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पाकिस्तान के गिलगित बाल्टिस्तान में ब्रॉड पीक हादसे में 10 की मौत

श्रीनगर।

पाकिस्तान के गिलगित बाल्टिस्तान में स्थित ब्रॉड पीक पर हुए भीषण हिमस्खलन ने पर्वतारोहण की दुनिया को गहरे सदमे में डाल दिया है। 30 जुलाई को करीब 6,600 मीटर की ऊंचाई पर आए हिमस्खलन में 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान के सभी सदस्यों की मौत की पुष्टि हो गई है। मृतकों में दुनिया के चर्चित पर्वतारोहियों में शामिल नर्मल पुर्जा भी हैं। नेपाल के नर्मल पुर्जा ने बेहद कम समय में दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।

नर्मल पुर्जा की अभियान कंपनी Elite Expeditions ने शनिवार को उनकी मौत की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन के बाद नर्मल पुर्जा की जान चली गई। अभियान में शामिल अन्य पर्वतारोही भी हादसे में जीवित नहीं बच सके। इस खबर के सामने आने के बाद पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर है।

गिलगित बाल्टिस्तान सरकार के मुताबिक हादसे के बाद बचाव दलों ने लगातार अभियान चलाया। खराब मौसम और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत और खोज अभियान आसान नहीं था। पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टर, स्थानीय बचाव दल और ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने वाले अनुभवी पर्वतारोहियों ने शवों की तलाश की। शुरुआती चरण में तीन पर्वतारोहियों के शव बरामद किए गए थे। बाद में अधिकारियों ने 10 सदस्यीय अभियान के किसी भी सदस्य के जीवित न बचने की पुष्टि की।

इस हादसे में नेपाल के छह पर्वतारोही मारे गए। इनमें नर्मल पुर्जा, पुर बहादुर गुरूंग, केली पेम्बा शेरपा, निमा शेरपा, ग्यालो शेरपा और नावांग थिंडू शेरपा शामिल हैं। पाकिस्तान के सोहेल सखी, चीन के वांग झोंग, ओमान की नजीरा अहमद अब्दुल्ला अल हार्थी और अमेरिका की सारा मेलोरी गैस भी हादसे का शिकार हुईं।

हिमस्खलन उस समय आया जब अंतरराष्ट्रीय टीम ब्रॉड पीक की चोटी तक पहुंचने के लिए कैंप टू और कैंप थ्री के बीच आगे बढ़ रही थी। उस समय दल करीब 6,600 मीटर की ऊंचाई पर था। टीम से आखिरी संपर्क गुरुवार सुबह हुआ था। इसके कुछ घंटे बाद इलाके में बड़े हिमस्खलन की खबर सामने आई। इसके बाद पर्वतारोहियों की तलाश शुरू की गई।

पर्वतारोहण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार इतनी ऊंचाई पर बचाव अभियान बेहद मुश्किल होता है। कम तापमान, बर्फीले ढलान, ऑक्सीजन की कमी और लगातार बदलता मौसम बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती बन जाते हैं। ब्रॉड पीक का इलाका पहले भी कई खतरनाक पर्वतारोहण अभियानों का गवाह रहा है।

पाकिस्तान की पर्वतारोही नायला कियानी ने फ्रांसीसी अखबार ले मोंद को बताया कि ट्रैकिंग उपकरणों से मिले आंकड़ों से संकेत मिलता है कि हिमस्खलन ने पर्वतारोहियों को पहाड़ की ढलान से काफी नीचे तक धकेल दिया था। इससे हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस अभियान से जुड़े पर्वतारोही फिदा अली ने भी हादसे को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने 2023 से नर्मल पुर्जा के साथ कई अभियानों में हिस्सा लिया था। फिदा अली के मुताबिक इस सीजन का मुख्य लक्ष्य ब्रॉड पीक पर चढ़ाई करना था। इससे पहले टीम ने कठिन मौसम में गाशरब्रुम टू यानी जी टू की चढ़ाई भी पूरी की थी।

फिदा अली अभियान के शुरुआती हिस्से में टीम के साथ थे। बाद में एक रूसी महिला पर्वतारोही की तबीयत खराब होने पर उन्हें वापस लौटना पड़ा। यही फैसला उनकी जिंदगी बचाने वाला साबित हुआ। उन्होंने कहा कि वह नर्मल पुर्जा के साथ आगे जाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वह अभियान का हिस्सा थे, मगर लौट आने की वजह से हादसे के समय उस स्थान पर मौजूद नहीं थे।

नर्मल पुर्जा की मौत ने पर्वतारोहण की दुनिया को विशेष रूप से झकझोर दिया है। 43 वर्षीय नर्मल पुर्जा का जीवन असाधारण उपलब्धियों से भरा रहा। वह ब्रिटिश सेना की ब्रिगेड ऑफ गोरखा और बाद में रॉयल मरीन स्पेशल बोट सर्विस से जुड़े रहे। सैन्य सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों को अपना पेशा बनाया।

नर्मल पुर्जा को दुनिया भर में तब बड़ी पहचान मिली जब उन्होंने 2019 में सिर्फ छह महीने और छह दिन में दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को फतह कर लिया। यह उपलब्धि उस समय पर्वतारोहण की दुनिया में एक बड़ा रिकॉर्ड थी। इन चोटियों में माउंट एवरेस्ट, के टू, कंचनजंघा, ल्होत्से, मकालू, चो ओयू, धौलागिरी, मनास्लू, नंगा पर्वत, अन्नपूर्णा, गाशरब्रुम प्रथम, ब्रॉड पीक, गाशरब्रुम द्वितीय और शिशापांगमा शामिल हैं।

