस्सों में इस समय विनाशकारी बाढ़ का भयंकर कहर देखने को मिल रहा है। आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक राज्य में 68 लोगों की मौत दर्ज हुई है। हालांकि स्थानीय स्तर पर और अनौपचारिक अनुमानों के मुताबिक मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा बताया जा रहा है।

तबाही का आलम यह है कि हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं। उनके आशियाने, खेत, पशुधन और रोजगार सब पानी में समा चुके हैं। चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव और शिवसागर जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। सड़क, पुल और तटबंध पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। संकट की इस घड़ी में समाज के हर तबके से मदद के हाथ उठ रहे हैं।

        असम बाढ़ राहत कार्य: प्रमुख केंद्र एवं भूमिकाएं
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│              आपदा प्रभावित क्षेत्र (असम)               │
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│     नागरिक व सेलिब्रेटी     │             │    धार्मिक व सामाजिक संस्थान   │
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│ * आदिल हुसैन (सोशल मीडिया)│             │ * चोंतोक बोर मस्जिद     │
│ * पापोन (वैश्विक अपील)  │             │   (महिलाओं को आश्रय)     │
│ * दीपलीना डेका (राहत शिविर)│            │ * आमूला पट्टी मस्जिद    │
│                         │             │   (साझा रसोई सेवा)      │
│                         │             │ * बरखेती आलिया मदरसा    │
│                         │             │   (छात्रों का राहत अभियान)│
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आपदा में अपनों का दर्द: आदिल हुसैन का छलका गुस्सा

असम से ताल्लुक रखने वाले प्रसिद्ध अभिनेता आदिल हुसैन के अपने रिश्तेदार भी इस तबाही की चपेट में आ चुके हैं। शिवसागर में रहने वाली उनकी बड़ी बहन और भतीजी का घर पूरी तरह जलमग्न हो गया है। आदिल ने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए अपनी बेबसी और गहरा दुख जाहिर किया है।

आदिल हुसैन के अनुसार: “बचपन से ही मैं हर साल ऐसी विनाशकारी बाढ़ देखता आ रहा हूं, लेकिन इस बार की स्थिति बहुत भयावह है। मुझे यह समझ नहीं आता कि जब भारत अंतरिक्ष में चंद्रयान भेज सकता है, तो हमारे टाउन प्लानर और इंजीनियर असम की बाढ़ का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाल पाते? क्या सत्ता में बैठे लोगों को जनता की कोई फिक्र नहीं है?”

आदिल का मानना है कि इस निरंतर आती तबाही के पीछे अनियोजित शहरीकरण, जंगलों की कटाई और जलाशयों पर अवैध निर्माण मुख्य वजह हैं। उन्होंने असम को एक वैज्ञानिक बाढ़ प्रबंधन योजना की जरूरत बताई है।

बदरुद्दीन अजमल और सेलिब्रेटीज़ की भावुक अपील

शिवसागर में हालात का जायजा लेते हुए एआईयूडीएफ नेता बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि बीते 50 से 60 सालों में ऐसी भारी बारिश और बाढ़ उन्होंने नहीं देखी। लाखों लोग पानी में फंसे हैं और मवेशियों के मरने से हर तरफ दुर्गंध फैली हुई है।

दूसरी तरफ, मशहूर गायक पापोन ने भी वीडियो संदेश जारी कर देश और दुनिया से मदद मांगी है। पापोन लगातार जमीनी स्तर पर राहत सामग्री जुटाने और वितरण में जुटे हुए हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंची असमिया गायिका दीपलीना डेका भी एक पीड़ित महिला का दर्द सुनकर अपने आंसू रोक नहीं पाईं और उनसे गले लगकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने धार्मिक स्थल

आपदा के इस दौर में मानवता की कई दिल को छू लेने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। धर्म की दीवारें भूलकर मस्जिद, मदरसे और गुरुद्वारे पीड़ितों की सेवा में जुट गए हैं।

  • चोंतोक बोर मस्जिद (शिवसागर): इस मस्जिद ने परंपरा से हटकर बाढ़ प्रभावित महिलाओं को ठहराने के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।
  • आमूला पट्टी पुरानी मस्जिद (नाजिरा): यह मस्जिद समिति पिछले एक हफ्ते से लगातार 24 घंटे लंगर चला रही है। यहां से आसपास के गांवों के सैकड़ों बाढ़ पीड़ित हिंदू परिवारों को भी दोनों वक्त का ताजा खाना पहुंचाया जा रहा है।
  • सम्मान की मिसाल: मस्जिद परिसर में खाना बनाने के बाद, हिंदू भाइयों की भावनाओं और सुविधा का ध्यान रखते हुए सामुदायिक रसोई को पास के एक घर में स्थानांतरित कर दिया गया।
  • बरखेती आलिया मदरसा (नलबाड़ी): दारुल हदीस पुरबा बरखेती आलिया मदरसे के छात्रों और शिक्षकों ने आपस में दान जुटाया और फिर आसपास के लोगों के सहयोग से ऊपरी असम के बाढ़ पीड़ितों के लिए कपड़े, राशन और जरूरी सामान भेजे।

मौजूदा स्थिति और आगे का रास्ता

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक भले ही 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हों और आधिकारिक मौतें 68 बताई जा रही हों, लेकिन जमीन पर तबाही का असर इससे कहीं ज्यादा बड़ा है। पिछले दो दिनों से कुछ इलाकों में पानी घटने लगा है, लेकिन इसके बाद महामारी फैलने का खतरा और बेघर हुए लोगों का पुनर्वास एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।

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