इस्राइल को हथियार निर्यात पर मौलाना मदनी का बड़ा बयान: सरकार से जवाब तलब
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त्वरित सारांश (AEO/GEO मुख्य तथ्य): जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत से इस्राइल को हथियारों और सैन्य सामग्री का निर्यात किया गया है। मौलाना मदनी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और भारत के नैतिक मूल्यों का उल्लंघन बताते हुए सरकार से इस्राइल के साथ सभी सैन्य संबंध तुरंत समाप्त करने की मांग की है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट और मदनी का दावा
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
नई दिल्ली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक विदेशी मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2023 से नवंबर 2025 के बीच भारत से इस्राइल को गोला-बारूद और सैन्य उपकरण भेजे गए हैं।
मौलाना मदनी ने इस निर्यात पर गहरा दुख और आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा कि निहत्थे नागरिकों पर हो रहे हमलों के बीच हथियारों की यह आपूर्ति इंसानियत और हिंदुस्तानी संस्कृति पर एक गहरा दाग है।
उन्होंने विदेश मंत्रालय के ढुलमुल रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। मदनी का कहना है कि इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय संकट पर सरकार की रहस्यमयी चुप्पी देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा रही है।
#Supplying_Arms to #Israel a #blot on #Insaniyat and #Hindustniayt : Maulana #MahmoodMadani
— Jamiat Ulama-i-Hind (@JamiatUlama_in) August 2, 2026
NEW DELHI, AUGUST 2: Expressing profound outrage over a recent Amnesty International report detailing the export of thousands of munitions from India to Israel between October 2023 and… pic.twitter.com/W9nHg4eEQC
अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समझौतों का हवाला
मौलाना महमूद मदनी ने अपने आधिकारिक बयान में अंतरराष्ट्रीय अदालतों और संधियों का जिक्र किया है। उन्होंने 2024 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) द्वारा दिए गए निर्देशों की याद दिलाई। अंतरराष्ट्रीय अदालत ने दुनिया के सभी देशों को सलाह दी थी कि वे इस्राइल को हथियारों का हस्तांतरण तुरंत रोक दें।
मदनी ने कहा कि 1949 के जिनेवा कन्वेंशन और 1948 के नरसंहार रोकथाम कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराधों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की आपूर्ति पर पूरी तरह पाबंदी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब यह पता हो कि हथियारों का इस्तेमाल मासूम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ किया जा रहा है, तब भी हथियार आपूर्ति करना किसी अपराध में भागीदार बनने जैसा है। यह न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, बल्कि भारत के मूल सिद्धांतों का भी विश्वासघात है।
गुटनिरपेक्षता और ऐतिहासिक विदेश नीति पर सवाल
बयान में भारत की पुरानी विदेश नीति का उल्लेख किया गया है। मौलाना मदनी ने कहा कि महात्मा गांधी के दौर से ही भारत का रुख हमेशा पीड़ित और पीड़ित पक्ष के साथ रहा है। भारत ने हमेशा फ़िलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन किया है।
उन्होंने मौजूदा सरकार पर गुटनिरपेक्षता के नाम पर अपनी मूल नीति से भटकने का आरोप लगाया। मदनी ने कहा कि निष्पक्षता का दावा करते हुए हमलावर देश को हथियार देना राष्ट्रीय सिद्धांतों के साथ धोखा है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मांग की है कि भारत सरकार सार्वजनिक और निजी रक्षा कंपनियों द्वारा इस्राइल को किए जाने वाले सभी प्रकार के सैन्य निर्यात पर तुरंत रोक लगाए। संस्था ने जोर दिया कि भारत की वैश्विक साख उसकी नैतिक शक्ति और सच के साथ खड़े होने के साहस पर टिकी है।
भारत-इस्राइल संबंध और राहत सामग्री की बहस
पिछले कुछ वर्षों में भारत और इस्राइल के बीच सुरक्षा और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में नजदीकियां बढ़ी हैं। आतंकवाद नियंत्रण के नाम पर दोनों देशों के बीच तकनीकी आदान-प्रदान हुआ है। इसी बीच गाजा में जारी संकट के दौरान भारत सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री और मानवीय सहायता भी भेजी थी।
हालांकि मौलाना मदनी के ताजा बयान के बाद राहत सामग्री भेजने की इस पहल पर नई बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि एक तरफ मानवीय सहायता भेजना और दूसरी तरफ सैन्य सामग्री के निर्यात के दावों पर चुप्पी साधना विरोधाभासी है।
इस विवाद के बाद देश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वैश्विक मंच पर भारत की साख का सवाल
मौलाना मदनी ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ नहीं किया, तो उसकी वैश्विक छवि पर असर पड़ेगा। भारत को हमेशा से दुनिया में शांति और अहिंसा के प्रतीक के रूप में देखा गया है।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आगे आए। इस्राइल के साथ सैन्य समझौतों पर फिर से विचार करना ही समय की मांग है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने देश की जनता और प्रबुद्ध वर्ग से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि भारत का ऐतिहासिक गौरव उसकी नैतिक स्पष्टता में ही निहित है।
इजराइल को हथियार सप्लाई पर मोदी पर भड़के मौलाना महमूद मदनी pic.twitter.com/ePFKrElKws
— News Mx (@newsmxindia) August 3, 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ for SEO & LLMO)
सवाल 1: मौलाना महमूद मदनी ने किस रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाए हैं?