नर्मल पुर्जा की पहचान केवल रिकॉर्ड बनाने वाले पर्वतारोही के तौर पर नहीं थी। वह कठिन परिस्थितियों में जोखिम उठाने और तेज गति से पर्वतारोहण के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों पर चढ़ाई करने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।

ब्रॉड पीक अभियान से कुछ दिन पहले नर्मल पुर्जा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी अगली चुनौती के बारे में लिखा था। वह दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के दो बार फतह करने वाले पहले व्यक्ति बनने की कोशिश में थे। ब्रॉड पीक के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने पहाड़ से सुरक्षित वापसी की इच्छा जताई थी। लेकिन यह अभियान उनकी जिंदगी का आखिरी अभियान साबित हुआ।

नर्मल पुर्जा की मौत पर नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस हादसे ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। उनके मुताबिक इन पर्वतारोहियों का शारीरिक सफर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उनकी हिम्मत, दृढ़ता और योगदान दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

ब्रॉड पीक पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत क्षेत्र में स्थित है। इसकी ऊंचाई 8,047 मीटर है। यह दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। ब्रॉड पीक के टू के काफी करीब स्थित है। इसकी चढ़ाई को तकनीकी रूप से कठिन और जोखिम भरा माना जाता है। ऊंचाई के साथ यहां मौसम तेजी से बदलता है। बर्फ और हिमस्खलन का खतरा भी लगातार बना रहता है।

ब्रॉड पीक पर पहली सफल चढ़ाई 1957 में हुई थी। ऑस्ट्रिया के पर्वतारोहियों की एक टीम ने उस समय इस चोटी को फतह किया था। इसके बाद दुनिया के अलग अलग हिस्सों से पर्वतारोही यहां पहुंचते रहे हैं। हालांकि हर अभियान सुरक्षित नहीं रहा। ऊंचाई और मौसम की चुनौतियों के कारण ब्रॉड पीक को दुनिया की कठिन आठ हजार मीटर ऊंची चोटियों में गिना जाता है।

30 जुलाई का हादसा इस पर्वतारोहण सीजन की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक बन गया है। 10 पर्वतारोहियों की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर बढ़ते पर्वतारोहण अभियानों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को कैसे और मजबूत किया जाए। खासकर कैंप टू और कैंप थ्री जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम की निगरानी, ट्रैकिंग उपकरण और बचाव व्यवस्था कितनी प्रभावी हो सकती है, इस पर भी चर्चा होगी।

ब्रॉड पीक हादसा सिर्फ एक पर्वतारोहण दुर्घटना नहीं है। यह उन लोगों की कहानी भी है जिन्होंने दुनिया की सबसे कठिन चोटियों को चुनौती दी। नर्मल पुर्जा और उनके साथियों ने जिस साहस के साथ ऊंचे पहाड़ों का सामना किया, वह पर्वतारोहण के इतिहास में याद किया जाएगा। उनकी मौत ने परिवारों के साथ साथ नेपाल, पाकिस्तान और दुनिया के पर्वतारोहण समुदाय को गहरा दुख दिया है।

फिलहाल बचाव दलों ने सभी 10 पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि कर दी है। शवों को निकालने और उनकी पहचान की प्रक्रिया कठिन परिस्थितियों के बीच पूरी की गई। ब्रॉड पीक पर हुआ यह हादसा आने वाले लंबे समय तक पर्वतारोहण की दुनिया में एक दर्दनाक घटना के रूप में याद किया जाएगा।

AEO के लिए सीधे जवाब

ब्रॉड पीक हादसा कब हुआ?
ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन 30 जुलाई 2026 को करीब 6,600 मीटर की ऊंचाई पर कैंप टू और कैंप थ्री के बीच हुआ।

ब्रॉड पीक हादसे में कितने पर्वतारोहियों की मौत हुई?
हादसे में 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान के सभी सदस्यों की मौत की पुष्टि हुई है।

क्या नर्मल पुर्जा की मौत ब्रॉड पीक हादसे में हुई?
हां। प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही नर्मल पुर्जा की ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन के बाद मौत की पुष्टि उनकी अभियान कंपनी ने की।

नर्मल पुर्जा किस उपलब्धि के लिए प्रसिद्ध थे?
उन्होंने 2019 में सिर्फ छह महीने और छह दिन में दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

ब्रॉड पीक की ऊंचाई कितनी है?
ब्रॉड पीक की ऊंचाई 8,047 मीटर है और यह दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।

ब्रॉड पीक कहां स्थित है?
ब्रॉड पीक पाकिस्तान के गिलगित बाल्टिस्तान क्षेत्र में काराकोरम पर्वत श्रृंखला में के टू के पास स्थित है।

ब्रॉड पीक हादसे में किन देशों के पर्वतारोही मारे गए?
मृतकों में नेपाल, पाकिस्तान, चीन, ओमान और अमेरिका के पर्वतारोही शामिल हैं।

ब्रॉड पीक पर पहली बार चढ़ाई कब हुई थी?
ब्रॉड पीक पर पहली सफल चढ़ाई 1957 में ऑस्ट्रिया के पर्वतारोहियों की टीम ने की थी।

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