यवतमाल से मुंबई पहुंची SEWA, शिक्षा को बनाया बदलाव का रास्ता
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, मुंबई
यवतमाल और नागपुर से शुरू हुई सामाजिक पहल SEWA अब मुंबई पहुंच गई है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के अलग अलग हिस्सों से आए लोगों ने संस्था की गतिविधियों को करीब से समझा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। हॉल पूरी तरह भरा हुआ था। वक्ताओं ने शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, युवाओं के रोजगार और समाज के जरूरतमंद लोगों की आर्थिक मदद जैसे मुद्दों पर बात की।

कार्यक्रम का एक बड़ा संदेश यह रहा कि SEWA की गतिविधियों को महाराष्ट्र के ज्यादा से ज्यादा शहरों और कस्बों तक पहुंचाया जाए। संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी एक शहर तक सीमित रहना नहीं है। कोशिश है कि शिक्षा और मार्गदर्शन से जुड़ी सुविधाएं उन युवाओं और परिवारों तक भी पहुंचें, जिन्हें इनकी जरूरत है।
मुंबई में हुए कार्यक्रम के बाद संस्था से जुड़े एक पदाधिकारी ने कार्यक्रम की तस्वीरें और अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए। उनके मुताबिक इस कार्यक्रम ने यह महसूस कराया कि समाज के अलग अलग पेशों से जुड़े लोगों के भीतर अपनी जिम्मेदारी को लेकर एक बेचैनी है। व्यापारी हों या राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग, बुजुर्ग हों या युवा, सभी के बीच यह सवाल दिखाई देता है कि समाज के विकास के लिए और क्या किया जा सकता है।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के अलग अलग इलाकों से लोग पहुंचे थे। उनके लिए यह सिर्फ एक सभा नहीं थी। यहां संस्था के काम को समझने और आगे अपने शहर में उसे शुरू करने पर चर्चा हुई। यही वजह रही कि कार्यक्रम के दौरान लंबे समय तक लोग वक्ताओं को ध्यान से सुनते रहे।
SEWA से जुड़े शेख निजामुद्दीन ने कार्यक्रम में एक घंटे से अधिक समय तक बात रखी। उनकी तकरीर का मुख्य जोर शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर था। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर किसी इलाके में बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा से जुड़ी कोई अच्छी पहल शुरू करनी है तो केवल चर्चा से काम नहीं चलेगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को आगे आना होगा।
मुंबई कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा कि जिस गंभीरता से लोगों ने पूरी बात सुनी, उससे यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र के कई शहरों में SEWA की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। उनका मानना है कि एक जगह का अनुभव दूसरी जगहों के लिए रास्ता दिखा सकता है।
SEWA की गतिविधियों में शिक्षा को विशेष स्थान दिया गया है। संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार बच्चों के बीच शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना सबसे जरूरी कामों में है। इसके लिए घर घर जाकर तालिमी बेदारी यानी शैक्षिक जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है।
इस अभियान का मकसद सिर्फ बच्चों को स्कूल भेजने तक सीमित नहीं है। परिवारों को यह समझाना भी इसका हिस्सा है कि शिक्षा आगे चलकर बच्चे के भविष्य को किस तरह बदल सकती है। पढ़ाई के साथ सही मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी और करियर के विकल्पों को समझना भी जरूरी है।
SEWA की एक प्रमुख पहल सिविल सर्विसेज कोचिंग से जुड़ी है। संस्था का लक्ष्य ऐसे युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देना है, जो प्रशासनिक सेवाओं में जाना चाहते हैं। सिविल सर्विसेज की परीक्षा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में मानी जाती है। इसमें सही मार्गदर्शन, नियमित पढ़ाई और लंबे समय तक तैयारी की जरूरत होती है।
ऐसे में कोचिंग और मार्गदर्शन की सुविधा छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हर छात्र महंगे शहरों में जाकर तैयारी नहीं कर सकता। स्थानीय स्तर पर अच्छी तैयारी की व्यवस्था होने से उन युवाओं को फायदा मिल सकता है, जिनके पास संसाधन सीमित हैं।
SEWA से जुड़े लोगों ने मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भी रिहायशी कोचिंग क्लास शुरू करने की बात कही है। इसका उद्देश्य मदरसा छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और आगे की पढ़ाई के लिए तैयार करना है। संस्था से जुड़े लोगों का मानना है कि धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर भी छात्रों को मिलने चाहिए।
इस सोच के पीछे एक व्यापक उद्देश्य है। समाज के ज्यादा से ज्यादा बच्चों और युवाओं को उनकी क्षमता के मुताबिक आगे बढ़ने का अवसर मिले। किसी बच्चे की आर्थिक स्थिति, उसका इलाका या उसके परिवार की परिस्थितियां उसकी शिक्षा के रास्ते में स्थायी बाधा न बनें।
SEWA की गतिविधियों में आर्थिक मदद का पहलू भी शामिल है। जरूरतमंद लोगों को सहायता देने की बात संस्था के काम का हिस्सा रही है। हालांकि संस्था से जुड़े लोगों का जोर केवल आर्थिक सहायता देने पर नहीं है। उनका मानना है कि लंबे समय में शिक्षा और रोजगार के अवसर किसी व्यक्ति और परिवार को अधिक मजबूत बना सकते हैं।