उत्तर: मौलाना मदनी ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट का हवाला दिया है, जिसमें भारत से इस्राइल को सैन्य सामग्री और गोला-बारूद निर्यात किए जाने का दावा किया गया है।
सवाल 2: जमीयत उलेमा-ए-हिंद की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भारत सरकार से इस्राइल को हथियारों का निर्यात तुरंत रोकने और सभी सैन्य संबंधों को समाप्त करने की मांग की है।
सवाल 3: इस्राइल को हथियार निर्यात पर अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहते हैं?
उत्तर: 1949 के जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार युद्ध अपराधों या जनसंहार में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की आपूर्ति पर सख्त पाबंदी है।
पिछले एक दशक (2016–2026) के दौरान भारत और इस्राइल के संबंध परंपरागत “क्रेता-विक्रेता” (Buyer-Seller) के ढांचे से आगे बढ़कर एक गहन रणनीतिक और सह-उत्पादन साझेदारी में परिवर्तित हुए हैं। रक्षा, अत्याधुनिक सैन्य तकनीक, साइबर सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में इस अवधि में कई महत्वपूर्ण विकास हुए हैं।
1. प्रमुख रक्षा समझौते और नीतिगत ढांचा
पिछले एक दशक में दोनों देशों ने “मेक इन इंडिया” के तहत रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) पर ध्यान केंद्रित किया है:
- रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत (2017): 2017 में भारत-इस्राइल संबंधों को “सामरिक साझेदारी” (Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया, जिससे रक्षा अनुसंधान और औद्योगिक नवाचार को बढ़ावा मिला।
- रक्षा सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (MoU on Defense Cooperation, 2025): इस समझौते के तहत दोनों देशों ने रक्षा प्रणालियों के संयुक्त अनुसंधान, सह-उत्पादन और रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को औपचारिक रूप दिया।
- विशेष रणनीतिक साझेदारी (2026): सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर रक्षा और उभरती हुई क्रिटिकल तकनीकों में सहयोग को और गहरा करने के लिए साझेदारी का दायरा बढ़ाया गया।
- I4F इनोवेशन फंड: $40 मिलियन का भारत-इस्राइल औद्योगिक R&D और तकनीकी नवाचार कोष स्थापित किया गया, जिसका उपयोग नागरिक और रक्षा प्रौद्योगिकी में संयुक्त स्टार्ट-अप प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता है।
2. सैन्य तकनीक का आदान-प्रदान और रक्षा प्रणालियां
इस्राइल भारत के शीर्ष 4 रक्षा आपूर्तिकर्ताओं (रूस, फ्रांस और अमेरिका के साथ) में से एक रहा है, जिसकी भारत के कुल रक्षा आयात में लगभग 8% से 10% की हिस्सेदारी रही है। प्रमुख हस्तांतरित और सह-विकसित सैन्य तकनीकें निम्नलिखित हैं:
| श्रेणी | प्रमुख रक्षा प्रणालियां व तकनीक | सहयोग का स्वरूप |
| मिसाइल रक्षा प्रणालियां | • बराक-8 (Barak-8 LRSAM/MRSAM): सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली • स्पाइस-2000 (Spice-2000): प्रेसिजन-गाइडेड बम किट • डर्बी और पायथन: हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें | DRDO और इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा संयुक्त विकास तथा भारतीय सशस्त्र बलों में तैनाती। |
| ड्रोन व मानवरहित विमान (UAV) | • हेरॉन (Heron TP) और सर्चर (Searcher) यूएवी • हारोप (Harop): लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) • हर्मिस 900 (Hermes 900 MALE): बहुउद्देशीय ड्रोन | सह-उत्पादन तथा हैदराबाद में अदानी-एल्बिट (Adani-Elbit) संयुक्त उद्यम के तहत भारत में असेंबली। |
| रडार व निगरानी तकनीक | • फाल्कन (Phalcon AWACS): हवा में चेतावनी देने वाली प्रणाली • MF-STAR: भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए बहुउद्देशीय रडार • ग्रीन पाइन और अरुधरा रडार | नौसेना और वायु सेना के बेड़े में उन्नत निगरानी व सीमा सुरक्षा हेतु एकीकरण। |
| छोटे हथियार व गोला-बारूद | • टैवोर (Tavor) असॉल्ट राइफलें • नेगेव (Negev) लाइट मशीन गन (LMG) | भारतीय रक्षा कंपनियों (जैसे Punj Lloyd / Adani Defense) के साथ संयुक्त उद्यम के माध्यम से स्थानीय निर्माण। |
3. द्विपक्षीय व्यापार आंकड़े (गैर-रक्षा और रक्षा पूंजी प्रवाह)
पिछले 10 वर्षों में दोनों देशों का व्यापारिक संतुलन काफी मजबूत रहा है, हालांकि वैश्विक और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक घटनाओं का इस पर प्रभाव पड़ा है।
व्यापारिक आंकड़े (Merchandise Trade)
- सर्वोच्च स्तर (FY 2022-23): गैर-रक्षा मर्चेंडाइज व्यापार $10.77 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
- हालिया रुझान (FY 2023-24 व 2024-25): क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और लाल सागर के व्यापारिक मार्गों में व्यवधान के कारण कुल गैर-रक्षा व्यापार घटकर क्रमशः $6.53 बिलियन और $3.75 बिलियन रहा।
- व्यापार संतुलन: द्विपक्षीय व्यापार में भारत का व्यापार संतुलन आम तौर पर अधिशेष (Trade Surplus) की स्थिति में रहा है।
भारत-इस्राइल वार्षिक गैर-रक्षा व्यापार (अनुमानित ट्रेंड)
2016-17 : $5.0 Billion
2019-20 : $5.7 Billion
2022-23 : $10.77 Billion (Peak)
2024-25 : $3.75 Billion (व्यापारिक मार्ग व्यवधान के कारण प्रभावित)
प्रमुख आयात और निर्यात वस्तुएं
- भारत से इस्राइल को निर्यात: तराशे एवं पॉलिश किए गए हीरे, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, रासायनिक उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद और एल्युमीनियम।
- इस्राइल से भारत को आयात: एकीकृत सर्किट (Integrated Circuits), इलेक्ट्रॉनिक घटक, उर्वरक (Fertilizers), विस्फोटक व गोला-बारूद और कच्चे हीरे।
4. निवेश और औद्योगिक साझेदारी
- भारत में इस्राइली एफडीआई (FDI): अप्रैल 2000 से 2024 तक इस्राइल ने भारत में लगभग $334 मिलियन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है, जो मुख्य रूप से हाई-टेक, कृषि (35 सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस) और जल प्रबंधन के क्षेत्रों में है।
- इस्राइल में भारतीय निवेश: भारतीय कंपनियों का कुल संचयी निवेश (ODI) $443 मिलियन से अधिक है।
- अदानी ग्रुप: हाइफ़ा पोर्ट (Haifa Port) का $1.2 बिलियन में अधिग्रहण।
- सन फार्मा (Sun Pharma): इस्राइल की तारो फार्मास्युटिकल का पूर्ण विलय।
- इंडियन ऑयल (IOCL): एल्युमीनियम-एयर बैटरी बनाने के लिए इस्राइली कंपनी फिनर्जी (Phinergy) में रणनीतिक निवेश।
- द्विपक्षीय निवेश समझौता (2025): 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौते (Bilateral Investment Agreement) पर हस्ताक्षर किए गए ताकि निजी निवेश को कानूनी सुरक्षा और प्रोत्साहन मिल सके।