मुंबई में आयोजित कार्यक्रम इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यवतमाल और नागपुर से निकली पहल अब मुंबई जैसे बड़े महानगर तक पहुंची है। इसके बाद संस्था से जुड़े लोग महाराष्ट्र के दूसरे शहरों और कस्बों में भी काम शुरू करने की तैयारी की बात कर रहे हैं।

इस विस्तार के लिए स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। SEWA ने इसके लिए volunteer cadre camp शुरू किए हैं। योजना के अनुसार हर महीने एक रविवार को यवतमाल में ऐसे कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन कैंपों में संस्था से जुड़ने वाले लोगों को उसके विभिन्न कार्यक्रमों और काम करने के तरीके की जानकारी दी जाएगी।
शेख निजामुद्दीन ने SEWA से जुड़े लोगों से यवतमाल आने की अपील भी की है। उनका कहना है कि केवल संस्था से जुड़ना पर्याप्त नहीं है। जो लोग दूसरे शहरों में SEWA का काम शुरू करना चाहते हैं, उन्हें यवतमाल जाकर वहां चल रहे कार्यक्रमों को समझना चाहिए।
घर घर तालिमी बेदारी गश्त, सिविल सर्विसेज कोचिंग और मदरसा छात्रों के लिए रिहायशी कोचिंग जैसी पहलों को करीब से देखने पर दूसरे शहरों के लोग अपने इलाके के लिए योजना तैयार कर सकते हैं। यही मॉडल अलग अलग स्थानों पर जरूरत के अनुसार बदला भी जा सकता है।
यहां एक महत्वपूर्ण सवाल भी है। क्या किसी एक शहर में चल रही सामाजिक पहल को दूसरे शहरों में उसी तरह लागू किया जा सकता है। SEWA से जुड़े लोगों का जवाब है कि मूल विचार एक रह सकता है, लेकिन काम स्थानीय जरूरत के मुताबिक होना चाहिए। किसी जगह स्कूल शिक्षा बड़ी जरूरत हो सकती है। कहीं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी। किसी दूसरे इलाके में आर्थिक सहायता या करियर मार्गदर्शन की जरूरत ज्यादा हो सकती है।
इसी वजह से संस्था का विस्तार केवल शाखाएं खोलने का मामला नहीं है। इसके पीछे स्थानीय लोगों को साथ जोड़ने की कोशिश भी है। स्वयंसेवक अपने इलाके की जरूरत समझें और उसके हिसाब से काम आगे बढ़ाएं। यही वजह है कि volunteer cadre camp को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुंबई में कार्यक्रम के दौरान भरी हुई सभा और लोगों की गंभीर भागीदारी ने संस्था से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ाया है। उनका मानना है कि समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं जो कुछ करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही मंच और दिशा की जरूरत होती है।
SEWA उसी भावना को एक संगठित रूप देने की कोशिश कर रही है। संस्था का जोर शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर है। सिविल सर्विसेज कोचिंग, मदरसा छात्रों के लिए रिहायशी कोचिंग, घर घर शैक्षिक जागरूकता और आर्थिक मदद इसके प्रमुख क्षेत्रों में बताए जा रहे हैं।
यवतमाल से शुरू हुई यह पहल अब मुंबई तक पहुंच चुकी है। आगे नागपुर, मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे शहरों के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी इसके विस्तार की योजना बताई जा रही है। इसके लिए स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों को जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती भी होगी और सबसे बड़ा सहारा भी।
किसी सामाजिक पहल की असली सफलता इस बात से तय होती है कि वह कितने लोगों तक पहुंचती है और उनके जीवन में कितना वास्तविक बदलाव लाती है। SEWA के सामने भी यही कसौटी है। अगर शिक्षा की जागरूकता घर घर पहुंचती है, अगर छोटे शहरों के युवा सिविल सर्विसेज जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर मार्गदर्शन हासिल करते हैं और अगर मदरसा छात्रों को आगे बढ़ने के नए रास्ते मिलते हैं तो यह पहल अपने उद्देश्य के करीब पहुंच सकती है।
मुंबई का कार्यक्रम फिलहाल इसी विस्तार की एक नई शुरुआत है। यवतमाल से निकली SEWA ने अब महानगर का दरवाजा खटखटाया है। भरा हुआ हॉल इस बात का संकेत देता है कि शिक्षा, मार्गदर्शन और सामाजिक जिम्मेदारी की बात सुनने वाले लोग मौजूद हैं। अब अगला कदम यह होगा कि यह उत्साह शहरों से निकलकर मोहल्लों और कस्बों तक पहुंचे।
संस्था का संदेश भी यही है कि बदलाव के लिए केवल किसी एक संगठन पर निर्भर रहने के बजाय समाज के अलग अलग वर्गों को अपनी भूमिका तय करनी होगी। व्यापारी, शिक्षक, पेशेवर, युवा और बुजुर्ग सभी अपने स्तर पर योगदान दे सकते हैं।
यवतमाल में होने वाले मासिक volunteer cadre camps इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश हैं। अगर वहां तैयार होने वाले स्वयंसेवक अपने अपने शहरों में शिक्षा और मार्गदर्शन की ऐसी गतिविधियां शुरू करते हैं तो SEWA का दायरा महाराष्ट्र से आगे भी बढ़ सकता है।
फिलहाल मुंबई कार्यक्रम ने एक बात साफ कर दी है। यवतमाल और नागपुर से शुरू हुई यह सामाजिक पहल अब अपने अगले पड़ाव पर है। उसका लक्ष्य केवल संस्था का विस्तार करना नहीं, बल्कि शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, युवाओं के रोजगार और जरूरतमंदों की सहायता को लेकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।

